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अवैध उगाही और भ्रष्टाचार के दोषी, जालौन के डाइट प्राचार्य एमपी सिंह पर कार्रवाई आखिर कब ?

लखनऊ, नेशनल जनमत ब्यूरो।

जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाइट पिंडारी) जालौन के प्राचार्य पर अवैध उगाही और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप छात्र-छात्राओं ने लगाए। डीएम जालौन द्वारा कराई जांच में प्राचार्य भ्रष्टाचार में लिप्त भी पाए गए इसके बाद भी उनका प्राचार्य के पद पर बने रहना योगी सरकार की भ्रष्टाचार के प्रति मुहिम की हकीकत बयां करने के लिए पर्याप्त है।

जनपद जालौन की डाइट पिंडारी गांव में स्थित है। मदन पाल सिंह उर्फ एमपी सिंह यहां प्राचार्य के पद पर कार्यरत हैं। भ्रष्ट अधिकारी का तमगा हासिल कर चुके डाइट प्राचार्य पर डीएलएड (बीटीसी) और बीएलएड कर रहे छात्र-छात्राओं ने अटेंडेंस पूरी करने के नाम पर प्रति प्रशिक्षु 15 से 20 हजार रुपये लेने के आरोप लगाए थे।

इतना ही नहीं जिलाधिकारी के पास पहुंची शिकायत में प्राचार्य द्वारा पैसा ना देने पर प्रशिक्षुओं के उपस्थिति रजिस्टर अपनी अलमीरा में बंद करने, दो प्राथमिक विद्यालय के सहायक अध्यापकों को अनधिकृत रूप से डाइट में अटैच करने, इन्ही शिक्षकों से माध्यम से ट्रेनिंग और परीक्षा के नाम पर प्रशिक्षुओं से अवैध धन उगाही करने के गंभीर आरोप लगाए गए थे।

पैसा ना देने पर परीक्षा से वंचित करने की धमकी- 

श्री गंगाराम बांकेलाल महाविद्यालय हरसिंगपुर में बीटीसी प्रशिक्षण के प्रशिक्षुओं ने आरोप लगाया कि परीक्षा में शामिल करने के एवज में उनसे मोटी धनराशि की मांंग की जा रही है। शहर के एक शिक्षण संस्थान से बीटीसी कर रहे प्रशिक्षुओं ने भी नाम ना छापने की शर्त पर कहा कि उनसे भी परीक्षा में शामिल होने के लिए प्रति छात्र 20 हजार रूपये की मांग की जा रही है।

प्रशिक्षण हेतु पैसा लेकर बंद विद्यालय आवंटित करना- 

बीटीसी कोर्स के प्रशिक्षुओं को 1 महीने के लिए किसी प्राथमिक विद्यालय में ट्रेनिंग के लिए जाना होता है। इसके लिए डाइट प्राचार्य ने पैसा लेकर प्रशिक्षुओं को बंद या एकल विद्यालय आवंटित कर दिए। इतना ही नहीं छात्रवृत्ति के लिए भी प्रशिक्षुओं से धन मांगने के आरोप पर प्राचार्य पर लगाए गए।

इस बाबत नेशनल जनमत की टीम ने जब जालौन के उरई स्थित कुछ प्रशिक्षण संस्थानों में पूछताछ की तो कॉलेज संचालकों ने कहा भाईसाहब नाम मत छापिएगा नहीं तो आपको तो पता है एमपी सिंह किस टाइफ के अधिकारी हैं। संचालकों ने दबी जुबान स्वीकार किया कि प्राचार्य हर 15 दिन में आते हैं और उपस्थिति चैक करने के नाम पर कम से कम लाख रूपये ले जाते हैं।

इतना ही नहीं पैसा लेने के बाद भी बदतमीजी करते हैं कई बार तो भूल भी जाते हैं कि इस संंस्थान से पैसा ले गए हैं और फिर से आ धमकते हैं। हर एक काम के लिए उनको पैसा चाहिए।

डीएम की जांच में दोषी पाए गए- 

जिलाधिकारी जालौन डॉ. मन्नान अख्तर ने उक्त आरोपों की जांच के लिए 10 नबंबर 2017 को सीडीओ एसपी सिंह की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच कमेटी बनाई जिसमें डीआईओएस भगवत पटेल और सिटी मजिस्ट्रेट एनपी पांडेय को नामित किया गया।

तीनों उच्चअधिकारियों ने डाइट जाकर आरोपों की जांच की तो पाया गया कि डाइट प्राचार्य पूरी तरह से भ्रष्टाचार में संलिप्त हैं। डाइट में राघवेन्द्र भूषण द्विवेदी के माध्यम से प्रशिक्षुओं से अवैध वसूली कराई जा रही है। बेसिक शिक्षा अधिकारी की सहमति के बिना शिक्षकों को डाइट में अटैच किया गया और तमाम वित्तीय अनियमितताएं डाइट में पाई गईं।

मौके पर मौजूद ग्राम प्रधान पिंडारी अन्य गांव वाले व प्रशिक्षुओं ने भी डाइट प्राचार्य के खिलाफ उक्त जांच दल के सामने बयान दिए।

बेसिक शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव को लिखा कार्रवाई के लिए- 

जांच में दोषी पाए जाने पर डीएम डॉ. मन्नान अख्तर ने डायट प्राचार्य का दो दिन का वेतन काटते हुए बेसिक शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव को उक्त अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई के लिए पत्र लिखा।

सूत्रों के हवाले से पता लगा है कि सचिवालय में में दौड़ धूप करके उक्त अधिकारी ने अभी तक उस जांच को बेसिक शिक्षा विभाग के किसी सेक्शन ऑफीसर के माध्यम से दबा दिया था। लेकिन प्रशिक्षुओं ने सचिवालय जाकर प्रमुख सचिव से सीधे इस भ्रष्ट अधिकारी की शिकायत की इसके बाद अब ये मामला दोबारा खुलने की उम्मीद है।

इस बाबत दबी जुबान बीटीसी प्रशिक्षु स्वीकार करते हैं कि अभी तक तो भविष्य का डर दिखाकर प्राचार्य द्वारा हमसे खूब बसूली की गई लेकिन डीएम की जांच में दोषी साबित होने के बाद भी ऐसे भ्रष्ट अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जाती तो बीजेपी सरकार के खिलाफ हम सारे प्रशिक्षु लखनऊ में एकत्रित होकर प्रदर्शन करेंगे।

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