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डायट प्राचार्य एमपी सिंह पर कार्रवाई के लिए DM ने दोबारा लिखा पत्र, विधायक शिक्षा मंत्री से मिले

लखनऊ, नेशनल जनमत ब्यूरो।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टोलरेंस की बात करते हुए भ्रष्टाचार मुक्त प्रदेश बनाने के भाषण देते नहीं थकते लेकिन हकीकत ये है उनके मातहत अधिकारी ही उनकी मुहिम को पलीता लगाने में लगे हैं।

लालफीताशाही में फंसे सिस्टम का जीता जागता उदाहरण जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान जालौन के प्राचार्य एमपी सिंह (मदनपाल सिंह) का प्रकरण है। जिलाधिकारी जालौन द्वारा कराई गई जांच में भ्रष्टाचार और अवैध उगाही के दोषी पाए गए एमपी सिंह पर नवंबर 2017 में ही आरोप तय हो गए थे।

लेकिन जिलाधिकारी जालौन डॉ. मन्नान अख्तर के पत्र के बाद भी आरोपी प्राचार्य पर कार्रवाई नहीं हुई।

डीएम ने लिखा रिमाइंडर- 

जिलाधिकारी जालौन ने प्राचार्य का दो दिन का वेतन रोकते हुए प्रमुख सचिव बेसिक शिक्षा को जनवरी में पत्र लिखकर स्पष्ट कहा था कि डायट प्राचार्य के खिलाफ कार्रवाई करना आवश्यक है और उनको तमाम सबूत सीडी सहित प्रेषित किए थे।

लेकिन सूत्रों की मानें तो एमपी सिंह सचिवालय के चक्कर काटकर, बेसिक शिक्षा विभाग के सेक्शन में कर्मचारियों के माध्यम से आरोपों की फाइल दबाने में सफल रहे।

जालौन के युवा जिलाधिकारी डॉ. मन्नान अख्तर ने छात्र हित को ध्यान में रखते हुए 21 मार्च को अपर मुख्य सचिव बेसिक शिक्षा को रिमाइंडर लिखकर फिर से कार्रवाई के लिए लिखा है।

फिलहाल प्राचार्य एमपी सिंह पर लगे आरोपों की फाइल पंचम तल यानि मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंच चुकी है।

विधायक मूलचंद्र निरंजन मिले शिक्षा मंत्री से- 

जालौन की माधौगढ़ विधानसभा से बीजेपी विधायक मूलचंद्र सिंह निरंजन के पास भी तमाम छात्र-छात्राएं प्राचार्य की शिकायत लेकर पहुंचे थे। विधायक ने डीएम को पत्र लिखकर प्राचार्य के खिलाफ जांच के लिए कहा था। डीएम द्वारा तीन अधिकारियों से कराई जांच में प्राचार्य दोषी भी पाए गए।

डीएम के लिखने के बाद भी कार्रवाई ना होने पर विधायक माधौगढ़ मूलचंद्र सिंह निरंजन खुद बेसिक शिक्षा मंत्री अनुपमा जायसवाल से मिले और उनके सामने प्राचार्य एमपी सिंह का कच्चा चिठ्ठा रखा। सूत्रों के हवाले से पता चला है कि मंत्री ने पूरा प्रकरण समझने के बाद विधायक जी को तत्काल कार्रवाई का आश्वासन दिय है।

 

क्या है मामला- ?

जनपद जालौन की डाइट पिंडारी गांव में स्थित है। मदन पाल सिंह उर्फ एमपी सिंह यहां प्राचार्य के पद पर कार्यरत हैं। भ्रष्ट अधिकारी का तमगा हासिल कर चुके डाइट प्राचार्य पर डीएलएड (बीटीसी) और बीएलएड कर रहे छात्र-छात्राओं ने अटेंडेंस पूरी करने के नाम पर प्रति प्रशिक्षु 15 से 20 हजार रुपये लेने के आरोप लगाए थे।

इतना ही नहीं जिलाधिकारी के पास पहुंची शिकायत में प्राचार्य द्वारा पैसा ना देने पर प्रशिक्षुओं के उपस्थिति रजिस्टर अपनी अलमीरा में बंद करने, दो प्राथमिक विद्यालय के सहायक अध्यापकों को अनधिकृत रूप से डाइट में अटैच करने, इन्ही शिक्षकों से माध्यम से ट्रेनिंग और परीक्षा के नाम पर प्रशिक्षुओं से अवैध धन उगाही करने के गंभीर आरोप लगाए गए थे।

पैसा ना देने पर परीक्षा से वंचित करने की धमकी- 

श्री गंगाराम बांकेलाल महाविद्यालय हरसिंगपुर में बीटीसी प्रशिक्षण के प्रशिक्षुओं ने आरोप लगाया कि परीक्षा में शामिल करने के एवज में उनसे मोटी धनराशि की मांंग की जा रही है। शहर के एक शिक्षण संस्थान से बीटीसी कर रहे प्रशिक्षुओं ने भी नाम ना छापने की शर्त पर कहा कि उनसे भी परीक्षा में शामिल होने के लिए प्रति छात्र 20 हजार रूपये की मांग की जा रही है।

प्रशिक्षण हेतु पैसा लेकर बंद विद्यालय आवंटित करना- 

बीटीसी कोर्स के प्रशिक्षुओं को 1 महीने के लिए किसी प्राथमिक विद्यालय में ट्रेनिंग के लिए जाना होता है। इसके लिए डाइट प्राचार्य ने पैसा लेकर प्रशिक्षुओं को बंद या एकल विद्यालय आवंटित कर दिए। इतना ही नहीं छात्रवृत्ति के लिए भी प्रशिक्षुओं से धन मांगने के आरोप पर प्राचार्य पर लगाए गए।

इस बाबत नेशनल जनमत की टीम ने जब जालौन के उरई स्थित कुछ प्रशिक्षण संस्थानों में पूछताछ की तो कॉलेज संचालकों ने कहा भाईसाहब नाम मत छापिएगा नहीं तो आपको तो पता है एमपी सिंह किस टाइफ के अधिकारी हैं। संचालकों ने दबी जुबान स्वीकार किया कि प्राचार्य हर 15 दिन में आते हैं और उपस्थिति चैक करने के नाम पर कम से कम लाख रूपये ले जाते हैं।

डीएम की जांच में दोषी पाए गए- 

जिलाधिकारी जालौन डॉ. मन्नान अख्तर ने उक्त आरोपों की जांच के लिए 10 नबंबर 2017 को सीडीओ एसपी सिंह की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच कमेटी बनाई जिसमें डीआईओएस भगवत पटेल और सिटी मजिस्ट्रेट एनपी पांडेय को नामित किया गया।

तीनों उच्चअधिकारियों ने डाइट जाकर आरोपों की जांच की तो पाया गया कि डाइट प्राचार्य पूरी तरह से भ्रष्टाचार में संलिप्त हैं। डायट में पाया गया कि राघवेन्द्र भूषण द्विवेदी के माध्यम से प्रशिक्षुओं से अवैध वसूली कराई जा रही है। बेसिक शिक्षा अधिकारी की सहमति के बिना शिक्षकों को डायट में अटैच किया गया और तमाम वित्तीय अनियमितताएं डायट में पाई गईं थीं।

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