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क्रिकेट के मैदान में नहीं,खेत-खलियान में पीएम मोदी की नीतियों के कारण हार रहा है देश

नई दिल्ली। नेशनल जनमत ब्यूरो।

देश के पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान से चैंपियन ट्राफी गंवाने के बाद देश में एक अलग तरह की बहस शुरू हो गई है। जो लोग खेल को देशभक्ति से जोड़कर देखते हैं और अपने देश में उत्पाद मचाते है उनके लिए कहा जाने लगा है कि, देश क्रिकेट में हारने से नहीं हारता है देश फांसी लगा रहे अन्नदाताओं व बेरोजगार युवाओं से हारता है।

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बीते रोज लंदन के ओवल मैदान पर हुई दोनों देशों की भिडंत पर पाकिस्तान का पलड़ा भारी रहा। जिससे जो मायूसी देश के क्रिकेट फैंस को हाथ लगी वह काफी चिंताजनक थी।

सोशल मीडिया पर बहस शुरू हो गई। लोगों ने कहा कि, देश में अन्नदाता फांसी लगाकर मर रहे हैं कर्ज के बोझ में दबकर मर रहे हैं। यहां बेरोजगार युवा हैं कई युवा मरने जैसा फैसला ले रहे हैं। देश इन बातों में रोजाना हार रहा है लेकिन शायद हमलोगों को उसकी फिक्र नहीं है। हमलोग क्रिकेट में हारने से चिंतित है।

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इसके अलावा अभी हाल में बांग्लादेश क्रिकेट टीम के मशरफे मुर्तजा ने कहा था कि, देश हमें हीरो मानता है जबकि हम तो एक अऩ्न का दाना नहीं उगा सकते और ना ही हमलोग किसी की जान बचा सकते हैं। देश का असली हीरो किसान,डॉक्टर और मजदूर है। हमलोग तो सिर्फ मंनोरंजन के लिए एक खेल खेलते हैं।

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मध्यप्रदेश में 7 किसानों की मौत सब खामोश थे हाल ही में मध्यप्रदेश के मंदसौर में 7 किसानों की गोली मारकर हत्या कर दी गई। तब देश न जागा था न उनके लिए उठा था। ज्यादातर जगहों पर खामोशी सी थी। लेकिन क्रिकेट में हार गया तो मानों क्रिकेट नहीं पूरा देश हार गया हो।
आपको बता दें कि, भारतीय क्रिकेट टीम के चैंपियन ट्राफी हारने के बाद देश हारने की बात शुरू हो गई थी। लोगों को ऐसा लगने लगा था कि मानों क्रिकेट नहीं देश हार गया हो।

साभार – बोलता हिंदुस्तान

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