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गर्भपात के लिए SC की चौखट पर 10 साल की रेप पीड़िता, फिर क्यों ना बच्चियों को ‘फूलन’ बनाएं ?

नई दिल्ली। नेशनल जनमत ब्यूरो 

सुप्रीम कोर्ट में रेप शिकार एक नाबालिग गर्भवती लड़की को गर्भपात की इजाजत देने की मांग करते हुए याचिका दाखिल की गई है। याचिका में मांग की गई है कि अगर कोई नाबालिग रेप के कारण गर्भवती हुई है और भ्रूण 20 सप्ताह से ज्यादा का है, तो कानून में बदलाव करते हुए गर्भपात की इजाजत दी जानी चाहिए।

इस खबर पर रोष जताते हुए सामाजिक कार्यकर्ता दिव्या यादव लिखती  हैं कि –

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सुबह से एक ख़बर से मन व्यथित है। एक दस साल की बच्ची 26 हफ़्तों की गर्भवती है और अदालत का दरवाज़ा खटखटा रही जिससे गर्भपात कराने की अनुमति मिल सके!! जो अनुमति देने के लिए मठाधीश बने बैठे हैं और ये तंत्र जो बताता है की क़ानून का सहारा लो वो उस वक़्त कहाँ थे जब बलात्कार हुआ?

क्यूँ नहीं तत्काल क़दम उठाए गए? बच्ची अब भी इंतज़ार कर रही न्यायालय के आदेश का क्या अब इस स्टेज पर गर्भपात हो सकता है?
क्यूँ सारे क़ानून शोषित पर ही थोप दिए गए हैं?

ग़ुस्सा जायज़ है,अगर न्यायालयों का हाल यही है तो बिलकुल जायज़ है।विशेषकर पीड़ित और उसके परिवार से विवेकपूर्ण आचरण की उम्मीद करना बेमानी है।

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फ़िर क्यूँ न हमारी बच्चियों को “फूलन देवी” का पाठ पढ़ाया जाए? उन्हें आदर्श के रूप में स्थापित किया जाए!!
वही फूलन देवी जिन्होंने 15 साल की उम्र में गैंग रेप सहा और उसका बदला ज़ोरदार तरीक़े से लिया। जेल गईं और बाहर निकलकर राजनीति में सफल पारी खेली।

आज की लड़कियों को फूलन देवी से प्रेरणा लेने की ज़रूरत है उनके जैसा दिलेर बनने की ज़रूरत है। जहाँ ये संकीर्ण समाज लड़की के लिए बलात्कार के बाद सिवाय आत्महत्या के और कोई रास्ता नहीं छोड़ता वहाँ फूलन ने इतने साल पहले अपने जीवन को नए आयाम दिए।

फूलन देवी मल्लाह जाति से थीं जिन्हें अगवा कर ठाकुरों ने गैंग रेप किया जब वो बच्ची थीं जो कि पहले से अपने पति द्वारा प्रताड़ित थीं। उन्होंने आगे भी बहुत यातनाएँ सहीं लेकिन अंततः उन्होंने अपने ऊपर हुए ज़ुल्मों का बदला लिया और बहुत सही तरीक़े से लिया।

हर लड़की इतनी ही ताक़त और शक्ति से भरी हो तो अंजाम के डर से बलात्कार रुक जाएँगे।
फूलन देवी को आज के ही दिन किसी शेर सिंह राणा ने अपनी जाति के लोगों की मौत का बदला लेने के लिए गोली मार दी थी।
ऐसी वीरांगना को श्रद्धांजलि!

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इस देश में एक नाबालिग अगर रेप करता है तो उसे सज़ा नहीं मिलती उसके लिए सुधार गृह जैसी जगहें हैं मतलब उसको बालिगों की तरह ट्रीट न कर के उसके भविष्य की चिंता की जाती है और सुधरने का मौका भी दिया जाता है लेकिन यदि कोई 10साल की मासूम किसी वयस्क पुरूष के द्वारा बलात्कार का शिकार हो के गर्भवती हो जाए तो हमारा कानून उस बच्ची के साथ वयस्कों जैसा व्यवहार करता है । लानत है ।

मामला क्या है- 

कानून में 20 हफ्ते से ऊपर के भ्रूण के गर्भपात कराए जाने पर रोक है। दरअसल 10 साल की एक रेप पीड़ित लड़की गर्भवती है और उसका गर्भ 26 हफ्ते का है। चंडीगढ़ स्थित जिला जज ने गर्भपात कराने की इजाजत नहीं दी जिसके बाद ये मामला सुप्रीम कोर्ट के सामने आया है और एम्स के डॉक्टरों की टीम से जांच के बाद गर्भपात की इजाजत की गुहार लगाई गई है।

सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ता के वकील अलख आलोक श्रीवास्तव ने कहा है कि लड़की रेप से गर्भवती हुई है, लिहाजा मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेगनेंसी ऐक्ट (एमटीपी) ऐक्ट की धारा-3 में बदलाव किया जाए और 20 हफ्ते से ज्यादा के गर्भ होने के बावजूद मेडिकल बोर्ड की सलाह से गर्भपात की इजाजत होनी चाहिए।

इसके लिए देश भर के प्रत्येक जिले में मेडिकल बोर्ड का गठन होना चाहिए जो ऐसे मामले का परीक्षण करे और उनकी सलाह के बाद गर्भपात कराया जाए।

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लड़की के रिश्तेदार ने ही किया रेप- 

इस लड़की के साथ उसके रिश्तेदार ने रेप किया है। वरह 26 हफ्ते की गर्भवती है। याचिका में कहा गया है कि देश में आए दिन बच्चियों के साथ बलात्कार की घटनाएं हो रही है कई मामले ऐसे आएं हैं जिनमें इन कारणों से बच्चियां गर्भवती तक हुई हैं।

ऐसे मामले में कई बार 20 हफ्ते बाद ही गर्भवती होने का पता तक चल पाता है और कानून के तहत 20 हफ्ते से ऊपर की स्थिति में गर्भपात नहीं कराया सकता और इस कारण गर्भपात से मना कर दिया जाता है ऐसे में एक्ट में बदलाव किया जाए और बलात्कार पीड़ित नाबालिग के केस को अपवाद बनाया जाए।

क्या है कानून- 

कानूनी जानकार बताते हैं कि गर्भपात तभी कराया जा सकता है जब गर्भ के कारण महिला की जिंदगी खतरे में हो। 1971 में एक अलग कानून बनाया गया और इसका नाम रखा गया मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेगनेंसी ऐक्ट, जिसके तहत तमाम प्रावधान किए गए हैं। कानून के तहत 20 हफ्ते तक की भ्रूण को महिला के वेलफेयर को देखते हुए डॉक्टर की सलाह से गर्भपात किया जा सकता है। अगर महिला की जान खतरे में हो तो उसके बाद भी कोर्ट की इजाजत से प्रेगनेंसी टर्मिनेट किया जा सकता।

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