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दलित मुस्लिमों के आरक्षण की मांग को लेकर पसमांदा मुस्लिम समाज ने लखनऊ में किया प्रदर्शन

नई दिल्ली/लखनऊ। नेशनल जनमत ब्यूरो

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 341 ने सिर्फ हिंदू, बौद्ध और सिखों को यह हक दिया है कि वे अनुसूचित जाति को मिलने वाले आरक्षण का लाभ उठा सकते हैं. ये लाभ मुस्लिमों और ईसाइयों को नहीं मिलता. इसी अनुच्छेद में बदलाव करके दलित मुस्लिमों को भी आरक्षण देने की मांग को लेकर पसमांदा मुस्लिम समाज के लोगों ने लखनऊ में धरना प्रदर्शन किया।

लखनऊ में गांधी प्रतिमा हजरत गंज चौराहे पर आल इन्डिया पसमांदा मुस्लिम महाज ने अनुच्छेद 341 से पाबन्दी हटाने और दलित पसमांदा और दलित ईसाई को एस० सी० आरक्षण की सूची में शामिल करने की मांग को लेकर धरना देने के बाद ज्ञापन भी दिया गया। इस दौरान दलित दलित एक समान हिन्दू हो या मुसलमान  के नारे भी लगाए गए।

सामाजिक कार्यकर्ता फ़ैयाज़ अहमद फैज़ी कहते हैं कि धर्मनिरपेक्षता के नाम पर हमारा संविधान अनुच्छेद 341 के आधार पर भेदभाव करता हुआ पाया जाता है. क्योंकि एक हिंदू धोबी, हिंदू बाल्मिकी तो आरक्षण का लाभ ले सकता है लेकिन मुस्लिम धोबी या मुस्लिम मेहतर यह लाभ नहीं ले सकता. फैयाज कहते हैं कि धर्मनिरपेक्ष देश में धर्म के आधार पर आरक्षण की मनाही कैसे हो सकती है?

1950 से पहले मिलता था लाभ- 

10 अगस्त 1950 से पहले सभी धर्मो के दलितों को एससी का आरक्षण मिलता था लेकिन 10 अगस्त 1950 को संविधान के अनुच्छेद 341 में प्रेशीडेंशियल आदेश के तहत पैरा 3 जोड़ दिया गया जिसमे कहा गया कि दलितों को मिलने वाली सुविधाएं (आरक्षण ) केवल हिन्दू दलित को मिलेगा फिर 1956 में सिखों को और 1990 में बौद्ध को शामिल कर लिया गया मुस्लिम दलित और ईसाई दलित आज भी इस सुविधा से वंचित हैं।

इस मौके पर पसमांदा महाज़ के राष्ट्रीय महासचिव वक़ार हवारी ने कहा कि मुस्लिमो के नाम से चलने वाले संस्थाओ में पसमांदा दलितों को कब भागीदारी दी जाएगी? जहाँ उच्च अशराफ वर्ग का वर्चस्व हैं।

राष्ट्रीय सचिव मारूफ अंसारी ने अशराफ वर्ग को पसमांदा दलितों के आरक्षण न मिलने का जिम्मेदार बताते हुए कहा कि अम्बेडकर द्वारा लाये गए मुस्लिम दलितों के आरक्षण के प्रस्ताव का सबसे प्रबल विरोध अशराफ मुस्लिमो द्वारा किया गया और प्रस्ताव के विरोध में वोट करके प्रस्ताव को गिरा दिया।

 

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