You are here

जस्टिस कर्णन के समर्थन में पोस्टर जारी- दलित सांसदों और विधायकों, तुम पर धिक्कार है, शर्म करो

नई दिल्ली/तमिलनाडु। नेशनल जनमत ब्यूरो

दलित समुदाय से आने वाले कलकत्ता हाईकोर्ट के पूर्व जस्टिस सीएस कर्णन की गिरफ्तारी ने देश में और सोशल मीडिया पर एक बड़ी बहस को जन्म दे दिया है. सोशल मीडिया पर सक्रिय सामाजिक चिंतक इस बात पर एकमत दिखाई दे रहे हैं कि इस देश में ब्राह्मणवादियों नें संविधान में दिए गए समता, स्वतंत्रता, न्याय, वंधुत्व जैसे मानवीय विचारों की हत्या कर दी है और ये देश को मनु के संविधान मनुस्मृति की तरफ ले जाने के लिए लगातार प्रयासरत हैं.

वहीं लोगों में इस बात को लेकर भी रोष पनप रहा है कि दलितों के नाम पर राजनीति करने वाले लोग और दल क्यों शांत बैठे हैं. क्यों नहीं इस आवाज को विधानसभा से लेकर संसद में उठाया जा रहा है. सवर्णों के खिलाफ लड़ने की एक दलित जज को इतनी बड़ी सजा भुगतनी होगी.

इसे भी पढ़ें-दलित राष्ट्रपति बनाना दलित की श्रेष्ठता नहीं बल्कि सवर्णें का बड़प्पन साबित करने का प्रयास है

तमिलनाडु की दीवार पर पटे पोस्टर 

इस बहस के बीच तमिलनाडु के न्याय पसंद लोगों ने इस न्याय के योद्धा के लिए दीवारों पर जस्टिस कर्णन के समर्थन में पोस्टर लगाए हैं. भारतीय न्यायिक इतिहास में यह भी पहली बार हुआ है, जब किसी जस्टिस का पोस्टर बनाकर उसे आंदोलन का रूप दिया जा रहा है. सड़कों पर समर्थन में प्रदर्शन हो रहे हैं. वकीलों ने रैलियाँ निकालीं.

इसे भी पढ़े- जस्टिस कर्णन की गिरफ्तारी के बाद छिड़ी बहस, देश क्या आज भी मनु की मनुस्मृति के चल रहा है

पोस्टर में तमिल भाषा में यह लिखा है- –

जस्टिस सी. एस. कर्णन गिरफ़्तार हो गए।
क्या यह न्याय है?
जवाब दो।
एक तरफ़ दिखावे के लिए एक दलित को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया गया. दूसरी तरफ़ सत्य के प्रहरी जस्टिस कर्णन को गिरफ्तार कर लिया गया.संसद और विधानसभाओं के दलित सांसदों और विधायकों, तुम्हें धिक्कार है। शर्म करो।

इसे भी पढ़ें- जिस जज पर लगाए थे जस्टिस कर्णन ने आरोप उसी जस्टिस को सौंप दिया कर्णन का केस

द्वारा
एम. मतिपेरियानार
आंबेडकर मक्कल पाडल, तमिलनाडु

दलित होकर भी सवर्ण जजों के भष्ट्राचार के खिलाफ आवाज उठाने की सजा- 

न्यायपालिका में भ्रष्टाचार का आरोप लगाने वाले जस्टिस कर्णन देश में हाईकोर्ट के पहले जस्टिस हैं जिनको सेवानिवृत्त होने के बाद गिरफ्तार किया गया है. कोलकाता हाईकोर्ट के जज जस्टिस कर्णन का कसूर बस इतना था कि दलित होकर भी उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के 20 जजों पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय से जांच की मांग की थी. अब देश की न्याय व्यवस्था की जिम्मेदारी संभाल रहे पुराधाओं ने भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वाले जज को ही 6 महीने की सजा सुना दी.  अब जस्टिस कर्णन के समर्थन मे लाखों लोग आन्दोलन की रूप रेखा बना रहे है .

इसे भी पढ़ें-किसानों को योगा सिखाने वालों में दम है तो इस किसान पुत्र की तरह भैंस शीर्षासन करके दिखाए

Related posts

Share
Share