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सरकार ने डालमिया ग्रुप के हवाले किया दिल्ली का ‘लाल किला’ लोग बोले संसद को कब बेचेंगे मोदी जी

नई दिल्ली, नेशनल जनमत ब्यूरो। 

हर सरकार के काम करने का अपना एक तरीका होता है, जैसे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी विकास के नाम पर अपनी सरकार से ज्यादा औद्योगिक घरानों और उद्योगपतियों पर भरोसा करते हैं।

तमाम सारे सरकारी विभागों के निजीकरण की खबरों के बीच मोदी सरकार ने शाहजहां के लाल किले को अब डालमिया ग्रुप (Dalmia Group) के हाथों में देने का फैसला कर लिया है।

डालमिया ग्रुप भारत के इतिहास में ऐसा पहला कॉर्पोरेट हाउस बन गया है जिसने ऐतिहासिक स्मारक लाल किले (Red Fort) को 5 साल के कॉन्ट्रैक्ट पर गोद लिया है इसलिए लाल किला अब से डालमिया लाल किला होगा.

डालमिया समूह ने 25 करोड़ रूपये में इस वैश्विक धरोहर को पाँच साल के लिए गोद ले लिया है. टाइल्स,बोर्ड, निर्माण से लेकर रिस्टोरेशन तक सारे काम डालमिया समूह कराएगा.

अब लाल किला सांस्कृतिक आयोजनों के लिए किराए पर भी दिया जा सकेगा. अर्ध व्यावसायिक गतिविधियां भी की जा सकेंगी, किराया भी बढाया जा सकेगा. लेकिन इससे आई राशि डालमिया नहीं रखेंगे, वह लाल किले के ही रख रखाव में खर्च होगी।

लेकिन सभी महत्त्वपूर्ण स्थलों/आयोजनों में डालमिया ग्रुप अपने ब्रांड का इस्तेमाल कर सकता है यानि अपना विज्ञापन जहां तहां चिपका सकते हैं.

प्रधानमंत्री के संबोधन पर क्या होगा ?

हर 15 अगस्त को भारत के प्रधानमंत्री लाल किले से पूरे देश को संबोधित करते हैं। 15 अगस्त के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण से पहले जुलाई में डालमिया ग्रुप को लाल किला फिर से सिक्योरिटी एजेंसियों को देना होगा।

इसके बाद ग्रुप फिर से किले को अपने हाथ में ले लेगा। इस बारे में डालमिया भारत ग्रुप, टूरिज्म मंत्रालय, आर्कियोलॉजी सर्वे ऑफ इंडिया (ASI) के बीच 9 अप्रैल को हस्ताक्षर हुए।

लाल किले को पांचवें मुगल बादशाह शाहजहां ने 17वीं शताब्दी में बनाया था। शाहजहां ने उस समय अपनी राजधानी को आगरा से दिल्ली स्थानांतरित किया था।

डालमिया ग्रुप ने ये कॉन्ट्रैक्ट इंडिगो एयरलाइंस और जीएमआर ग्रुप को हराकर जीता है। ये कॉन्ट्रैक्ट सरकार की ऐतिहासिक स्मारकों को गोद देने की स्कीम ‘एडॉप्ट ए हेरिटेज’ का हिस्सा है।

डालमिया ग्रुप ने इस बात पर विचार शुरू कर दिया है कि वो कैसे लाल किले का विकास करेगा। इसके लिए ग्रुप 23 मई से काम भी शुरू कर देगा।

क्या है कॉन्ट्रेक्ट- 

कॉन्ट्रैक्ट के मुताबिक ग्रुप को 6 महीने के भीतर लाल किले में बेसिक सुविधाएं देनी होंगी। इसमें पीने के पानी की सुविधा, स्ट्रीट फर्नीचर जैसी सुविधा शामिल हैं।

एक साल के भीतर उसे टेक्टाइल मैप, टायलेट अपग्रेडेशन, रास्तों पर लाइटिंग, बैटरी से चलने वाले व्हीकल, चार्जिंग स्टेशन और एक कैफेटेरिया बनाना होगा। इसके लिए डालमिया ग्रुप टूरिस्ट से पैसे चार्ज कर सकेगा।

ग्रुप को जितना पैसा मिलेगा उसे वो पैसा फिर से लाल किले के विकास पर ही लगाना होगा। ग्रुप लाल किले के भीतर अपनी ब्रांडिंग का उपयोग कर सकेगा। सरकार ने ‘एडॉप्ट ए हेरीटेज’ स्कीम सितंबर 2017 में लॉन्च की थी। देश भर के 100 ऐतिहासिक स्मारकों के लिए ये स्कीम लागू की गई है।

इसमें ताजमहल, कांगड़ा फोर्ट, सती घाट और कोणार्क मंदिर जैसे कई प्रमुख स्थान हैं। ताज महल को गोद लेने के लिए जीएमआर स्पोर्ट्स और आईटीसी अंतिम दौर में है।

सामाजिक कार्यकर्ता हिमांशु उल हक लिखते हैं कि लाल किला वैश्विक धरोहर है, आम तौर पर पुरातात्विक महत्त्व की सारी इमारतें अभी तक आर्कियोलोजिकल सर्वे ऑफ़ इंडिया के जिम्मे रहती आयी हैं और किसी भी निजी व्यक्ति या संस्था को इनसे दूर रखा जाता है.

इस नियम का पालन अभी तक बहुत सख्ती से किया जाता रहा है ताकि पुरातात्विक महत्त्व की इमारतों का मूल स्वरूप खंडित न हो. मगर इस बार अर्कियोलोजिकल सर्वे ऑफ़ इंडिया कोई आपत्ति न करे , इसका प्रावधान एमओयू में ही है.

डालमिया समूह द्वारा किये गए सभी परिवर्तनों को ‘हानिरहित’ माना जाएगा. आगे खबर ये है कि सौ और वैश्विक धरोहरें कार्पोरेट के हाथ में जाने वाली हैं. इनमें ताजमहल, कांगड़ा फोर्ट और कान्हेरी केव्स सबसे पहले जा रही हैं.

वैसे मैं समझ नहीं पा रहा हूँ कि संसद भवन को अम्बानी संसद बनाने में कहाँ दिक्कत है ?

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