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दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के बाद झुका JNU प्रशासन, दिलीप यादव को मिला पीएचडी रजिस्ट्रेशन

नई दिल्ली। नेशनल जनमत ब्यूरो 

जेएनयू प्रशासन से ओबीसी हिस्सेदारी की मांग करने वाले दिलीप यादव को दिल्ली हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद पीएचडी में रजिस्ट्रेशन और हॉस्टल दोनों मिल गया है।

27 जुलाई को विश्वविद्यालय प्रशासन ने उन्हें हॉस्टल से बाहर निकाल दिया था और उसके पहले 19 जुलाई को जेएनयू प्रशासन ने दिलीप का रजिस्ट्रेशन रोक दिया था, MA, M.PhilL की डिग्री देने से मना कर दिया था और PhD में 9 B देने से भी मना कर दिया था।

दिलीप ने आरोप  है कि इस पूरी साजिश के पीछे कारण बस ये है कि हम लोगों ने UGC गैजेट और इंटरव्यू में जातिगत भेदभाव का विरोध किया था, उसी प्रोटेस्ट के लिए प्रशासन द्वारा ऐसा किया जा रहा है.

जेएनयू प्रशासन के संघी चरित्र के खिलाफ लड़ाई जारी रहेगी- 

‘माननीय दिल्ली हाई कोर्ट के द्वारा दिए गए जेएनयू प्रशासन को निर्देश से मेरा PhD में रजिस्ट्रेशन हो गया है साथ में हॉस्टल भी मुझे मिल गया है। जेएनयू स्टूडेंट्स कम्युनिटी तथा जेएनयू से बाहर के लोगो का भी बहुत बहुत धन्यवाद् जो मेरे साथ खड़े रहे और मुझे लड़ने का साहस दिए। जब तक हमारे अधिकार नही मिल जाते तब तक हमारी लड़ाई जारी रहेगी, इस तानाशाही जेएनयू प्रशासन और सरकार के खिलाफ।’

क्या था मामला- 

दरअसल 26 दिसंबर को जेएनयू में विद्वत परिषद की बैठक के दौरान 9 छात्रों ने हिस्सेदारी की मांग को लेकर प्रदर्शन किया था. छात्रों का आरोप है कि पीएचडी में जो वायवा होता है उसमें ओबीसी-एससी छात्रों के साथ भेदभाव होता है. इसलिए पीएचडी के लिए होने वाले वायवा के अंकों को कम करके उसे लिखित परीक्षा में जोड़ा जाए. इसके अलावा यूजीसी द्वारा पीएचडी के नियमों में बार-बार बदलाव करके ओबीसी-एससी के छात्रों की संख्या कम करने के  लिए की जा रहीं साजिशों का विरोध भी किया था।

ओबीसी का कोई प्रोफेसर नहीं जेएनयू में –

प्रदर्शन में शामिल छात्रों ने बताया कि अब्दुल नासे कमेटी की रिपोर्ट में इस बात को माना गया है कि ओबीसी-एससी के छात्रों के साथ वायवा में भेदभाव किया जाता है इसलिए 100 प्रतिशत वायवा को चयन का आधार नहीं बनाया जा सकता. मुलायम सिंह का कहना है कि इतने सालों से आरक्षण मिलने के बाद भी जेएनयू कैम्पस में ओबीसी का कोई भी प्रोफेसर क्यों नहीं है? छात्रों ने कहा कि प्रशासन भेदभाव के चलते ओबीसी-एससी के लोगों को ऊपर आने ही नहीं देता.

ये थे नौ निलंबित छात्र-

आपको बता दें कि 26 दिसंबर को जेएनयू में एकेडमिक काउंसिल की मीटिंग के दौरान नौ छात्र शकील अंजुम, मुलायम सिह यादव, दिलीप कुमार यादव, दिलीप कुमार, भूपाली विट्ठल, मृत्युंजय सिंह यादव, दावा शेरपा, एस राहुल, प्रशांत कुमार को एडमिशन में ओबीसी हिस्सेदारी की मांग करने के आरोप के बाद निलंबित कर दिया गया था।

 

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