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नोटबंदी के 1 साल: मोदी सरकार नोटबंदी के दौरान मारे गए लोगों की मौत का जश्न मना रही है- विपक्ष

नई दिल्ली, नेशनल जनमत ब्यूरो। 

नोटबंदी लागू होने के एक साल पूरा होने पर दिन भर सत्ता पक्ष-विपक्ष में खींचतान होती रही। सत्ता पक्ष जहां नोटबंदी का जश्न मना रहा था वहीं विपक्ष काला दिवस मनाकर नोटबंदी की विफलताओं को गिना रहा था।

सत्ता पक्ष और विपक्ष में दिन भर जुबानी जंग चलती रही. प्रधानमंत्री मोदी समेत समूची केंद्र सरकार ने जहां कालाधन विरोधी दिवस मनाते हुए दिन भर नोटबंदी के फायदे गिनाए और अपनी वाहवाही की, वहीं विपक्षी दलों ने जनता को हुई तकलीफों का जिक्र करते हुए काला दिवस मनाया.

कांग्रेस समेत लगभग सभी विपक्षी दलों ने नोटबंदी का कोई मकसद हासिल न होने को लेकर सरकार पर जमकर निशाना साधा. मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने कहा कि प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री को इस नाकाम निर्णय के लिए देश की जनता से माफी मांगनी चाहिए.

सरकार द्वारा कालाधन विरोधी दिवस मनाने पर हमला बोलते हुए वामदलों ने कहा है कि मोदी सरकार नोटबंदी के दौरान मारे गए गए लोगों की मौत का जश्न मना रही है.

प्रदर्शन में माकपा नेता वृंदा करात ने कहा कि मोदी सरकार ने दो रिकार्ड कायम किए. पहला, जनता को कतारों में खड़े होने को मजबूर कर दिया और दूसरा देश दुनिया को नोटबंदी से कालाधन वापस लाने का भरोसा दिलाया. जबकि हकीकत में उन्होंने नोटबंदी के दौरान कालाबाजारी करने वालों को कालेधन को वैध बनाने में मदद की.

करात ने कहा कि भारत के इतिहास में पहली बार ऐसा हो रहा है जब कोई सरकार अपने नागरिकों की मौत और परेशानियों का जश्न मना रही है.

सभी छह वामदलों भाकपा, माकपा, फारवर्ड ब्लॉक, रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी, भाकपा माले और सोशलिस्ट यूनिटी सेंटर ऑफ इंडिया ने नोटबंदी के विरोध में आयोजित सामूहिक प्रदर्शन में हिस्सा लिया.

सरकार को माफी मांगनी चाहिए- कांग्रेस 

कांग्रेस ने नोटबंदी की घोषणा होने के एक वर्ष पूरा होने पर कहा कि प्रधानमंत्री मोदी एवं वित्त मंत्री अरुण जेटली को आज के दिन इस निर्णय के लिए देश से माफी मांगनी चाहिए. पार्टी ने सरकार से यह भी सवाल किया कि आखिर इस फैसले से हासिल क्या हुआ.

कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने दिल्ली में संवाददाताओं से कहा, नोटबंदी एवं जीएसटी का प्रभाव अब पूरे देश में महसूस किया जा रहा है. यह केवल कांग्रेस नहीं बल्कि लगभग प्रत्येक अर्थशास्त्री का मानना है. इसके कारण न केवल भारत की विकास गाथा थम गई है बल्कि लाखों लोग रोजगारहीन हो गए.

उन्होंने कहा, इसके लिए प्रधानमंत्री को देश से माफी मांगनी चाहिए. अच्छा होता कि आज के दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री अरुण जेटली देश से माफी मांगते कि उनसे गलती हो गई है और वे इसकी जांच कराएगे. माफी मांगने से कोई छोटा नहीं होता. किन्तु वे सत्ता के अहंकार में इतने चूर हैं कि वह कभी ऐसा नहीं करेंगे.

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