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यै कैसी ‘देशभक्त’ सरकार ? मोदी-राजनाथ पर सवाल उठाने वाला जवान निलंबित, फिर गिरफ्तार

नई दिल्ली, नेशनल जनमत ब्यूरो। 

सेना कै शौर्य को बड़ी-बड़ी होर्डिंग लगाकर बेचने वाली मोदी सरकार के राज में भी सेना के जवानों की दुर्दशा किसी से छिपी नहीं है। जवान तेजबहादुर यादव ने सोशल मीडिया पर वीाडियो जारी करके खाने की क्वालिटी पर सवाल उठाए थे।

सरकार ने आरोपों पर गौर करने की मामला ठंडा होते ही कई आरोप लगाकर उन्हे नौकरी से हटा दिया। अब एक बार फिर पीएम और गृहमंत्री पर सवाल उठाने वाले जवान को पर कार्रवाई की गई है।

मामला केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) का है। सीआरपीएफ एक जवान ने वीडियो जारी करके प्रधानमंत्री और गृह मंत्री की आलोचना की थी। अब देशभक्ति का राग अलापने वाली सरकार के राज में इस जवान को निलंबित करने के बाद गिरफ़्तार कर लिया गया है।

जवान पंकज मिश्रा ने अप्रैल महीने में एक वीडियो जारी कर कहा था कि राजनाथ सिंह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सही जानकारी नहीं दे रहे हैं. दरअसल छत्तीसगढ़ के सुकमा में हुए नक्सली हमले में पंकज का एक रिश्तेदार भी शामिल था.

15 अक्टूबर को पंकज मिश्रा का निलंबन हुआ था. अप्रैल की घटना के बाद विभाग ने आंतरिक जांच का आदेश दिया था. मिश्रा को असम पुलिस ने भारतीय दंड संहिता और आई अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत गिरफ्तार किया है.

वीडियो जारी करते ही परेशानियां बढ़ी- 

पंकज द्वारा जारी किए गए वीडियो के वायरल हो जाने के बाद, उसे सीआरपीएफ के दिल्ली मुख्यालय तलब किया गया था. उन्होंने इसे मामले को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया और सरेंडर करने के लिए सुरक्षा मांगी.

उच्च न्यायालय की सलाह पर उन्होंने 6 मई को सीआरपीएफ के महानिदेशक के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया था. एक आंतरिक जांच लंबित होने के बाद उन्हें असम के जोरघाट शहर के रोहरीह इलाके में स्थित 119 बटालियन को स्थानांतरित कर दिया गया था.

पंकज को विभाग की तरफ से वीडियो या सोशल मीडिया पोस्ट न करने की चेतावनी दी गई और उनका फ़ोन भी वरिष्ठ अफसरों द्वारा ले लिया गया. 7 अक्टूबर को उन्होंने अपने दोस्त के फ़ोन से एक और वीडियो जारी किया.

देखिए वीडियो- 

सीआरपीएफ जवानों की सुरक्षा को लेकर आरोप लगाए थे- 

दोबारा जारी वीडियो में उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें अप्रैल में जारी वीडियो के बाद पीटा गया और जोरहाट कैंप से जारी किए गए वीडियो के बाद भी पीटा गया है. उन्होंने सिंह और मोदी पर सीआरपीएफ जवानों की सुरक्षा के मुद्दों को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया था.

वीडियो में उन्होंने अपने विभाग के 22 लाख साथी जवानों से असमानता के खिलाफ़ आवाज़ उठाने का आग्रह किया था. उनकी मांगों में कामकाज का समय तय करना, अधिकारियों की तरह एक तरह का भोजन, साप्ताहिक छुट्टी और शारीरिक दंड देने के रिवाज़ का अंत होना चाहिए.

पंकज ने आगे कहा कि वो विरोध में 21 दिन की भूख हड़ताल शुरू कर रहे हैं और यदि भाजपा सैनिकों के अधिकारों का समर्थन नहीं करती है, तो कमल 2019 में नहीं खिलेगा.

पंकज को स्थानीय अदालत में पेश किया गया. हालांकि संवाददाताओं से बात करते हुए उन्होंने कहा, ‘कुछ भी गलत नहीं किया है और भविष्य में विभाग और अन्य क्षेत्रों में समस्याओं को उजागर करना जारी रखेंगे, उन्हें फ़िलहाल न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है.

अप्रैल में ही सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के सैनिक तेज बहादुर यादव, जिन्होंने एक वीडियो जारी कर आरोप लगाया गया था कि भारत-पाकिस्तान सीमा पर तैनात सैनिकों को खराब मादक पदार्थों से युक्त भोजन परोसा जा रहा है. वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था जिसके बाद उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था.

योगी ने पूर्ववर्ती सरकारों के शासन पर कहा, वह रावण राज्य था जो जाति, परिवार और क्षेत्र के नाम पर भेदभाव करता था. अब वे ही लोग भाजपा सरकारों पर ऐसे आरोप लगा रहे हैं, जिनका खंडन करना हम अपना अपमान समझते हैं. सरकार विकास कार्य से रामराज्य की परिकल्पना को साकार करना चाहती है.

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