You are here

OBC हिस्सेदारी मांग रहे दिलीप यादव JNU हॉस्टल से बाहर, छात्र बोले संघी AGENDA लागू कर रहे हैं कुलपति

नई दिल्ली। नेशनल जनमत ब्यूरो 

आज दूसरे दिन भी प्रशासन ने कमरा नही खोला, हमारा कमरे के बाहर रहने का प्रोटेस्ट जारी रहेगा. जेएनयू प्रशासन ने कल माननीय उच्च न्यायालय दिल्ली के निर्णय का भी ध्यान नही रखा था.

आज हमारे जेएनयू के प्रेसिडेंट मोहित पांडेय को प्रशासन के साथ मीटिंग करने से गेट पर ही रोक दिया गया है जो बहुत ही शर्मनाक है और पूरी तरह अलोकतांत्रिक है.

इसे भी पढ़ें-कुलपति बोले देशभक्ति जगाने के लिए JNU में रखना होगा युद्ध टैंक, छात्र बोले संघ की गुलामी बंद करो

वाईस चांसलर ने यूनिवर्सिटी को संघ की जागीर समझ लिया है, संघ को खुश करने के लिए वाईस चांसलर साहेब सामाजिक न्याय का खुले आम शोषण करने पर उतारू है. लेकिन वाईस चांसलर साहेब भूल जा रहे है, छात्र अपने हितो को लिए लड़ना अच्छी तरह जानते है और आपके नोटिस, डिग्री रोकने, हॉस्टल से निकाले जाने इन सब से डरने बाले नही है.

छात्र एकता जिन्दाबाद।

ये कहना है सामाजिक न्याय के लिए लड़ने वाले एक योद्धा दिलीप यादव का। फोटो में हॉस्टल के बाहर बैठकर काम कर रहा ये शख्स जेएनयू के जातिवादी और तानाशाही रवैये के खिलाफ अपने साथियों के साथ ताल ठोके हुए हैं. झुकने को बिल्कुल तैयार नहीं। वहीं जेएनयू कुलपति का तानाशाही रवैया धीर-धीरे और बढ़ता जा रहा है।

इसे भी पढ़ें-ओबीसी अधिकारों क लिए लड़ने वाले 4 निलंबित छात्रों की याचिका पर हाईकोर्ट ने जेएनयू से मांगा जवाब

दरअसल गुरुवार को प्रशासन ने दिलीप यादव के हॉस्टल रूम में ताला लगाकर उनको बाहर कर दिया था। तब से दिलीप रूम के बाहर ही बैठकर कुलपति की तानाशाही के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। वहीं देशभर से दिलीप यादव के संघर्ष को समर्थन देते हुए लोगों ने कुलपति एम जगदीश के संघी एजेंडे के खिलाफ जमकर भड़ास निकाली है।

न्याय पसंद छात्रों और लोगो को दिलीप को भरपूर समर्थन भी मिल रहा है- 

दिलीप खुद लिखते हैं –

आखिरकार प्रशासन ने पूरी तरह से बाहर निकाल ही दिया, सामाजिक न्याय की आवाज को दबाना और मनुवाद को स्थापित करना प्रशासन ने ठान लिया है..

मै जब इस जेएनयू कैंपस में 2009 आया तब कुछ लेके नही आया था लेकिन आज यहां जो सीखा वो है सामाजिक न्याय के लिए संघर्ष जो हमेशा साथ रहेगा. सामाजिक न्याय के लिए झुका नही जाएगा इसके लिए और ताकत से लड़ा जाएगा.. वैसे इसी संघर्ष के दौरान अभी तक दो अवार्ड मिले हैं एक भगत सिंह के नाम पर भगत रत्न और दूसरा सामाजिक न्याय अवार्ड ये दोनों भी हमेशा साथ रहेगे.

इसे भी पढ़ें-ओबीसी हितों के लिए संघर्ष करने वाले दिलीप यादव की पीएचडी पर जेएनयू प्रशासन की रोक

बीरेन्द्र कुमार- (नौ छात्रों में से एक जिसे निष्कासित किया गया था)

जेएनयू प्रशासन इस हद तक छात्र विरोधी हो चुका है कि उसे अब उच्च न्यायालय के आदेश का अवमानना करने पर भी डर नही लगता है।
साथी दिलीप यादव को जब कोर्ट ने 28 जुलाई तक रजिस्ट्रेशन लेने का समय दिया है, लेकिन इसके पहले ही 27 जुलाई को ही जेएनयू प्रशासन ने दिलीप यादव के कमरे को गैरकानूनी तरीके से बंद कर होस्टल से निकाल दिया।

वहीं दूसरी तरफ अभी तक जेएनयू छात्र संघ अध्यक्ष मोहित कुमार पांडेय को भी अभी तक रजिस्ट्रेशन नहीं दिया है। इस संघर्ष में हम तमाम लोग साथी दिलीप और साथी मोहित के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा हैं।

हम तमाम प्रगतिशील सामाजिक न्याय पसंद लोगो से अपील करते हैं कि साथी दिलीप और साथी मोहित के पक्ष में अपनी आवाज बुलंद कीजिये और जेएनयू के इस संघी वाइस चांसलर के खिलाफ मोर्चा खोलिये।

इसे भी पढ़ें-भगवाराज: उ.प्र. के बाद झारखंड में भी जेएनयू छात्रनेता बीरेन्द्र कुमार समेत छह पर फर्जी केस दर्ज

अरविंद यादव- 

सरकार के विरुद्ध आवाज उठाने वालों के लिए हमारे विश्वविद्यालय कब्रगाह की तरह हैं । ये साथी दिलीप हैं जो बराबर वंचितों की लड़ाई लड़ रहे हैं । JNU ने इन्हें और अन्य चार छात्रों को जिसमे जेएनयू अध्य़क्ष मोहित भी शामिल है, को प्रवेश देने से इनकार कर दिया है । इनकी गलती इतनी भर है कि ये छात्रों की समस्याओ को हमेशा उठाते रहे हैं।

इस तस्वीर को देखकर रोहित वेमुला की याद आनी लाजिमी है , याद न आये तो समझिए हम संवेदनहीन हो चुके हैं । विद्यार्थियों के शोषण के विरुद्ध हमें एकजुट होने ही जरूरत है । अगर आज नहीं लड़े तो कल कोई नही बचेगा हमारे लिए लड़ने वाला ।

अमित सिंह- 

साथियों जेएनयू के संघी वाइस चान्सलर साहब ने हॉस्टल से इसलिये निकाल दिया क्योंकि इन्होंने ब्राह्मणवादी सिस्टम के खिलाफ़ आवाज़ उठाई, दिलीप यादव ने नागपुर से आये संघी फ़रमान को चेलेंज किया और समाजिक न्याय की मांग की।

इनको इसलिये निकाल दिया गया क्योंकि इन्होंने जेएनयू में अलग-अलग विभागों में हुये भारी सीट कटौती के विरोध में नारे लगाये,फीस वृध्दि के विरोध में नारे लगाये, विश्वविद्यालय में समाजिक न्याय के लिये नारे लगाये।

दिलीप यादव के साथ-साथ मुलायम सिंह, प्रशांत कुमार, मोहित पाण्डेय तथा और भी विद्यार्थियों को होस्टेल से निकालने की कोशिश जारी है बल्कि इनके अकादमिक प्रक्रिया को भी रोका गया है ।

इसे भी पढ़ें-शिक्षा बजट में कटौती से लखनऊ वि.वि. में 8 गुना फीस वृद्धि छात्रा पूजा शुक्ला ने सीएम को दिखाया आईना

अब सवाल ये उठता है कि क्या लोकतंत्र में विरोध कि राजनीति को मोदी सरकार ख़त्म कर देना चाहती है ???
क्या गरीबों,मजदूरों,वंचितों को हाइयर एजुकेशन से रोकना चाहती है ??
क्या मोदी सरकार समाजिक न्याय की लड़ाई लड़ने वाले लोगों को कुचल देना चाहती है ??
या फ़िर लोकतंत्र में सवाल करने की प्रवृति को ख़त्म कर देना चाहती है ??

लोकतंत्र के इस मुश्किल दौर में लोकतंत्र के लिये लड़ने वाले लोग और समाजिक न्याय के लिये लड़ने वाले लोगों भाई दिलीप यादव, मुलायम सिंह, मोहित पाण्डेय और तमाम छात्रों की लड़ाई में हम सब आपके साथ है,निडर होके इस संघर्ष को जारी रखिए। इस संघर्ष में हम तमाम न्याय पसंद लोग आपके साथ है।

क्या था मामला- 

दरअसल 26 दिसंबर को जेएनयू में विद्वत परिषद की बैठक के दौरान 9 छात्रों ने हिस्सेदारी की मांग को लेकर प्रदर्शन किया था. छात्रों का आरोप था कि पीएचडी में जो वायवा होता है उसमें ओबीसी-एससी छात्रों के साथ भेदभाव होता है. इसलिए पीएचडी के लिए होने वाले वायवा के अंकों को कम करके उसे लिखित परीक्षा में जोड़ा जाए. इसके अलावा यूजीसी द्वारा पीएचडी के नियमों में बार-बार बदलाव करके ओबीसी-एससी के छात्रों की संख्या कम करने के लिए की जा रहीं साजिशों का विरोध भी किया था।

इसे भी पढ़ें-ओबीसी हितों के लिए प्रदर्शन करने वाले 9 योद्धाओ को जेएनयू से निकालने की तैयारी

Related posts

Share
Share