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शिवाजी और शाहूजी महाराज की मानस संतान दिव्यांशु पटेल बने IAS बोले जय भीम

नई दिल्ली। नीरज भाई पटेल

यूपीएससी 2016 का परिणाम घोषित हो गया है. इस परिणाम में एक चयन ऐसा भी हुआ है.जिसने साबित कर दिया है कि पूरी तरह से सामाजिक रहकर और अपने विचारों पर डटे रहने के बाद भी हर मुकाम पाया जा सकता है.

जी हां छत्रपति शिवाजी महाराज और शाहूजी महाराज की मानस संतान और बुद्ध और बाबा साहेब की वैचारिक परंपरा को आगे बढ़ाते हुए मूलत: अंबेडकनरगर निवासी दिव्यांशु पटेल आईएसएस हो गए हैं. उन्हें 204 वीं रैंक मिली है.

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जेएनयू से पीएचडी कर रहे हैं दिव्यांशु अच्छे ऑफीसर साबित होंगे- 

सामाजिक व्यवस्था अध्ययन केन्द्र जेएनयू से दिव्यांशु प्रोफेसर विवेक कुमार के मार्गदर्शन में पीएचडी कर रहे हैं. इससे पहले उनका चयन असिस्टेंट कमाडेंट के लिए भी हो चुका है. पीएचडी में दिव्यांशु के सीनियर रहे यूपी में पीसीएस अधिकारी राकेश पटेल कहते हैं कि दिव्यांशु शुरू से सामाजिक समस्याओं को लेकर जागरूक रहे हैं. दिल्ली में जो भी हिस्सेदारी को लेकर आंदोलन हुए दिव्यांशु उसमें बढ़ चढ़कर हिस्स लेते रहे है. निश्चित रूप से दिव्यांशु अपनी सामाजिक समझ और सक्रियता की वजह से एक अच्छे अधिकारी साबित होंगे. दिव्यांशु को समझ है कि गरीबी का दंश और हिस्सेदारी की जरूरत क्या होती है.

बुद्ध और शाहूजी महाराज की परंपरा को आगे बढ़ाया है- ( फोटो देखे)

पत्रकार सत्येन्द्र प्रसाद सिंह अपने फेसबुक वॉल पर जो लिखते हैं उससे समझा जा सकता है कि दिव्यांशु किस परंपरा के रहे हैं. वो लिखते हैं- लंबे समय बाद ख़ुशी का एक छोटा टुकड़ा हाथ लगा है. इसकी घोषणा मुझे ही करनी थी और इसी फोटो के साथ.आफिस से आया तो व्हाट्स ऐप पर मैसेज था. फ़ोटो उस वक्त की है जब वह एयर मार्शल (सेवानिवृत्त) ए एस भोसले के बोर्ड में साक्षात्कार देने जा रहे थे.

दिव्यांशु के पिता जी संस्कृत के प्रोफेसर हैं. उन्होंने ही दिव्यांशु की मुख्य परीक्षा की तैयारी कराई. पढ़ने लिखने और लक्ष्य के प्रति एकाग्र रहने का पाठ पढ़ाया, जिससे वह आज इस मुकाम पर हैं. पिताजी को नमन, प्रणाम, शुभकामनाएं. उनका छात्र वह हासिल कर सका, जो नौकरी की तलाश कर रहे हर भारतीय छात्र का सपना होता है.

उम्मीद है कि आईएएस प्रॉपर और यूपी कैडर मिल जाएगा। मुझे रैंक से थोड़ी निराशा थी, लेकिन जानकारी मिल रही है कि मेरे सपने के मुताबिक उन्हें पोस्टिंग मिल जाएगी. उम्मीद है कि दिव्यांशु बुद्ध और छत्रपति शाहूजी महाराज की परंपरा को आगे बढाएंगे, जो उनके आदर्श हैं.

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सामाजिक पिता के सामाजिक पुत्र हैं दिव्यांशु-

दिव्यांशु के पिता अवधेश प्रसाद वर्मा एमएलके डिग्री कॉलेज बलरामपुर में संस्कृत के प्रोफेसर है. माता जी का निधन हो चुका है. पूर्व पुलिस उपाधीक्षक और पटेल प्रतिनिध सभा के संयोजक ज्ञान सिंह पटेल जी कहते हैं कि दिव्यांशु को आज जो हासिल हुआ है उसमें इनके पिता का बहुत योगदान है. दिव्यांशु के पिता बेहद ही सामाजिक और त्यागी व्यक्ति हैं. समाज की हर जरूरत में साथ में खड़े रहते हैं. वर्तमान में इनके पिता पटेल प्रतिनिधि सभा बलरामपुर के उपाध्यक्ष भी हैं.

पिता की प्रेरणा से चल रही है सरदार पटेल ज्ञान स्थली-

ज्ञान सिंह कहते हैं. बलरामपुर में समाज के सहयोग के बनी सरदार पटेल ज्ञान स्थली इनके पिता के संरक्षण में ही बन पाई है. आज भी दिव्यांशु के पिता अवधेश वर्मा जी इस विद्यालय के पूरी तरह से समर्पित रहते हैं. इस विद्यालय में नि:शुल्क मेडीकल कैम्प से लेकर समाज के हित की सभी जरूर बैठकें भी आयोजित होती हैं. मकसद बस समाज को शिक्षित और सक्षम बनाना है. इनके पिता के इसी त्याग का परिणाम है जो दिव्यांशु पटेल आज आईएएस बन गए हैं.

इनके पिता ने ही दिव्यांशु को परीक्षा की तैयारी कराई. पढ़ने लिखने और लक्ष्य के प्रति एकाग्र रहने का पाठ पढ़ाया. जिससे वह आज इस मुकाम पर है.

 परीक्षा परिणाम आने के बाद फेसबुक पर लिखा- 

“मेहनत इतनी खामोशी से करो कि सफलता धूम मचा दे !
आईएएस 204 रैंक ,
बाकी सब बाद में ,
अभी के लिए जय भीम जय भारत 🙂 !”

 

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