You are here

निराशाजनक: भारत में मरीजों को देखने के लिए सिर्फ 2 मिनट खर्च करते हैं डॉक्टर, अमेरिका में 20 मिनट

नई दिल्ली, नेशनल जनमत ब्यूरो। 

किसी भी सरकार के लिए शिक्षा और स्वास्थ्य पहली प्राथमिकता होती है। ऐसे में भारत देश की लचर सरकारी स्वास्थ्य सेवाओँ पर उठते सवालों के बीच एक निराशाजनक सर्वे सामने आया है।

विश्व स्तर पर कराए गए एक अध्ययन में ये बात सामने आई है कि भारत में डॉक्टर औसतन सिर्फ दो मिनट ही अपने मरीजों को देखते हैं. अध्ययन में कहा गया है कि दुनिया के 15 देश जहां विश्व की आधी आबादी निवास करती है, वहां प्राथमिक चिकित्सा परामर्श पांच मिनट या इससे भी कम होता है.

भारत के पड़ोसी देश बांग्लादेश में यह समय 48 सेकेंड और पाकिस्तान में यह सिर्फ 1.3 मिनट है. इसके उलट स्वीडन में यह समय 22.5 मिनट है. स्वीडन, अमेरिका और नॉवे में मरीज़ों को देखने के लिए डॉक्टर औसतन 20 मिनट ख़र्च करते हैं.

ब्रिटेन की चिकित्सा पर आधारित पत्रिका ‘बीएमजे ओपन’ में कहा गया है कि भारत में प्राथमिक चिकित्सा परामर्श का समय 2015 में दो मिनट था, जबकि पड़ोसी देश पाकिस्तान में 2016 में यह महज़ 1.79 मिनट का रहा.

ब्रिटेन के तमाम अस्पतालों के शोधकर्ता इस अध्ययन में शामिल हुए थे. शोधकर्ताओं के अनुसार, मरीज़ों को इतना कम समय दिया जाना उनके स्वास्थ्य पर बुरा असर डालता है.

दुनिया भर में प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधा की मांग बढ़ने से परामर्श के समय पर दबाव बढ़ रहा है.

मरीज़ों और स्वास्थ्य सुविधा तंत्र पर संभावित असर का पता लगाने के लिए शोधकर्ताओं ने 178 संबंधित अध्ययनों से परामर्श समय की समीक्षा की जिसमें 67 देशों और 2.85 करोड़ से ज़्यादा परामर्श को समेटा गया है.

कम समय स्वास्थ्य सेवाओं के लिए घातक- 

अध्ययन में कहा गया है कि मरीज़ों को दिया गया कम समय स्वास्थ्य सेवाओं में बड़ी परेशानी खड़ी कर सकता है. भारतीय संदर्भ में विशेषज्ञों का कहना है कि यह अध्ययन बताता है कि स्वास्थ्य सेवा संस्थानों में ज़रूरत से ज़्यादा भीड़ है और प्राथमिक स्तर पर इलाज के लिए डॉक्टरों की भी कमी है.

उत्तर प्रदेश के पूर्व प्रमुख सचिव स्वास्थ्य अरुण कुमार सिन्हा इस बारे में कहते हैं कि ‘यह सर्वविदित है कि यूपी क्या जनसंख्या ज्यादा होने से भारत के अस्पतालों में भीड़ की वजह से मरीजों को परामर्श के लिए कम समय मिल पाता है. ओपीडी में भीड़ की वजह से सरकारी अस्पतालों में डॉक्टर एक समय में दो से तीन मरीज़ों को देखते हैं.’ ऐसे में एक मरीज को कम समय मिल पाता है.

गुजरात चुनाव में हार्दिक इफैक्ट : पटेलों के गढ़ सौराष्ट्र में BJP को 23 फीसदी वोटों का नुकसान

गुजरात में नाराज पाटीदारों ने किया BJP का बहिष्कार, गांवों में BJP नेताओं के घुसने पर प्रतिबंध

नोटबंदी के आलोचक रहे, RBI के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन को राज्यसभा भेजेगी केजरीवाल की ‘आप’ !

नोटबंदी के 1 साल: मोदी सरकार नोटबंदी के दौरान मारे गए लोगों की मौत का जश्न मना रही है- विपक्ष

विश्व रेडियोग्राफी डे विशेष- भारत में डार्क रूम एक्स-रे से आधुनिक सीटी स्कैन तक का सफर

 

Related posts

Share
Share