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बोधि वृक्ष रोपकर 27 सालों से बुद्ध की करुणा का प्रसार कर रहे हैं डॉ. धर्मेन्द्र पटेल, पर्यावरण प्रेम बन गई है पहचान

नई दिल्ली, नेशनल जनमत ब्यूरो। 

बढ़ते प्रदूषण के कारण मानव समय से पहले रोगी होता जा रहा है। प्रदूषित वातावरण में सांस लेने से लोगों के फेफड़े कमजोर हो रहे हैं जिससे श्वास संबंधी बीमारी बढ़ती जा रही है। इन बीमारियों का इलाज दवाओं से नहीं बल्कि अधिक से अधिक पीपल(बोधि वृक्ष), नीम और तुलसी के पौधे लगाने से ही संभव है।

बिहार निवासी डॉ. धर्मेद्र कुमार पटेल पिछले 27 साल से पर्यावरण जागरूकता के प्रति लोगों को ऐसी ही बातें बताकर जागरूक कर रहे हैं। डॉ. धमेंद्र कहते हैं कि प्रदूषण को समाप्त करने का एक सरल उपाय है पीपल का पेड़ लगाना।

इसके लिए डॉ. धर्मेंद्र पूरे देश में जेब में पीपल का बहुत खूबसूरत सा हरा पत्ता और बीज लेकर घूमते हैं। मौका मिलने पर लोगों को पीपल के वृक्ष की महत्ता की जानकारी देने के साथ ही उचित स्थान पर पीपल के बीज भी फेंकते हुए चलते हैं।

27 सालों से लोगों को कर रहे हैं जागरूक- 

डॉ. धर्मेद्र पेशे से होम्योपैथिक चिकित्सक हैं। लोगों का इलाज करने के साथ-साथ अधिक से अधिक पीपल, नीम और तुलसी का पौधा लगाने का संदेश देते हैं। डॉ. धर्मेंद्र बताते है कि हर बीमारी का इलाज दवा से ठीक नहीं होता, इसलिए 1991 से उन्होंने अपने इस पर्यावरण जागरूकता अभियान की शुरूआत की।

डॉ. पटेल कहते हैं कि चिकित्सा की पढ़ाई करने के दौरान उन्हे वनस्पतियों के बारे में भी बताया गया था। जिससे पीपल, नीम, तुलसी के गुण से रूबरू हुआ। अभियान की शुरुआत में काफी संघर्ष का सामना करना पड़ा।

डॉ. धर्मेद्र ने अपने गांव अरवल जिले के हामिंदपुर में खेत व सड़क किनारे पीपल के पौधे लगाए। गांव वालों को इसकी महत्ता से अवगत कराया जिसके बाद से इसने अभियान का रूप ले लिया।

सुनिए डॉ. धर्मेन्द्र पटेल की नेशनल जनमत के साथ बातचीत- 

इलाज कराने वालों को देते हैं पौधे- 

डॉ. धर्मेद्र कुमार हर शनिवार को मरीजों का नि:शुल्क इलाज करने के साथ ही पीपल, नीम और तुलसी पौधे की महत्ता से अवगत कराते हैं। साथ ही अगर कोई पौधे रोपने की जिज्ञासा दिखाता है तो बिना कुछ सोचे समझे वो उसे पौधे लगाने के लिए देते हैं।

पर्यावरण संरक्षण के लिए वह नीम, तुलसी और पीपल के पौधे को बिहार ही नहीं पूरे देश में लगाते हैं। डॉ. पटेल बिहार, गुजरात, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, राजस्थान, उत्तर प्रदेश जैसे तकरीबन 10 प्रदेशों में इस अभियान की अलख जगा चुके हैं।

बोधि वृक्ष के प्रति लोगों के अंधविश्वास को करना है दूर-

डॉ. धर्मेंद्र ने नेशनल जनमत से बातचीत में कहा कि लोगों के मन में पेड़-पौधे को लेकर कई भ्रांति है जिसे दूर करने की जरूरत है। लोग पीपल की पूजा करते हैं लेकिन अपने घरों में लगाना नहीं चाहते। पीपल के पेड़ पर भूत-पिशाच का अंधविश्वास लोगों के दिमाग में घर कर गया हैै।

जबकि महात्मा बुद्ध को इसी पीपल वृक्ष के नीचे ज्ञान की प्राप्ति हुई थी, बौद्ध देशों में पीपल घर-घर पूजा जाता है। डॉ. धर्मेद्र ने कहा कि जब पुस्तक के माध्यम से लोगों की इसकी महत्ता के बारे में पता चलेगा तो पौधे के प्रति लोगों की सोच बदलेगी।

बुद्ध के पंचशील सिद्धांत भी प्रसारित करते हैं- 

डॉ. धर्मेद्र अपनी जेब में हमेशा पीपल के पत्ते लेकर घूमते हैं। लोगों की भीड़ देखते ही पीपल की महत्ता से बताने में जुट जाते हैं। यह सिलसिला बीते 27 सालों से अनवरत चल रहा है। डॉ. पटेल यात्रा के दौरान पौधे के बीज रास्ते में फेंकते जाते हैं, जिससे कुछ समय बाद पीपल के पौधे तैयार हो जाते हैं।

इसके साथ ही इन बोधि वृक्ष के माध्यम से गौतम बुद्ध के पंचशील सिद्धांत 1- झूठ न बोलना, 2. चोरी न करना, 3. व्यभिचार न करना, 4. नशा न करना, 5. हिंसा न करना को प्रचारित करते रहते हैं।

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