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मोदीराज: OBC-SC-ST के साथ इंजीनियरिंग में भी साजिश, ओपन सीट में किया सिर्फ सवर्णो का चयन

नई दिल्ली। नेशनल जनमत ब्यूरो।

मोदी सरकार में ओबीसी, एससी,एसटी के साथ अन्याय और पक्षपातपूर्ण व्यवहार का सिलसिला बढ़ता ही जा रहा है. धीरे-धीरे आरक्षण खत्म हो रहा है और लोगो को भनक तक नहीं लग पा रही. मेडीकल परीक्षाओं में आरक्षित वर्ग के साथ होने वाले अन्याय की भनक तो लोगों को केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के सचिव के माध्यम से लग गई लेकिन इंजीनियरिंग में आईआईटी जैसे संस्थानों के लिए होने वाली परीक्षाओं में बिना बताए ही खामोशी से आरक्षित वर्ग को इंजीनियर बनने से रोकने की साजिश रच दी गई.

इंजीनियरिंग कॉलेज के सीट आवंटन में खेल- 

ये साजिश इंजीनियरिंग कॉलेज की सीट आवंटन मे साफ तौर पर दिखाई पड़ रहा है. इस बार ये खेल मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा बनाई गई ज्वाइंट सीट एलोकेशन अथॉरिटी यानि JOSAA द्वारा किया गया है. जेओएसएए के माध्यम से 97 इंजीनियंरिंग कॉलेजों के सीट आंवटन की सूची जारी की गई है. आप खुद देखिए उस सूची में ओबीसी-एससी-एसटी के मेधावी छात्रों को भी सिर्फ आरक्षित कैटेगरी तक सीमित कर दिया गया है और 15 प्रतिशत सवर्णों के लिए 50.5 फीसदी सीटें आऱक्षित कर दी गई हैं.

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आईआईटी समेत 97 इंजीनियरिंग कॉलेजों में हुआ खेल- 

JOSAA के द्वारा  97 इंजीनियरिंग कॉलेजों में सीटों का आवंटन किया गया है. उनमें  23 IIT , 31 NIT,  23 IIIT  औऱ अन्य 20 सरकारी सहायता प्राप्त कॉलेज शामिल हैं. इन कॉलेजों में अबकी बार पिछड़ों, दलितों और आदिवासी वर्ग के बच्चों के साथ भेदभाव करके सामान्य सीट पर चयन नहीं दिया जा रहा है. इसका एक अर्थ ये भी है कि मोदी सरकार ने सामान्य वर्ग के अभ्यार्थिोयों को 50.5 फीसदी रिजर्वेशन दे दिया है.

टोटल 26208 सीट में से  पचास प्रतिशत पर सवर्णों का चयन-

जेईई मेन्स और जेईई एडवांस मिलाकर टोटल 26208 सीटों में से 17856 सीट है ओपन कैटेगरी के लिए थीं यानि जिनमें किसी भी वर्ग का मेधावी छात्र ज्यादा नंबर लाकर क्वालिफाई कर सकता  था. लेकिन ये सारी सीटें सवर्णों को देकर उनको अघोषित आरक्षण दे दिया गया.

बची सीटों पर- 

सिर्फ एससी … 5207

एसटी … 3047

ओबीसी….9011 का ही चयन किया गया.

इस लिंक पर जाकर देख सकतें हैं- http://josaa.nic.in/webinfocms/public/view.aspx?page=46

विकलांग सीटों पर भी खेल- 

ओपन कैटेगरी में यानि सामान्य में विकलांग कोटे ले 542 सीटें थीं. इन सभी सीटों को भी सवर्णोों के खाते में डाल दिया. इन सभी सीटों पर एक भी ओबीसी-एससी-एसटी वर्ग के बच्चे का चयन नहीं किया गया.

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पूरे विश्व में सामाजिक रूप से कमजोर और सुविधाओं से वंचित लोगों के साथ रंग, जाति, धर्म, बोली  के आधार पर हुए भेदभाव को देखते हुए समाज में हिस्सेदारी देने का चलन है. जिसे भारत में आरक्षण कहा जाता है,  लेकिन मानव सभ्यता का हिस्सेदारी नियम भारत के जातिवादियो के लिए आंख की किरकिरी बना हुआ है.

एससी या एसटी समुदाय के अभ्यर्थी को जनरल सीट पर क्वालीफाई नहीं कराया जाएगा. इसका मतलब ये है कि इस बार ओबीसी को सिर्फ 27 फीसदी सीटें और एससी को 16 फीसदी सीटें औऱ एसटी को 7.5 फीसदी सीटें ही मिलेंगी. इसके अलावा आरक्षित कोटे का कोई भी विद्यार्थी कितने भी नम्बर लाए उसको जनरल सीट पर मेडिकल में एडमीशन नहीं दिया जाएगा. मतलब इस बार दलितों,पिछड़ों,आदिवासियों को कुल मिलाकर मिलने वाले 49.5 फीसदी आरक्षण के अलावा शेष 50.5 फीसदी आरक्षण 15 फीसदी सवर्णों को ही मिलेगा.

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इंजीनियरिंग से पहले मोदी सरकार मेडिकल में दे चुकी है सवर्णों को 50.5 फीसदी आरक्षण

जिन लोगों के पूर्वजों ने सदियों तक मानव सभ्यता की सबसे क्रूरतम जातीय व्यवस्था बनाकर लोगों का शोषण किया यहां की पिछड़ों की हितैषी होने का दंंभ भरने वाली सरकार उन्हीं लोगों को उनकी आबादी से लगभग 4 गुना आरक्षण देने की शुरूआत कर चुकी है. केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने मेडीकल परीक्षा के नये सत्र से सवर्णों को 50.5 फीसदी आरक्षण देने की तैयारी कर ली है.

470 मेडिकल कॉलेजों की 9775 सीटों पर लागू होना है ये नियम- 

केन्द्रीय स्वास्थ्य सचिव सी.के. मिश्रा ने बताया कि इस बार एमबीबीएस में मेडिकल कॉलेजों के सीटों पर आरक्षित श्रेणी के अभ्यार्थियों की काउंसिलिंग अलग औऱ अनारक्षित श्रेणी के अभ्यार्थियों की काउंसिलिंग अलग होगी. यहां तक कि सवर्ण अभ्यार्थियों से ज्यादा नम्बर लाने वाले आरक्षित समूह के किसी भी अभ्यार्थी को जनरल सीट पर एडमीशन नहीं दिया जाएगा. 470 मेडिकल कॉलेजों की 15 फीसदी ऑल इंडिया सीटों यानि 9775 सीटों पर ये नियम इसी सत्र से प्रभाव में लाया जा रहा है.

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