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PM के मित्र अडानी के घोटाले की खबर लिखने वाले संपादक को देना पड़ा इस्तीफा, हटाई गई खबर

नई दिल्ली। नेशनल जनमत ब्यूरो 

पूरे देश की पत्रकारिता में अकेली जगह, जहां अडानी और मोदी सरकार के 500 करोड़ रुपए के करप्शन पर ख़बर लिखी गई, वहां के संपादक की आज विदाई हो गई। इतना ही नहीं वेबसाइट से ख़बर भी डिलीट कर दी गई है।

वैसे EPW भारत में समाज विज्ञान की सबसे लोकप्रिय पत्रिका है, और अमूमन हर यूनिवर्सिटी लाइब्रेरी में होती है, इसलिए अडानी वाली रिपोर्ट तो मैं आपको उपलब्ध करवा दूंगा। ये कहना है वरिष्ठ पत्रकार दिलीप मंडल का।

इसे भी पढ़ें-योगी ने माना उनके रामराज्य में हर दिन 14 रेप, 13 हत्याएं, 49 अपहरण हुए हैं, विपक्ष ने मांगा इस्तीफा

दरअसल अंग्रेज़ी की चर्चित पत्रिका इकनॉमिक एंड पॉलिटिकल वीकली (ईपीडब्‍लू) के संपादक परंजॉय गुहा ठाकुरता ने अपने पद से मंगलवार को इस्‍तीफा दे दिया है। कुछ दिनों पहले उन्‍होंने सरकार द्वारा अडानी पावर को 500 करोड़ रुपये का लाभ पहुंचाए जाने के घोटाले पर एक स्‍टोरी की थी जिसके बाद अंडानी की कंपनी की ओर से उनके ऊपर मानहानि का मुकदमा भी दायर हुआ था।

वेबसाइट से खबर गायब- 

यह स्‍टोरी अब ईपीडब्‍लू की वेबसाइट से गायब हो चुकी है। पत्रिका ने इस स्‍टोरी को पुराने लिंक से हटा दिया है। कहा जा रहा है कि यही स्‍टोरी  परंजॉय गुहा ठाकुरता के इस्‍तीफ़े का कारण बनी है क्‍योंकि इसे लेकर पत्रिका के बोर्ड से उनके मतभेद हो गए थे। परंजॉय अप्रैल 2016 से EPW के संपादक थे।

नेशनल जनमत ने लगाई थी ये खबर- 

नेशनल जनमत ने भी EPW की इस रिपोर्ट को प्रमुखता से छापा था। देखिए नीचे दी गई लिंक-

देखिए लिंक- मित्र अडानी को 500 करोड़ का फायदा पहुंचाने के लिए मोदी सरकार ने सेज के नियम ही बदल डाले

कैसे पहुंचाया था फायदा ?

खबर के अनुसार, अगस्त, 2016 में वाणिज्य विभाग ने विशेष आर्थिक क्षेत्र के नियम (सेज नियम), 2016 में संशोधन करते हुए उसमें एक नया प्रावधान जोड़ा था, जो सेज एक्ट, 2005 के तहत रिफंड के दावों से संबंधित था. सेज एक्ट के तहत किये गये इस संशोधन से पहले किसी तरह के रिफंड का कोई प्रावधान नहीं था. खबर के मुताबिक, यह संशोधन खासतौर पर अडानी पावर लिमिटेड (एपीएल) को लगभग 500 करोड़ रुपये के करीब की उत्पाद शुल्क के रिफंड का दावा करने का मौका देने के लिए किया गया था.

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