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EVM बैन की मांग के बीच, चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में कहा 2019 के चुनाव में VVPAT का होगा इस्तेमाल

नई दिल्‍ली। नेशनल जनमत ब्यूरो 

उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनावों में अविश्वनीय सीटें पाने के बाद बीजेपी के खिलाफ ईवीएम मशीनों में गड़बड़ी को लेकर विपक्षी दलों ने मोर्चा खोल दिया था। लेकिन उस समय लोगो ने भी सोचा कि हारने की वजह से विपक्षी दल बेवजह ये आरोप लगा रहे हैं

धीरे-धीरे यूपी क्या महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान, हरियाणा से ईवीएम गड़बड़ी की खबरें आने लगीं। हैरत की बात तो देखिए जहां भी ईवीएम गड़बड़ी की शिकायत मिली वहां वोट दूसरा बटन दबने पर वोट बीजेपी के खाते में ही जा रहा था।

इसके बाद विपक्षी दलों के अलावा ये मांग सामाजिक कार्यकर्ता और लोकतंत्र बचाने के लिए लड़ रहे तमाम सारे संगठन भी उठाने लगे। मांगो के पीछे एक तर्क था जो वाजिब प्रतीत हो रहा है कि यूपी में जहां-जहां ईवीएम में पर्ची निकलने वाला सिस्टम था यानि VVPAT थी वहां ज्यादातर जगह बीजेपी हार गई यहां तक कि प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत बाजपेयी इस लहर में भी मेरठ सदर सीट से हार गए।

लगातार हो रहे विरोध के बीच चुनाव आयोग मशीनों को फुल प्रूफ बताता रहा। अब चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि 2019 के लोकसभा चुनाव में पेपर ट्रेल के साथ 16 लाख से ज्यादा ईवीएम मशीनों का इस्तेमाल होगा।

साथ ही चुनाव आयोग ने भरोसा दिलाया है कि तकनीकी रूप से सक्षम इन ईवीएम मशीनों से आम चुनाव प्रक्रिया और भी पारदर्शी होगी। हालांकि चुनाव आयोग ने इस मुद्दे पर कुछ नहीं कहा है कि दिसंबर में होने वाले गुजरात चुनाव में ईवीएम के साथ वीवीपैट का इस्तेमाल होगा या नहीं।

बीएसपी, एसपी ने डाली है याचिका- 

दरअसल सुप्रीम कोर्ट ईवीएम में गड़बड़ी के आरोपों पर दायर बीएसपी, समाजवादी पार्टी के विधायक और अन्य याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से पूछा था कि ईवीएम मशीनों के साथ VVPAT यानी पेपर ट्रेल जोड़े जाने की वास्तविक स्थिति क्या है?

क्या चुनाव आयोग गुजरात चुनाव VVPAT से करा सकता है? सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को चार हफ्ते का वक्त दिया है और इस याचिका को भी दूसरी याचिकाओं के साथ जोड़ दिया है।

गुजरात चुनाव के बारे में स्थिति स्पष्ट नहीं- 

सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग ने कोर्ट को बताया कि अप्रैल महीने में ही केंद्र सरकार ने VVPAT के लिए 3137 करोड़ का फंड जारी किया है। इसके लिए चुनाव आयोग व्यवस्था कर रहा है लेकिन फिलहाल कुछ भी कहना मुश्किल है। दरअसल सुप्रीम कोर्ट में दाखिल एक जनहित याचिका में ये भी मांग की गई है कि गुजरात के चुनाव VVPAT से होने चाहिए ताकि ईवीएम गड़बड़ी ना हो।

हलफनामे में चुनाव आयोग ने बताया है कि खराब मशीनों का चुनाव में इस्तेमाल नहीं किया जाता। चुनाव आयोग ने कोर्ट को बताया है कि भारत की ईवीएम मशीनों की तुलना विदेशों से नहीं की जा सकती क्योंकि विदेशों में इंटरनेट से जुडे कंप्यूटर का इस्तेमाल किया जाता है जिसे हैकिंग का खतरा बना रहता है। भारत में ईवीएम अपनी तरह की हैं।

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