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‘सरकार’ जनता विरोधी हो गई है, क्योंकि उसको आपके वोट की जरूरत ही नहीं है, पढ़िए कैसे?

नई दिल्ली। नेशनल जनमत ब्यूरो 

आम चुनाव में ईवीएम इस्तेमाल करने की मांग लगातार सर उठा रही है। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अविश्वसनीय  सफलता मिलने के बाद बसपा, सपा ने ईवीएम पर गडबड़ी का आरोप लगाते हुए ईवीएम को भारत में बैन करने की मांग की थी।

इतना ही नही भारत मुक्ति मोर्चा आज भी इस मांग के लिए पूरे देश में प्रदर्शन कर रहा है। एत  तरफ तो चुनाव आयोग लगातार ईवीएम से छेड़छाड़ और उसमे गड़बड़ी की संभावना को नकारता रहा है पर दूसर तरफ महाराष्ट्र, राजस्थान, यूपी समेत कई जगहों पर ईवीएम गड़बड़ी से बीजेपी को वोट जाने के मामले सामने आए हैं।

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अब ये मांग विपक्षी दलों के अलावा सोशल मीडिया और सड़कों पर सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ता भी पुरजोर तरीके से कर रहे हैं कि ईवीएम की जगह मतपत्र से वोट पड़ने चाहिए।

वरिष्ठ पत्रकार अरविंद शेष कहते हैं कि सरकार जनता विरोधी इसलिए हो गई है कि उसे अब आपके वोट की फिक्र ही नहीं रह गई। सरकार जिसकी है ईवीएम उसकी है और ईवीएम जिसकी है अगली सरकार भी उसकी है।

जिस देश में सरकार या आरएसएस-भाजपा को जनता के वोट की फिक्र खत्म हो गई है, वह जनता या देश की फिक्र क्यों करेगी…!
क्या आपको पता है कि मोदी सरकार समूचे देश और यहां के लोगों के साथ खिलवाड़ क्यों कर रही है..?

अगर उसे जनता के वोट की फिक्र होती तो वह इतनी आसानी से नोटबंदी से लेकर नौकरियां खत्म करने या देश भर में आतंक और नफरत का माहौल बना कर अंबानी-अदानी टाइप चंद धन-शैतानों के हाथ में देश का समूचा आर्थिक तंत्र सौंपने का खेल नहीं करती..! उन्हें अरबों-खरबों का मुफ्त तोहफा परोसा जा रहा है…

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तमाम सरकारी जिम्मेदारियां और नौकरियां प्राइवेट हाथों में पूरी हड़बड़ी में झोंकी जा रही हैं.. लेकिन उसे कोई फिक्र नहीं कि अगर इससे भारी पैमाने पर जनता हाशिये पर फेंकी जा रही है, तो जनता खफा भी हो सकती है!
दरअसल, उसे पता है कि अगली बार भी वोट कहां से लेना है..!

अमेरिका वोटिंग मशीन हैक हो चुकी है- 

विश्व के सबसे बड़े हैकर्स ग्रुप में से एक डीईएफसीओएन (DEFCON) ने अमेरिकी वोटिंग मशीन को हैक करने का दावा किया है। ग्रुप का दावा है कि वे एक घंटे में वोटिंग मशीन को हैक कर सकते हैं। उन्होंने 2015 से पहले के चुनावों में इस्तेमाल की गईं वोटिंग मशीन को हैक करने की इच्छा जताई।

जिसके बाद डीईएफसीओएन के दावे को जानने के लिए ग्रुप को वोटिंग मशीनें मुहैया कराई गईं। हैकर्स ने महज तीस मिनट में वोटिंग मशीन को हैक कर दिया।

ईवीएम मशीन मताधिकार पर डाका है- 

अब सरकारें लाख कह लें, सत्ता में हैं तो मनमानी कर लें, लेकिन ईवीएम वोटिंग जनता के मताधिकार पर डाका है, तो है..! यह किसी तरह छन कर आने वाली हर घटना से साबित हो रहा है। वह असम हो, धौलपुर हो, या अब महाराष्ट्र से आई खबरें..!

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वोटिंग के लिए अब किसी भी तरह के बूथ लूट या जनता को बरगलाने की भी जरूरत नहीं रही…! ईवीएम पर जिसका कब्जा, उसकी सरकार..! अब यह सरकार इस हालत में लाकर छोड़ेगी कि चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था को भी मजाक बना देगी..!

जिस देश में किसी सरकार या पार्टी को जनता के वोट की फिक्र खत्म हो गई है, वह जनता या देश की फिक्र क्यों करेगी…! इतने बर्बर और बेरहम कदम इसीलिए लगातार उठाए जा रहे हैं..!

अगर सभी गैर-भाजपाई, गैर-कांग्रेसी पार्टियों के नेताओं को यह ईवीएम मुद्दा बेमानी लग रहा है, चुनाव पेपर बैलेट से कराने की मांग जरूरी नहीं लग रही है तो वे सब खत्म होने के लिए तैयार रहें..!

दुनिया के कई देशों ने ईवीएम बैन कर रखा है- 

दुनिया के कई देशों ने ईवीएम यानी इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों को संदिग्ध मानते हुए बैन लगा रखा है. इसमें जर्मनी, नीदरलैंड और अमेरिका जैसे विकसित देश भी शामिल हैं. वहीं इंग्लैंड और फ्रांस में कभी भी ईवीएम का इस्तेमाल नहीं हुआ है.

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कई देशों ने बाद में लगाया बैन- 

इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों का इस्तेमाल कई देशों ने शुरू किया था. लेकिन सिक्योरिटी और एक्यूरेसी को लेकर इन मशीनों पर सवाल उठने लगे. साल 2006, में ईवीएम का इस्तेमाल करने वाले सबसे पुराने देशों में शामिल नीदरलैंड ने इस पर बैन लगा दिया. साल 2009 में जर्मनी की सुप्रीम कोर्ट ने ईवीएम को असंवैधानिक बताते हुए और पारदर्शिता को संवैधानिक अधिकार बताते हुए ईवीएम पर बैन लगा दिया.

यही नहीं, नतीजों को बदले जाने की आशंका को लेकर नीदरलैंड और इटली ने भी ईवीएम पर बैन लगा दिया था. अमेरिका जैसे टेक फ्रेंडली देश के कई राज्यों में भी बिना पेपर ट्रोल वाली ईवीएम मशीन पर बैन

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