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RTI में हुआ EVM गड़बड़ी का बड़ा खुलासा, निर्दलीय का वोट हो रहा था BJP को ट्रांसफर

नई दिल्ली। नेशनल जनमत ब्यूरो 

राष्ट्रपति चुनाव में वैलेट पेपर इस्तेमाल के बाद एक बार फिर आम चुनावों में भी ईवीएम इस्तेमाल करने की मांग सर उठाने लगी है। यूपी विधानसभा चुनाव के बाद बसपा, सपा ने ईवीएम पर गडबड़ी का आरोप लगाते हुए ईवीएम को भारत में बैन करने की मांग की थी।

इतना ही नही भारत मुक्ति मोर्चा आज भी इस मांग के लिए पूरे देश में प्रदर्शन कर रहा है। लेकिन चुनाव आयोग लगातार ईवीएम से छेड़छाड़ और उसमे गड़बड़ी की संभावना को नकारता रहा है पर महाराष्ट्र में हुए एक ज़िला परिषद चुनाव में ईवीएम में गड़बड़ी का मामला सामने आया है.

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महाराष्ट्र के जिला परिषद चुनाव का मामला- 

आईएएनएस की रिपोर्ट के अनुसार फरवरी में महाराष्ट्र के बुलढ़ाणा में ज़िला परिषद चुनाव में लोनार के सुल्तानपुर गांव के एक पोलिंग स्टेशन पर ईवीएम में गड़बड़ी सामने आई है.

आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली ने आईएएनएस को बताया, ‘हर बार जब मतदाता ‘नारियल’ चुनाव चिह्न के सामने का बटन दबा रहे थे, तब कमल के फूल के निशान (भाजपा) के सामने की लाइट जल रही थी. इस बात को निर्वाचन अधिकारी ने ज़िला कलेक्टर को बताया. यह बात आरटीआई के जवाब में उनके द्वारा दी गई जांच रिपोर्ट में बताई गई है.’

गलगली के अनुसार उन्होंने एक निर्दलीय मतदाता आशा अरुण जोरे की ईवीएम गड़बड़ी की शिकायत के बाद 16 फरवरी को हुए इस चुनाव के बारे में निर्वाचन अधिकारी की जांच रिपोर्ट जानने के लिए जून महीने में एक आरटीआई दाखिल की थी.

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दबा रहे थे नारियल का बटन वोट कमल को मिल रहा था- 

गलगली ने बताया कि इस आरटीआई के जवाब में बताया गया है, ‘बुलढ़ाणा इलेक्शन डिपार्टमेंट की ओर से जवाब दिया गया कि लोनार शहर के सुल्तानपुर में 56 नंबर पोलिंग स्टेशन में जब मतदाता प्रत्याशी नंबर 1 के सामने नारियल चिह्न का बटन दबा रहे थे तब प्रत्याशी संख्या 4 के कमल के फूल के निशान वाले बटन की लाइट जल रही थी, जिसका अर्थ था कि वोट 1 नंबर वाले की बजाय 4 नंबर वाले प्रत्याशी को गया है.’

हालांकि इस मसले को उस दिन सुबह दस बजे ही रिपोर्ट किया गया पर इस पर चुनाव अधिकारी द्वारा संज्ञान दोपहर में लिया गया. पर तब तक काफी संख्या में वोटिंग हो चुकी थी.

जानकारी लोनार क्षेत्र के निर्वाचन अधिकारी तक पहुंचने के बाद उन्होंने ख़ुद जाकर इस मशीन की जांच की और पाया कि पहला बटन दबाने पर चौथे बटन के सामने की लाइट जल रही है.

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बंद किया गया था पोलिंग स्टेशन- 

ज़िला कलेक्टर के पास कई और शिकायतें पहुंचने के बाद पोलिंग स्टेशन को बंद कर दिया गया और ख़राब ईवीएम मशीन की जगह दूसरी ईवीएम मशीन लगाई गई. आरटीआई में यह भी बताया गया है कि विभिन्न दलों की दोबारा चुनाव करवाने की मांग के चलते यह चुनाव रद्द कर दिया गया और 5 दिन बाद दोबारा चुनाव हुआ.

गलगली कहते हैं, ‘यह मामला साफ दिखाता है कि ईवीएम फ्रॉड हुआ है. यह बात पहले मतदाताओं ने बताई, बाद में जिसकी पुष्टि निर्वाचन अधिकारी सहित कई अन्य अधिकारियों ने भी की और जांच रिपोर्ट कलेक्टर को भेजी.’

गौरतलब है कि चुनाव आयोग लगातार ईवीएम मशीन में किसी भी तरह से छेड़छाड़ की संभावना से इनकार करता रहा है. यहां तक कि आयोग द्वारा विभिन्न राजनीतिक दलों को ईवीएम हैक करके दिखाने की चुनौती भी दी जा चुकी है.

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कई देशों ने बाद में लगाया बैन- 

इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों का इस्तेमाल कई देशों ने शुरू किया था. लेकिन सिक्योरिटी और एक्यूरेसी को लेकर इन मशीनों पर सवाल उठने लगे. साल 2006, में ईवीएम का इस्तेमाल करने वाले सबसे पुराने देशों में शामिल नीदरलैंड ने इस पर बैन लगा दिया. साल 2009 में जर्मनी की सुप्रीम कोर्ट ने ईवीएम को असंवैधानिक बताते हुए और पारदर्शिता को संवैधानिक अधिकार बताते हुए ईवीएम पर बैन लगा दिया.

यही नहीं, नतीजों को बदले जाने की आशंका को लेकर नीदरलैंड और इटली ने भी ईवीएम पर बैन लगा दिया था. अमेरिका जैसे टेक फ्रेंडली देश के कई राज्यों में भी बिना पेपर ट्रोल वाली ईवीएम मशीन पर बैन है.

 

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