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तो क्या चुनाव आयोग समेत अन्य संवैधानिक संस्थाओं को नष्ट करने पर तुली है मोदी सरकार ?

नई दिल्ली, नेशनल जनमत ब्यूरो। 

देश के इतिहास में शायद ऐसा पहली बार हुआ है, जब किसी राज्य के मतदान की तारीख से पहले उसके परिणाम की तारीख तय कर दी गई। एक ही दिन हिमांचल प्रदेश और गुजरात के चुनाव परिणाम आने की तारीख घोषित की गई लेकिन गुजरात के मतदान की तिथि नहीं बताई गई।

विपक्ष ने इस मामले में चुनाव आयोग को कटघरे में खड़ा तो किया साथ ही सोशल मीडिया पर भी बीजेपी की मंशा पर सवाल उठे। अब जब प्रधानमंत्री के गुजरात दौरे पूरे होने के बाद चुनाव आयोग ने गुजरात चुनाव की तारीख घोषित कर दी है। ये मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है।

इस मामले को लेकर युवा चिंतक अनूप पटेल आशंका जता रहे हैं कि कैसे मोदी सरकार संवैधानिक संस्थाओं को नष्ट करने पर तुली हैं। अनूप पटेल लिखते हैं कि –

प्रधान सेवक सभी संवैधानिक संस्थाओं को इतना बदनाम करवा देंगे कि लोग संविधान और सरकारी संस्थानों से नफरत करने लगेंगे। ताजा मामला भारतीय चुनाव आयोग का है। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से ही चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे थे।

चुनाव के दरम्यान कई जगह EVM मशीनों को टेम्परिंग किया गया जिससे मतदाता किसी भी प्रत्याशी को वोट डाले वो आखिर में भाजपा के खाते में ही गिना गया। विपक्षी पार्टियों ने EVM टेम्परिंग पर लगातार सवाल किये जिससे चुनाव आयोग VVPAT को EVM मशीन के साथ लगाने को राजी हुआ।

इसके बाद गुजरात और हिमाचल प्रदेश के विधानसभा चुनावों की अलग-अलग तिथियां निर्धारित करने पर सवाल उठे। चूंकि प्रधानसेवक की रैलियों और रोड शो को देखने से इतना तो समझ में आया कि गृहराज्य गुजरात में जनता भाजपा के खिलाफ हो गयी है। इसलिए पीएम खुद गुजरात में लोक-लुभावन घोषणाएं करके वोटर्स को ‘मैनेज’ करने के लिए पहुंचे थे।

चुुनाव आयोग के माध्यम से गुजरात चुनाव टालकर आचार संहिता घोषित ना करवाके प्रधानसेवक अपने गृहराज्य की सरकार बचाने पहुंचे। गुजरात पहुंचकर पीएम ने अरबों रुपये की चुनावी घोषणाएं की। भाजपा जब इतने दिनों से सत्ता में थी तो तथाकथित गुजरात मॉडल का ढोल पूरे भारत में पीटा गया। सीधी सी बात है कि गुजरात में कोई नया विकास मोदी के मुख्यमंत्री रहते हुआ ही नहीं।

मुख्य चुनाव आयुक्त पर उठे सवाल- 

इन सबकी वजह है मुख्य चुनाव आयुक्त अचल कुमार ज्योति की भाजपा से नजदीकी। ज्योति चुनाव आयोग में आने से पहले गुजरात काडर के अफसर रहे हैं। उन्हें 2015 में चुनाव आयोग का सदस्य बनाया गया।

चुनाव आयोग के सदस्य रहते हुये वे गुजरात सरकार द्वारा आवंटित अहमदाबाद स्थित आवास में रह रहे थे। जबकि चुनाव आयोग के सदस्य को ये सब नही करना चाहिये। एक वेबसाइट ने ज्योति को इस संबंध में सवालों का जखीरा भेजा तो ज्योति ने चुनाव आयोग का सदस्य रहते हुये गुजरात सरकार से प्राप्त सुविधाएं मिलने की पुष्टि की है।

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