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पूर्व DGP का सनसनीखेज खुलासा, चारा घोटाले में लालू यादव को साजिशन फंसाया गया !

नई दिल्ली। नेशनल जनमत ब्यूरो।

आरजेडी अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव की सामाजिक न्याय की मुहिम से आहत लोग उनके खिलाफ चारा घोटाले को लेकर पलटवार करते हैं। जन सामान्य में भी ये बात पुख्ता तौर पर फैली है कि लालू यादव ही चारा घोटाले के मुख्य अभियुक्त हैं।

उनको ‘चारा चोर’ जैसे नामों से संबोधित करके तमाम तरीके से अपमानित करने के कुत्सित प्रयास भी होते रहे हैं। इन सब बातों को धता बताते हुए चारा घोटाले के मुख्य जांच अधिकारी ने अपनी किताब में इस पूरी थ्योरी को ही पलट दिया है।

गुजरात के सामाजिक कार्यकर्ता ‘जयंती भाई मनाणी’ द्वारा इस मामले को सामने लाने के बाद यादव शक्ति’ के प्रधान संपादक चंद्रभूषण सिंह यादव लिखते हैं कि-

लालू जी को चाराचोर बनाने का सच-

एक आईपीएस एपी दुराई (जांच अधिकारी-पशुपालन घोटाला) ने माना कि लालू जी को षड़यंत्र के तहत फंसाया गया…..

कर्नाटक के पूर्व डीजीपी एवं चारा घोटाले के मुख्य जांच अधिकारी एपी दुराई (IPS) ने अपनी आत्मकथा- “परसूट आफ ला एंड ऑर्डर”(Pursuit of law and order) में अध्याय 26  The CBI Vs Lalu Prasad Yadav में पृष्ठ 230,231,232 में लिखा है कि सीबीआई ने अपने द्वारा दायर 49 मुकदमो में से 7 में लालू प्रसाद यादव जी को मुजरिम बनाया है।

पूर्व डीजीपी ने अपनी किताब में लिखा कि लालू प्रसाद यादव एवं कुछ आईएएस को फंसाने का गम्भीर षड़यंत्र किया गया है। देश की न्यायिक व्यवस्था में ऐसा होना ठीक नही है। मीडिया ने भी लालू प्रसाद यादव को बिना मुजरिम सिद्ध हुए खुद ही ट्रायल कर उन्हें अपराधी घोषित कर दिया।

IPS अधिकारी एपी दुराई की यह स्वीकारोक्ति इस देश के बहुजन, शोषित, दमित समाज को हजार वर्षों से अपराधी, नकारा, असुर, राक्षस आदि घोषित करने की निकृष्ट परम्परा को उद्घाटित करता है। एपी दुराई साहब ने जो कुछ भी आत्मकथा में लिखा है, वह वंचित समाज की ऐसी व्यथा कथा है जो शायद ही सुनने को मिले।

यह देश और इस देश का तथाकथित बुद्धिजीवी जो हमेशा ही कमेरों/अर्जकों/उत्पादकों की कमाई का परजीवी रहा है। श्रम करने वालों को हिकारत की नजर से देखता रहा है। गाहे-बगाहे जब भी मौका मिला है उन्हें अपमानित व लांछित करने का कुकर्म किया है। जिसका एक घृणित उदाहरण लालू प्रसाद यादव जैसे नेता को चारा चोर सिद्ध कर डालने का षड़यंत्र करना है।

एपी दुराई जी ने जो इस पशुपालन घोटाले के जांच अधिकारी थे ,स्पष्ट कर दिया है कि लालू जी को व कुछ आईएएस को फंसाने की गहरी साजिश हुई है। आखिर लालू जी को फंसाने की साजिश क्यो हुई? आखिर वह लालू जिन्होंने शिवहर कोषागार में हुए खेल का खुलासा कर रपट दर्ज कराई थी। वही लालू मुजरिम क्यों और कैसे हो गए?

जगन्नाथ मिश्र चारा चोर नहीं पंडित जगन्नाथ मिश्र हो गए- 

वह जगन्नाथ मिश्र जिसने इस पशुपालन घोटाले का सृजन किया वह चाराचोर न होकर पण्डित जगन्नाथ मिश्र और खेल को उजागर करने वाले लालू प्रसाद यादव चाराचोर?- अद्भुत व्याख्या है इस देश की।

लालू प्रसाद के ट्वीटर हैंडल पर जाकर देखें. उनके किसी भी ट्वीट पर विरोधियों के 10 कमेंट में आज भी 7-8 चारा घोटाले पर ही मिलेगा.
यह भी देख लीजिएगा को वो कमेंट करने वाले कौन लोग हैं. उनके बाद सैकड़ों घोटालेबाज़ हुए, उनके ट्वीट पर कमेंट में उनके घोटाले की बात नहीं होती…..आखिर क्यों?

चारा घोटाले पर मैं ने आजतक किसी को जगन्नाथ मिश्र पर लिखते नहीं देखा. वह घोटाला 1972 से चल रहा था. फिर लालू के पहले वालों की चर्चा क्यों नहीं?

देश में चारा घोटाले से बड़ा कोई घोटाला नहीं हुआ क्या?

उसी समय अलकतरा घोटाले का भी पर्दाफाश हुआ था जो चारा घोटाले से बड़ा था. उसमे अकेले मिश्रा जी लोग थे तो बात वहीं दफन हो गई. देश में कितने लोग जानते हैं उसके बारे में. आखिर क्यों न उसपर चारा घोटाले की तरह जांच हुई और न कोई चर्चा ??

पिछले 25 साल के सैकड़ों घोटाले में एक याद है तो चारा घोटाला आखिर क्यों? लालू प्रसाद यादव का अहीर होना ही उन्हें अपराधी घोषित करने के लिए काफी था। सीबीआई द्वारा लालू जी को क्रश करने की योजना को मूर्त रूप दिया गया क्योकि लालू जी इस देश की हजार वर्ष पुरानी सनातन एवं जड़ हो चुकी व्यवस्था को चुनौती दे दिए थे।

लालू जी ने राम रथ जो रोक दिया था। लालू जी ने आरक्षण के लिए पुरजोर जोर लगा दिया था। लालू जी ने मण्डल कमीशन को लागू करवाने के लिए अपनी पूरी पूंजी/ताकत झोंक डाली।

लालू जी ने रामजेठमलानी को मण्डल कमीशन के केस का वकील हायर कर सुप्रीम कोर्ट में इसे लेकर लड़ाई लड़ने का काम किया। लालू जी ने बिहार में वंचितों को भी जीवंतता दी। दमित-पीड़ित लोग अब लालू जी के कारण बोलने लगे।

लालू प्रसाद यादव जी वर्तमान राजनैतिक परिदृश्य ऐसे महानायक हैं। जिन्हे घटा करके कोई राजनीतिक गठबन्धन नही हो सकता है। लालू जी सामाजिक न्याय और साम्प्रदायिक सद्भावना के लिए अपरिहार्य हैं। लालू जी के मान मर्दन का लगातार प्रयास जारी है।

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