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पूर्व विधायक अखिलेश सिंह बोले मरने वाले ब्राह्मण नहीं अपराधी थे, पकड़े गए यादव निर्दोष हैं

नई दिल्ली/लखनऊ। नेशनल जनमत ब्यूरो

ब्राह्मण महासभा की परेशानियां बढ़ती जा रही है, कैबिनेट स्वामी प्रसाद मौर्य के बाद रायबरेली सदर से विधायक रहे अखिलेश सिंह ने मारे गए पांचों ब्राह्मणों को अपराधी करार दे दिया है। अब ब्राह्मण महासभाएं और तथाकथित हिन्दू महासभाएं किस-किस का पुतला फुकेंगी।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक अखिलेश सिंह ने आज इटौरा कांड को लेकर बड़ा बयान दिया। मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होने कहा कि पहली बात तो यह है कि मरने वालों को ब्राह्मण और मारने वालों को यादव यानि जाति से संबोधित न करें, यहीं बात बिगड़ जाती है। मेरे पास जो सूचना है, उसके अनुसार मरने वाले सभी अपराधी हैं।

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ऊंचाहार के इटौरा कांड मे ब्राह्मण नहीं, इंसान मारे गए हैं । मारने वाले भी इंसान है। जिन यादवों को फंसाया गया है, वे सभी निर्दोष हैं। निर्दोष होने के नाते मैं उनके साथ हूँ ।

पूर्व विधायक का सवाल इतनी रात में करने क्या आए थे- 

पूर्व विधायक अखिलेश सिंह का कहना है कि थाना ऊंचाहार अंतर्गत 26 जून को हुई घटना में 5 लोगों की मौत हुई थी। मारे गए पांच लोग ब्राह्मण नहीं अपराधी थे। वे देर रात प्रतापगढ़ जनपद से आपटा गांव क्या करने गए थे? जब आप किसी के घर पर धावा बोलेंगे फायरिंग करेंगे, तो गांव के लोग निश्चित तौर पर जवाब देंगे। इसी का परिणाम है आपटा गांव की घटना।

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अखिलेश आगे कहते हैं कि कुछ गंदे राजनीतिक लोग इस लड़ाई को ब्राह्मण व यादव से जोड़ रहे हैं, जो दुखद है। मरने वाले ब्राह्मण नहीं, अपराधी थे और मारने वाले इंसान थे। आत्मरक्षा में की गई घटना है। उन्होंने कहा कि यादव को टारगेट करके जो गंदी राजनीति कर रहे हैं, वह सुधर जाएं कानून को निष्पक्ष जांच करने दें।

रोहित शुक्ला के खिलाफ दर्ज हैं 8 आपराधिक मामले- 

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कार में जलकर मरे शातिर बदमाश रोहित शुक्ला के खिलाफ इन थानों में दर्ज हैं मुकदमे। रोहित शुक्ला कांग्रेस राज्य सभा सांसद प्रमोद तिवारी के लिए हत्या और राहजनी करने का काम करता था। जिस कार से जल कर सभी मरे हैं। उस गाड़ी में भारी मात्रा में कारतूस और असलहे भरे हुए थे। ये सभी यादव परिवार की हत्या करने के लिए गए थे।

फायरिंग कर रहे थे गांव वालों ने खदेड़ा- 

गांव वालों का कहना है कि मारे गए पांचों लोग वर्तमान प्रधान के घर पर चढ़ कर झगड़ा और मारपीट करने की नियत से आए, तो इसी समय इस गुट के लोगों ने डराने के लिए फायरिंग शुरू कर दी। जैसे ही फायरिंग की आवाज हुई। गांव वालों के कान खड़े हो गए। तभी किसी ने यह
अफवाह उड़ा दी की प्रधान जी को गोली लग गई और वे मर गए। यह खबर जैसे ही लोगों को लगी, सभी लोग बड़े आवेश मे अपने घरों से निकल आए और उन्हे दौड़ा लिया। आगे जाकर गाड़ी का एक्सीडेंट हो गया और उसमें ये लोग मारे गए।

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विधायक मनोज पांडेय की संदिग्ध भूमिका- 

गांव वाले बताते हैं कि घटना की सूचना स्थानीय विधायक मनोज पांडे को लगी। ब्राह्मण होने के नाते उन्होने इस संबंध मे अपने परिचित इंस्पेक्टर (नाम नहीं छाप रहा हूँ) से बात करके सारे केस को अपने पक्ष मे मोड़ लिया। नेशनल जनमत ने पूछा कि ऐसा उन्होने क्यों किया ? वे तो सपा के विधायक हैं, अभियुक्त यादव समाज के लोग हैं। जो सपा के वोटर समझे जाते हैं। उन्होने कहा कि क्षेत्रीय विधायक मनोज पांडे की उपेक्षा और गांव के मसले में अनावश्यक हस्तक्षेप करने के कारण इस गांव के लोग बेहद नाराज थे, इसलिए उन्होने भाजपा के पक्ष मे मतदान किया था। दूसरा जिनसे विवाद था प्रधान का वो सभी ब्राह्मण थे तो विधायक जी अपनी जाति का धर्म निभा रहे हैं। इसी कारण उन्होने थाने पर दवाब बनवा कर ग्राम प्रधान के पति और उनके बेटों को गिरफ्तार करवा दिया।

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