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‘शवराज’ : पुलिस हिरासत में किसान की मौत पर बवाल , सरकार की मंशा पर उठे सवाल

मंदसौर। नेशनल जनमत ब्यूरो।

एक तरफ तो मध्य प्रदेश में भाजपा की सरकार किसानों के आंदोलन को शांत करने में जुटी है तो वहीं दूसरी तरफ पुलिस हिरासत में घनश्याम नामक एक किसाने की मौत से शिवराज सरकार फिर से कटघरे में खड़ी नजर आ रही है.

आपको बता दें कि जिले में पुलिस हिरासत में किसान की मौत के बाद इलाके के किसानों में बेहद नाराजगी है. यहां 1 जून से चल रहे किसान आंदोलन में अब तक 6 किसानों की मौत हो गई. मृतक घनश्याम के परिजनों और दोस्तों का आरोप है कि पुलिस ने उसे गुरूवार को हिरासत में लिया था और शुक्रवार रात घनश्याम की मौत की खबर आते ही आसपास के गांवों में तनाव की स्थिति बनती दिखाई दे रही थी.

परिजनों का आरोप, पुलिस उठाकर ले गई थी घनश्याम को

बडवान गांव निवासी घनश्याम के परिवार का आरोप है कि आंदोलन के दौरान भाउगढ़ पुलिस द्वारा उसे जीप में लादकर ले जाते देखा गया था. घनश्याम के रिश्तेदारों का कहना है कि जब वह मोटरसाइकिल से जा रहा था तो भाऊगढ़ फंटा स्कावयर से उठाया गया. उसके परिजनों को पता नहीं था कि वह कहां है और वे देर रात तक उसे तलाशते रहे.

देर रात भाऊगढ़ थाना के इनचार्ज संजय सिंह घनश्याम को लेकर एमवाई हॉस्पिटल पहुंचे. डॉक्टरों ने घनश्याम को मृत घोषित कर दिया. पुलिस अज्ञात व्यक्ति उसे बता रही थी साथ ही वह परिजनों से घनश्याम के आंदोलन में घायल होने के बारे में बोलने को कह रही थी. घनश्याम का रिश्तेदार राहुल एमवाई हॉस्पिटल की मॉर्चरी में जाकर शव की पहचान की. घनश्यमा अपने पीछे पत्नी और एक नवजात बच्चा को छोड़ गया.

पुलिस ने परिजनों के आरोप को नकारा

भाऊगढ़ थाना इनचार्ज संजय सिंह ने घनश्याम के परिवार वालों के आरोपों को खारिज कर दिया और कहा कि घनश्याम आंदोलन के दौरान पत्थरबाजी करते हुए घायल हो गया था जिसके बाद उसे इंदौर ले जाया गया. उधर घनश्याम की मौत के बडवान गांव में भीड़ जमा हो गई और हालात को नियंत्रित करने के लिए इलाके में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है.

आरएएफ को भी स्थिति से निपटने के लिए लगाया गया है. डीआईजी हरि नारायणाचारी मिश्रा ने मीडिया को बताया कि शहर में हालात को नियंत्रित करने के लिए सभी उपाय कर लिए गए हैं. इस बीच एमवाई हॉस्पिटल के वीएस पाल ने कहा कि पंचमामें के लिए शव को भेज दिया गया है.

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