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कर्ज के बोझ तले दबे किसानों को खेती की नई राह दिखाते बुंदेलखंड के किसान मान सिंह पटेल

नई दिल्ली/बुंदेलखंड। नेशनल जनमत ब्यूरो

नोटबंदी के बाद बर्बाद हुई मंडियों और व्यापारियों का असर सीधे किसानों की फसल पर पड़ा अब हालात ये हैं कि पूरे देश का किसान परेशान है. महाराष्ट्र-मध्यप्रदेश -उत्तर प्रदेश से लेकर दक्षिण में तमिलनाडु तक किसान अपनी मांगों को लेकर सड़क पर उतर चुके हैं. ऐसे में किसान आत्महत्याओं के बीच बुंदेलखंड के बांदा से एक अच्छी खबर मिली है.

बांदा की बबेरू तहसील के पारा बन्नू बेगम गांव के 41 वर्षीय किसान मान सिंह पटेल ‘नेशनल जनमत’ से बात करते हुए बड़े गर्व के साथ कहते हैं. मेरे पास सिर्फ 10 बीघा जमीन है लेकिन मैं 30 से 40 वीघा बीघा वाले किसानों से ज्यादा पैदावार कर लेता हूं. मुझे खुशी है कि मेरी एक बीघा की फसल को देखने कृषि विभाग और उद्यान विभाग के बड़े-बड़े अधिकारी आ रहे हैं.

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कर्ज से उबरने के लिए शुरू किया था प्रयोग- 

मान सिंह पटेल को 2009 में अपने पिता शिवपूजन सिंह पटेल के इलाज में तकरीबन 3 लाख रुपये खर्च करने पड़े जिससे घर की स्थिति बिगड़ गई. घर में मां-बाप, पत्नी और दो बच्चों को खर्च चलाने के लिए कर्जा भी लेना पड़ा। यही से मान सिंह ने नकदी फसल उगाने के लिए जानकारी जुटाना चालू किया. सबसे पहले मान सिंह ने 2009 से 2016 तक मिर्च की खेती शुरू की जिसमें मामूली लागत में वो एक बीघे में एक लाख से लेकर 1 लाख 25 हजार रुपये तक कमा लेते थे. कर्ज तो दूर हुआ ही घर की सारी जरूरतें भी पूरी होने लगीं.

पूरे जिले में सिर्फ मान सिंह ने उगाई है परवल-

अमूमन बुंदेलखंड के किसान मौसमी फसलों पर ही निर्भर रहते हैं मटर, मसूर, गेहूं, सरसो की फसल ही उपजाते हैं. जिनमें मौसम  के ऊपर निर्भरता बहुत ज्यादा होती है. इसके अलावा बाजार के घटने-बढ़ने से कई बार लागत के बराबर मूल्य निकालना भी मुश्किल साबित हो जाता है.  ऐसे में मान सिंह पटेल ने अपनी ग्रेजुएशन तक की पढ़ाई का फायदा उठाते हुए नकदी फसलों को उगाने का निर्णय लिया. इस बार मान सिंह  पटेल ने अपने खेत में परवल की खेती की है.

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एक बीघा में लागत 5 से 7 हजार बचत 1.50 लाख से 1.75 लाख तक- 

मान सिंह पटेल ने बताया कि इस बार उन्होंने फतेहपुर के एक गांव में जाकर इस खेती के बारे में समझा था वहीं से मैं बीज लेकर आया. एक बीघे की लागत सिर्फ 5 से 7 हजार तक आई और अनुमान ये है कि एक सीजन में मैं एक बीघे से डेढ़ लाख से लेकर  1 लाख 75 हजार रुपये तक की सब्जी बेच लूंगा.

उद्यान विभाग ने किया है पुरस्कृत- 

कृषि विभाग और उद्यान के उप निदेशक ने गांव पहुंचकर मान  सिंह की खेती की तकनीकि की ना सिर्फ सराहना की बल्कि उद्यान विभाग से उन्नत कृषक का प्रमाण पत्र और सांकेतिक 1200 रुपये की प्रोत्साहन राशि भी दी गई. तस्वीर में मान सिंह पटेल को सम्मानित  करते हुए सांसद बांदा भैरो प्रसाद मिश्रा, केके भारतीय पूर्व जिलापंचायत अध्यक्ष और उद्यान विभाग के उपनिदेशक.

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क्या है तरीका लगाने का- 

मान सिंह पटेल ने परवल 15 दिसंबर 2016 में बोई थी. 2 मई 2017 से परवल बिकने लायक हो गई. अभी तक मान सिंह सिर्फ एक बीघे में 4 कुंतल परवल बेच भी चुके हैं. परवल की दो लंबी लाइनों के बीच 10 फुट का गैप दिया है. वहीं एक पौधे से दूसरे पौधे के बीच की दूरी 4 फुट है. एक बीघे में तकरीबन 400 पौधे हैं. मान सिंह  कहते हैं इतना जरूर ध्यान रखें कि परवल जिस खेत में लगा हो उसमें पानी ना भर पाए. पानी भरने वाले खेतो में परवल सड़ जती है.

एक बार बीज बोने के बाद तीन साल तक छुट्टी- 

परवल का बीज एक बार बोने के बाद तीन साल उसका फल निकलता रहता है. इस साल फल मई से लेकर नबंबर तक यानि सात महीने वहीं और दूसरे साल में अप्रेल से नबंबर तक यानि 8  महीने तक निकलता है.

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सरकारी मदद का अभाव- 

मान सिंह पटेल कहते हैं  कि सरकार की तरफ से प्रोत्साहन और जानकारी का दायरा बढ़ाया जाए तो मेरे जैसे कई छोटे किसान उन्नतशील किसान बन सकते हैं. सरकार की योजनाओं की जानकारी किसानों तक पहुंच ही नहीं पाती. परवल को लेकर आशान्वित होते हुए कहते हैं कि बुंदेलखंड के किसानों को अगर परवल और ऐसी ही नकदी सब्जियों के लिए अगर सरकार की तरफ से प्रोत्साहन मिले तो कर्ज से दबे किसानो को बहुत हद तक राहत मिल सकती है.

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