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सोशल मीडिया की ताकत: गीता यादव ने शुरू की रेप के खिलाफ मुहिम, देश भर में सड़क पर उतरी महिलाएं

नई दिल्ली, नेशनल जनमत ब्यूरो। 

कलियुग में पूंजीपतियों और मठाधीओं की गिरफ्त से दूर सोशल मीडिया नामक हथियार आपके हाथ में है। बस ये प्रयोग करने वाले के ऊपर निर्भर करता है कि वो उसका उपयोग नफरत के बीज बोने में करता है या अन्याय के खिलाफ जंग में।

सोशल मीडिया की इसी ताकत का सकारात्मक प्रयोग करते हुए महिला अधिकारों के लिए सक्रिय गीता यादव ने कठुआ और उन्नाव रेप कांड के खिलाफ #FightAgainstRape नाम से सोशल मीडिया में मुहिम शुरू की थी।

‘गीता यथार्थ’ के नाम से फेसबुक पर पुरुष सत्तात्मकता की धज्जियांं उड़ाने वालीं गीता को भी शायद उम्मीद नहीं होगी कि उनकी फेसबुक पर की गई अपील से देश के कई हिस्सों में महिलाएं सड़क पर उतर आएंगी।

गीता यथार्थ ने जब #FightAgainstRape हैश टैग शुरू किया और लोगों का आह्वान किया कि सड़कों पर उतरकर इन स्त्री विरोधी और मानव विरोधी प्रवृत्तियों का विरोध करें, तो लोग स्वत:स्फूर्त तरीके से सड़कों पर आ गए. यह एक गैर राजनीतिक आयोजन था और न्याय पसंद लोग इसमें जुटे।

इस बारे में भारतीय सूचना सेवा की (आईआईएस)अधिकारी गीता का कहना है कि कठुआ में एक नाबालिग की बलात्कार के बाद हत्या और बलात्कारियों के समर्थन में तथाकथित सभ्य समाज के लोगों का सड़क पर आना देश के लिए शर्मनाक बात है।

इसी तरह यूपी के उन्नाव में बलात्कार की शिकार नाबालिग लड़की के पिता की जेल में हत्या और विधायक के खिलाफ केस दर्ज करने में टालमटोल ने लोगों में एक गुस्सा भर दिया है. इसलिए बड़ी संख्या में जागरूक महिलाओं ने सड़क पर उतरकर अपना रोष प्रकट किया।

दिल्ली के कनॉट प्लेस में हुआ प्रदर्शन- 

ऐसा ही एक प्रदर्शन दिल्ली के कनॉट प्लेस में 14 अप्रैल को हुआ, जिसमें सैकड़ों लोगों ने हिस्सा लिया. ये लोग शाम से ही कनॉट प्लेस में जुटने लगे और इंसाफ की मांग करते हुए नारेबाजी करते रहे।

लोगों की मांग थी कि बलात्कार के मामलों की प्राथमिकता के आधार पर समयबद्ध तरीके से जांच हो और इनका निबटारा फास्ट ट्रैक कोर्ट में हो। बलात्कारियों के समर्थन में निकलने वाले जुलूसों में तिरंगे के इस्तेमाल पर भी रोक लगनी चाहिए।

हर क्षेत्र में महिलाओं की उपस्थिति सुनिश्चित करने और उनके अधिकारों की गारंटी की मांग भी प्रदर्शनकारियों ने की. शाम ढलने के बाद प्रदर्शनकारियों ने बलात्कार पीड़ित की स्मृति में मोमबत्तियां जलाईं और सड़क पर मार्च निकाला.

इस मौके पर महिला एक्टिविस्ट वंदना राग, सावित्रीबाई फुले की कविताओं की अनुवादक अनिता भारती, फुलेवादी कार्यकर्ता इंदिरा सैनी ने भाषण दिया. तमाम वक्ताओं ने महिलाओं से एकजुट होकर संघर्ष करने की अपील की.

कई शहरों में हुआ प्रदर्शन- 

सोशल मीडिया के माध्यम से जारी हुई अपील पर दिल्ली के साथ ही साथ छत्तीसगढ़ के भिलाई और रायपुर तथा यूपी के लखनऊ में भी महिलाओं ने #FightAgainstRape हैशटैग के तहत प्रदर्शन किया.

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