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अंबानी की फर्स्टपोस्ट के संपादक जी भूमिहार हैं, इसलिए कुर्मी-यादव गठबंधन के खिलाफ हैं

नईदिल्ली। नेशनल जनमत ब्यूरो 

देश के बड़े उद्योगपतियों में से एक मुकेश अंबानी के स्वामित्व वाले ग्रुप नेटवर्क 18 द्वारा संचालित फर्स्ट पोस्ट न्यूज वेबसाइट लालू प्रसाद यादव के खिलाफ मोर्चा खोला हुए है. ना सिर्फ लालू  बल्कि उसकी खबरों की हेडिंग देखकर स्पष्ट है कि उसे लालू-नीतीश के गठबंधन से नफरत की हद तक दिक्कत है. अब जानकारी हुई है कि उसके संपादक जी भूमिहार हैं इसलिए उनको लालू यादव से विशेष आंतरिक दिक्कत है.

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नौकरी और आंतरिक दोनों कारणों से है संपादक जी को लालू से दिक्कत- 

कारण स्पष्ट है लालू प्रसाद यादव आजकल बीजेपी और मोदी के विरोध में सबसे ज्यादा मुखर हैं. अब बीजेपी यानि केन्द्र सरकार का जो दुश्मन होगा उसे मुकेश अंबानी के पैसों से चल रही वेबसाइट कैसे छोड़ देगी. उसी तरह नीतीश कुमार 2019 के लिए पीएम मोदी के विरोध में सबसे सशक्त चेहरा बन सकते हैं तो उनको इस महागठबंधन से निकालने में ही तो बीजेपी का फायदा है. ये तो हुई मालिक के हित की बात अब बात करते हैं खुद के अंदर भरी हुई नफरत की.

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एडिटोरियल बोर्ड में निर्णय लेने वाले सभी सवर्ण हैं- 

दरअसल वेबसाइट मे एडीटोरियल बोर्ड में यानि निर्णय लेने के सभी पदों पर बैठे लोग सवर्ण जाति से हैं.  कार्यकारी संपादक अजय सिंह भूमिहार हैं, जो खबरों के चयन के लिए सबसे ज्यादा जिम्मदार हैं. उनकी भूमिहार जाति की लालू यादव को लेकर नफरत के कारण बिहार में छुपे हुए हैं.

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लालू यादव से इतनी नफरत क्यों है ?

लालू यादव ने बिहार में भूमिहारों के वर्चस्व को तोड़ा बिहार में लालू यादव ही वो नेता थे जिन्होंने नारा दिया था भूरा बाल साफ करो. इस नारे में भूरा शब्द का मतलब भूमिहार जाति से ही है. इसके अलावा लालू यादव ने बीते दिनों बिहार में हुए विधानसभा चुनाव में एक भी टिकट भूमिहार जाति के लोगों को नहीं दिया है. जिससे देश भर के भूमिहारों में लालू यादव को लेकर नाराजगी है. शायद यही वो खुन्नस है जो फर्स्ट पोस्ट में एडिटोरियल बोर्ड में बैठे भूमिहार जाति के पत्रकार लालू चालीसा पढ़ते रहते हैं. या कहें कि लालू यादव की आलोचना करने का कोई अवसर नहीं छोड़ते हैं.

 फर्स्ट पोस्ट ने आरजेडी अध्यक्ष लालू यादव के खिलाफ नकारात्मक खबरें लगाने का अभियान चलाया हुआ है.  मई माह में इनकम टैक्स के छापों से तो जैसे उसे संजीवनी ही मिल गई है. इसके बाद इस अभियान को बढ़ा दिया गया.

खुद को निष्पक्ष बताने वाले इस जैसे तमाम कॉरपोरेट मीडिया की खबरों की हेडिंग से ही आप अंदाजा लगा सकते हैं कि लालू-नीतीश गठबंधन को लेकर इनके मन में कितना गुस्सा पनप रहा है.

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लालू-नीतीश गठबंधन से इतनी दिक्कत क्यों है- 

लालू-नीतीश गठबंधन को करीब से देख रहे वरिष्ठ पत्रकार निखिल आनंद कहते हैं कि लालू के लगातार आरक्षण के पक्ष में बोलने, पिछड़ी जाति का रिजर्वेशन बढ़ाकर 60 फीसदी करने, दलितों – पिछड़ों को प्राईवेट सेक्टर में भी आरक्षण देने, महिला आरक्षण के भीतर आरक्षण देने और मंदिरों में भी ब्राह्मणों के आरक्षण के खिलाफ आवाज उठाने के कारण लालू यादव से देश का जातिवादी माडिया अंदर अंदर ही दुश्मनी पाले बैठा है.

हाल के कुछ दिनों की फर्स्ट पोस्ट की हेडिंग देखिए- 

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चारा घोटाले पर एससी का फैसला : लालू को समझने में हर वक्त हर किसी ने भूल की ( 8 मई)

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