You are here

अगर आप जुल्म के खिलाफ हैं तो पढ़िए वीरांगना फूलन देवी निषाद पर लिखी ये कविता…

नई दिल्ली। नेशनल जनमत ब्यूरो @nationaljanmat

विश्व की प्रतिष्ठित मैगजीन टाइम ने सांसद फूलन देवी निषाद को विश्व की सर्वश्रेष्ठ विद्रोहिणी की श्रेणी में रखा था. भारत की तरफ से इस श्रेणी में ये एकमात्र नाम था. आज फूलन देवी हमारे बीच में नहीं है लेकिन अत्याचार का बदला लेने के लिए उठाए गए कदम को लोग आज भी याद रखते हैं. जेएनयू के रिसर्च स्कॉलर और सामाजिक न्याय के सिपाही धर्मवीर यादव गगन ने उन्हे वीरांगना उपाधि से विभूषित किया है.

आप भी पढ़ें ये कविता–
_______________
जब मैं बुड्ढा हो जाऊँगा

तब मेरे बेटे का बेटा मेरी गोंद में बैठकर

मेरी जवानी के किस्से पूछेगा

मैं आंसू बहाते हुए

बस यही कह पाउँगा

मेरे बच्चे

मेरी जवानी में कोई ‘वीरांगना फूलन’ नहीं थीं

इसलिए वो दरिंदे

किसी की भी गर्दन काटकर

रस्सी में बाँध

पेड़ से लटका देते

किसी जवान लड़की का

रेप कर उसे जिन्दा जला देते

या उसकी हत्या कर

उसे पेड़ से लटका देते

हम सब उस समय उस टँगी हुई

लाश के चारो ओर बैठकर विलखते रहते

जब बच्चा पूछेगा

कि बाबा आप लोग

‘बुआ फूलन’ क्यों नहीं बन गए ?

हम कुछ नहीं बोल पाएंगे

तब भी बैठे – बैठे हम आंसू बहाते रहेंगे l

मेरा बच्चा मेरी गोंद से उठकर

मेरी आँखों में आँखें डालकर

घूरेते हुए फूलन बन

वहाँ जायेगा

जहाँ कोई निहत्था लड़ रहा होगा

तलवार बाज हाथों से;

उस निहत्थे हाथ को मजबूत करेगा —

मनुष्यता के लिए

समानता के लिए

बंधुता के लिए l

—–धर्मवीर यादव ‘गगन’

Related posts

Share
Share