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मनुवादियों ने अपनी ‘गोमाता’ की सेवा करने के बजाए उसका भार साजिशन किसानों पर डाल दिया है

नई दिल्ली। नेशनल जनमत ब्यूरो 

इन दोनों केन्द्र और उत्तर भारत के कई राज्यों में बीजेपी की सरकार होने से गाय राजनैतिक एजेंडे में ंशामिल हो गई है. एक बेजान जानवर को धार्मिक मान्यता का रंग देकर बीजेपी, संघ और उससे जुड़े हिंदु युवा वाहिनी और बजरंग दल जैसे दर्जनों संगठनों के लोग भगवा गमछा डालकर गोसेवक की बजाए गोगुंडे बन गए हैं. ये समस्या किसी एक प्रदेश तक सीमित ना होकर पूरे देश की समस्या बन गई है.

गाय को एक किसान और समाज उपयोगी जानवर से सीधे गोमाता बना देने की जिद से किसानों के सामने भीषण संकट उत्पन्न हो गया है. गरीब किसानों को मनुवादियों की माताओं और उनकी संतानों के रूप में आवारा जानवरों से अपनी फसल को बचाने और दूध ना देने वाली गायों को जबरन पालने से आर्थिक समस्या का सामना करना पड़ रहा है.

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पढ़िए राजस्थान के सामाजिक कार्यकर्ता और स्वतंत्र पत्रकार जितेन्द्र महला के विचार उन्होंने बताया है संघियों ने कैसे अपना एजेंडा किसानों पर थोप दिया है-

संघी किसान नहीं होते इसलिए किसान का मर्म नहीं समझते- 

संघी मानसिकता किसानों के लिए ज़हर है और कांग्रेस संघ की बी टीम है. ब्राह्मणवाद की दायीं और बायीं भुजा, बीजेपी और कांग्रेस हैं. क्या आरएसएस उर्फ़ मनुवादी स्वयं सेवक संघ और बीजेपी देश में सबसे बड़ी किसानी विरोधी पार्टी है ?

इसका उत्तर है हां, क्योंकि आरएसएस और उसके प्रायोजित संगठनों ने देश भर में गोभक्ति प्रपंच रचा है. इस तरह आरएसएस ने करोड़ों आवारा गोमाताओं की सेना तैयार की और उन्हें किसानों के खेतों को चौपट करने छोड़ दिया.

किसान दिन में खेत में हांड़-तोड़ मेहनत करता है और रात में टॉर्च लेकर गोमाताओं से अपना खेत बचाता है. गोभक्ति के प्रपंच ने किसानों की नींद हराम कर रखी है.

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गोभक्ति के नारे ने समाज के सामूहिक विवेक की हत्या कर दी है- 

भक्ति का नारा जहां भी लगता है वहीं सत्य का नाश हो जाता है. आदमी अपने विवेक को खुंटी पर टांग देता है. गोभक्ति के नारे ने समाज के सामूहिक विवेक की हत्या की है. वरना ऐसा-कैसे हो सकता है कि देश का पेट भरने वाले किसानों की छाती पर मूंग दल रही गोमाताओं के मामले में कहीं से कोई ईमानदार आवाज़ नहीं आती.

गोभक्ति का प्रपंच किसानों के लिए राष्ट्रीय समस्या बन गई है- 

हम सच के साथ खड़ें रहेंगे और बार-बार कहेंगे कि गोभक्ति और गोमातायें किसानों के लिए राष्ट्रीय समस्या बन गई है. अपने खेत से लेकर मंडी तक हर जगह किसानों से गोसेवा के नाम पर टैक्स वसूला जा रहा है. गोमाताओं का भार मनुवादियों ने पूरी तरह साजिशन किसानों पर डाल दिया है, जबकि किसान की कमर पहले से टूटी हुई है.

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गोभक्ति उर्फ़ मनुवाद मुर्दाबाद-मुर्दाबाद.
किसानों की तरक्की और आजादी जिंदाबाद-जिंदाबाद.

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