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पिछड़े वर्ग के सामाजिक चिंतकों, लेखकों, कवियों और पत्रकारों का ‘महाजुटान’ गाजियाबाद में कल

नई दिल्ली। नेशनल जनमत ब्यूरो 

पिछड़ा वर्ग की सरकारी परिभाषा यह है कि जो सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़ा हो. इसके लिये आयोग ने कई मानक भी बनाए हैं। लेकिन उन सबसे पृथक अगर मजबूत और दमदार परिभाषा क बात करें पिछडे़पन की तो वह है- जो समाज जितना अधिक लेखन, साहित्य, बौद्धिक कार्यों में पीछे है वही पिछड़ा है। 65% जनसंख्या (लगभग 85करोड़) पिछड़ों में प्रतिशत के हिसाब से सबसे कम लेखक, कवि, पत्रकार, रचनाकार हैं. आइये मूल बीमारी को दूर करें संगठन के माध्यम से.

ये कहना है 16 जुलाई यानि कल गाजियाबाद में पिछड़े वर्ग के कवियों, लेखकों और पत्रकारों की महाजुटान के आयोजक देश के जाने माने कवि, लेखक और पूर्व नौकरशाह राजकुमार सचान होरी का।

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विक्रांत गेस्ट हाउस महरौली में होगा कार्यक्रम- 

कार्यक्रम की व्यवस्था संभाल रहे इंद्रप्रकाश अकेला ने बताया कि 16 जुलाई दिन रविवार को विक्रांत गेस्ट हाउस, निकट कोलम्बिया अस्पताल, महरौली गाजियाबाद  में समय 1 बजे से 7 बजे तक.कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।

कार्यक्रम का मकसद- 

राजकुमार सचान होरी बताते हैं कि हम सब अवगत हैं कि संगठन खड़ा कर उसके आधार पर कार्य करने में पिछड़ा वर्ग से अगड़ा समाज तो सदियों से बहुत बहुत आगे है ही, यहां तक दलित समाज भी अब जागरूक होकर संगठनात्मक दृष्टि से हमसे आगे हैं। इन दोनों वर्गों के सशक्त संगठन हैं और उनका लाभ भी इन्हें मिल रहा है. मगर अफ़सोस पिछड़ा वर्ग के रचनाकारों का राष्ट्रीय स्तर पर कोई संगठन ही नहीं है.

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इसलिए कलमकारों को घोर उपेक्षा का शिकार होना पड़ता है. कहते हैं संघे शक्ति: कलियुगे तो आइये पूर्ण समर्पण के साथ हम भी खड़ा करें संगठन आपकी सहभागिता से जो अपने कलमकारों और पिछड़ों के उत्थान के लिये अनेकों कार्यक्रम संचालित करे.

पिछड़े समाज में आज भी बौद्धिक चिंतकों को उचित स्थान नहीं- 

पिछड़ी जातियों के विभिन्न सामाजिक, राजनैतिक संगठन तो जमाने से हैं, पर वहां भी हमारा यह बौद्धिक वर्ग उचित स्थान न पा सका. अपनी अपनी जातियों में सबने नेताओं, अधिकारियों, कर्मचारियों, व्यापारियों, किसानों और तमाम सामाजिक समस्याओं की बातें की, कार्य किये पर इन लेखकों, पत्रकारों, कवियों, रचनाकारों के लिये भी कुछ न किया गया. पिछडे़ वर्ग के सामाजिक, राजनैतिक संगठन कभी भी पिछडे़पन की वास्तविक बीमारी लगता है समझ ही नहीं पाये या फिर समझना ही नहीं चाहते.

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पिछडे़पन की परिभाषा यूं भी की जा सकती है जो कभी न की गई, न समझी गई  “जो जाति या वर्ग लेखन, पत्रकारिता, साहित्य में पीछे है वही पिछड़ा है और जो आगे वही अगडा़ ” …..राजनैतिक सत्ता से भी ज़्यादा जरूरी है बौद्धिक सत्ता…. ब्राह्मण का उदाहरण काफी है……… आइये हम बौद्धिक सत्ता की ओर एक मजबूत कदम बढायें मिल कर.

कैसे पहुंचे विक्रांत गेस्ट हाउस-

दिल्ली स्टेशन उतरने वाले लोग लखनऊ जाने वाला नेशनल हाइवे 24 पर आएं. आगे इंदिरापुरम, विजय नगर पार करते हुये लाल कुंआ के आगे इसी हाइवे पर ही कोलम्बिया अस्पताल और विक्रांत गेस्ट हाउस स्थित हैं. जो सदस्य गाजियाबाद रेलवे स्टेशन पर उतरें वे 1 नंबर प्लेट फार्म से बाहर निकल कर लालकुआं के लिये टेम्पो या आटो पकड़ें. लाल कुंआ में उतर कर वहीं से विक्रांत गेस्ट हाउस के लिये ऑटो लें लगभग 1 किमी पर हाइवे पर ही विक्रांत गेस्ट हाउस दिख जाएगा।

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कार्यक्रम की जानकारी ले सकते हैं

1 राजकुमार सचान होरी 9958788699
2 हरिओम बैसला 9818913933
3 इंद्र प्रसाद अकेला 9897332021
4 बाबा कानपुर 9818217925
5 हरिभान सिंह पटेल 9310351885

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