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सभ्य समाज का स्याह चेहरा, गाजियाबाद में सीवर सफाई कर रहे 3 मजदूरों की दम घुटने से दर्दनाक मौत

गाजियाबाद, नेशनल जनमत ब्यूरो।

देश से जातिवाद खत्म होने की बात करने वालों देख लो इस देश का जातिवादी चरित्र आज भी देश की तरक्की में बाधक बना हुआ है। तुम सब्जबाग दिखाने वाले जादूगरों के करिश्मे में बंधकर देश को तरक्की की राह पर जाने का सपना देख सकते हो लेकिन इस सामाजिक हकीकत से कैसे छुटकारा पाओगे ?

कुछ ही दिन पहले सीवर की सफाई के दौरान एक साल में ही 22327 भारतीय नागरिकों के मारे जाने की खबर आई थी। पिछले हफ्ते मध्य प्रदेश के देवास से 4 सफाईकर्मियों की मौत सेप्टिंक टैंक साफ करते हुए मौत हो गई।

अब गाजियाबाद के 110 स्थित मार्केट में 21 सितंबर (गुरुवार) को सीवर की सफाई करने उतरे तीन मजदूरों की दम घुटने से मौत हो गई। तीनों मृतक मजदूर गाजियाबाद विकास प्राधिकरण में ठेकेदारी पर काम कर रहे थे।

मीडिया खबरों के मतुाबिक, घटना दोपहर 3 बजे की है जब एक मजदूर सीवर क गढ्ढे में गया। काफी देर तक जब वह नहीं निकला तो उसका दूसरा साथी भी गड्ढे में उतरा। वह भी बाहर नहीं निकला इसके बाद तीसरा मजदूर भी गड्ढे में गया। इसके बाद तीनों ही बाहर नहीं निकले।

शाम 6 बजे के करीब तीनों के शव को बाहर निकाला गया। घटना के बाद ठेकेदार फरार हो गया। सूचना पाकर पुलिस घटनास्थल पर पहुंची। पुलिस ने शवों को अपनी गिरफ्त में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।

जानकारी के मुताबिक सेक्टर-110 स्थित मार्केट में स्थित सीवर की साफ-सफाई काम चल रहा है. इस सिलसिले में गुरुवार शाम को तीन मजदूर सीवर की गढ्ढे की सफाई करने पहुंचे थे।

इस बीच मौके पर मौजूद सुपरवाइजर ने इसकी जानकारी ठेकेदार सोहन लाल को दी। उसने पुलिस व दमकल विभाग को भी जानकारी दी। जिसके बाद फेज-2 पुलिस मौके पर पहुंची। रस्सी की सहायाता से तीनों को बाहर निकाला गया। जिन्हें जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

इस घटना के बाद ठेकेदार सोहन लाल फरार हो गया पुलिस मामले की जांच कर रही है। दूसरी तरफ प्राधिकरण ने भी मामले में जांच के आदेश दिए हैं।

इस बारे में वरिष्ठ पत्रकार दिलीप मंडल लिखते हैं कि-

सीवर में हर साल बीस हजार से ज्यादा मौत वाला विश्वगुरु?

आप को क्या लगता है कि दुनिया को पता नहीं होगा कि भारत में यह सब होता है? मतलब कि हम कहेंगे कि हम विश्वगुरु हैं, और वे मान लेंगे?यह सब विदेश में छपता है. नोएडा में नौकरानियों का विद्रोह न्यूयॉर्क टाइम्स में विस्तार से छपा. जितना भारतीय मीडिया में आया, उससे कहीं ज्यादा.

ऐसी घटनाओं की वजह से पूुरी दुनिया में भारत का मजाक उड़ाया जाता है, या फिर लोग दया की दृष्टि से देखते हैं. हमारे सारे अच्छे-बुरे कर्मों की जानकारी दुनिया को है.

कश्मीर से ज्यादा खतरा देश के अपने सीवर में है- 

कश्मीर में हमारी लगभग एक तिहाई सेना तैनात है. सरकारी आंकड़ा है कि 2016 में वहां 60 सुरक्षाकर्मी देश की रक्षा करते हुए मारे गए, जो हाल के वर्षों का सबसे बड़ा आंकड़ा है. कश्मीर एक खतरनाक जगह है. लेकिन इसी भारत में एक जगह कश्मीर से भी खतरनाक है.

वह जगह है सीवर. इनकी सफाई करते हुए एक साल में 22,327 भारतीय नागरिक मारे गए .(स्रोत- एस. आनंद का आलेख, द हिंदू)

कश्मीर पोस्टिंग की तुलना में सीवर में जाने में जान का जोखिम कई गुना ज्यादा है. सीवर से आप जिंदा लौटकर न आएं, इसकी आशंका बहुत ज्यादा है. लेकिन अगर दिल्ली जैसे किसी शहर में सीवर साफ न हों, तो हफ्ते भर में हैजा और तमाम बीमारियों से हजारों लोग मर जाएंगे,
इस मायने में यह काम किसी भी अन्य काम से ज्यादा नहीं तो कम महत्वपूर्ण भी नहीं है.

सुप्रीम कोर्ट का आदेश है कि सीवर में इंसान ना भेजा जाए- 

सुप्रीम कोर्ट का आदेश है कि किसी भी हालत में किसी व्यक्ति को सीवर में न भेजा जाए. इसके लिए भारतीय संसद ने मैनुअल स्कैंवेंजर एंड रिहैबिलिटेशन एक्ट 2013 भी पास किया है. सुप्रीम कोर्ट ने सीवर साफ करने के दौरान हुई मौत का मुआवजा 10 लाख फिक्स किया है.
लेकिन हालात बदले नहीं है.

दुनिया में भारत की बदनामी की एक बड़ी वजह सीवर में होने वाली मौत है. इसे दुनिया कितनी गंभीरता से लेती है, इसका अंदाजा इस बात से लगाइए कि इस दिशा में काम करने वाले मित्र बेजवाड़ा विल्सन को मैगसेसे अवार्ड मिला है.

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