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सुनिए CM साहब ‘गर्ल्स फाइटर’ का दर्द, क्या रेप पीड़िता का साथ देकर प्रतीक्षा कटियार ने जुर्म कर दिया ?

नई दिल्ली/लखनऊ। नीरज भाई पटेल ( नेशनल जनमत) 

मैंने प्रधानमंत्री के स्वच्छ भारत अभियान के लिए महिलाओं को जागरूक किया क्या ये मेरा अपराध है?

मैं स्कूलों में जाकर लड़कियों को आत्मनिर्भर बनने और आत्मरक्षा की ट्रेनिंग देती हूं क्या ये गुनाह है ?

मैं सीएम योगी के ही चलाए मजनू अभियान में सहयोगी करती हं क्या ये मेरा गुनाह है?

एक सामाजिक कार्यकर्ता होने के नाते एक रेप पीड़िता की मदद करने आगे आई क्या मेरा अपराध है ?

मैं महिला सुरक्षा और महिला हितों की बात करने वाले पीएम और सीएम से पूंछना चाहती हूं आखिर इनमें से किस अपराध की सजा देकर मेरा जीवन बर्बाद किया जा रहा है.

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लड़कियों को आत्मरक्षा की ट्रेनिंग देने वाली प्रतीक्षा की मार्मिक अपील- 

डिप्टी रजिस्ट्रार सोसाइटीज अरविंद उत्तम से प्रशस्ति लेती हुईं प्रतीक्षा

ये मार्मिक अपील कानपुर में लड़कियों और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए आत्मरक्षा के पैंतरे और जूडो कराटे की ट्रेनिंग देने वाली 25 साल की समाजसेवी प्रतीक्षा कटियार की है. महिलाओं को गर्व से जीना सिखाने वाली प्रतीक्षा कटियार को रेप पीड़िता के समर्थन में प्ररदर्शन करने की सजा ये मिली कि उस पर गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है.

हैरत की बात तो ये है कि महिला डीआईजी सोनिया सिंह ने गिरफ्तारी के आदेश भी दे दिए हैं. ऐसे में एक ऑडियो संदेश के जरिए प्रतीक्षा कटियार ने लोगों के माध्यम से अपनी ये मार्मिक अपील प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री तक पहुंचाने की अपील की है.

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रेप पीड़िता की मदद करना यूपी मेंं अपराध है क्या ?

वायरल हुए ऑडियो में प्रतीक्षा कटियार अपना दर्द बयां करते हुए कह रही हैं कि कानपुर में महिला उत्पीड़न के ख़िलाफ़ आवाज उठाने की हिम्मत भविष्य में अब कोई एनजीओ या सामाजिक कार्यकर्ता शायद ही जुटा पाएगा. बिडंबना देखिए कानपुर-बर्रा के न्यू जागृति हॉस्पिटल के आईसीयू में किशोरी से रेप के बहुचर्चित मामले में महिलाओं को आत्मरक्षा के गुर सिखाने वाले एनजीओ गर्ल्स फाइटर की संचालिका प्रतीक्षा कटियार को पीड़िता व उसके परिवार का साथ देना मंहगा पड़ गया है. इस मामले में पुलिस ने धरना प्रदर्शन करने व  आरोप में ना सिर्फ प्रतीक्षा पर बल्कि रेप पीड़िता के परिजनों और रिश्तेदारों पर ही गंभीर धाराओं में मामले दर्ज कर लिए हैं.

एनजीओ से जुड़े लोगों और प्रतीक्षा की गिरफ्तारी के आदेश दिए-

डीआईजी कानपुर सोनिया सिंह ने संचालिका सहित एनजीओ से जुड़े सदस्यो की गिरफ्तारी के आदेश दे दिए हैं. कानपुर साउथ बर्रा के कर्रही रोड स्थित न्यू जागृति हॉस्पिटल बंद कराने की मांग को लेकर हुए बवाल में पुलिस ने फाइटर गर्ल्स एनजीओ संचालिका प्रतिक्षा कटियार और उसकी सदस्य तान्या गुप्ता समेत 29 नामजद और 200 अज्ञात के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी.

इस मामले में 10 लोगों की पहले ही गिरफ्तारी हो चुकी है. अब ऐसे में सवाल ये उठ रहा है कि सामाजिक कार्यकर्ताओं को गुंडे और उपद्रवियों की श्रेणी में शामिल करना कहां तक जायज ठहराया जा सकता है.

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‘डरना नहीं लड़ना है’ के गुर सिखाती हैं लड़कियों को- 

एक स्कूल में ट्रेनिंग देती हुई प्रतीक्षा लाल टीशर्ट में

प्रतीक्षा को लगा कि महिलाओं को मजूबत बनाने के लिए नौकरी का ख्याल मन से निकालना होगा और प्रतीक्षा निकल पड़ी अपनी तरह छात्राओं को सशक्त बनाने. शहर के स्कूलों में जा-जाकर आज 300 लड़कियो के साथ डरना नहीं लड़ना है की थीम पर काम कर रही हैं.कानपुर शहर के बर्रा 2 में रहने वाली प्रतीक्षा कटियार महिला सशक्तिकऱण के लिए काम करती हैं. महिलाओं और छात्राओं को आत्मनिर्भर बनाना ही उनके जीवन का उद्देश्य है. 25 साल की प्रतीक्षा ने  नौकरी की लालसा  छोड़कर 2012 में 10 महिलाओं के साथ एक छोटी सी टीम बनाई थी. प्रतीक्षा को काम करने की प्रेरणा दिल्ली के  निर्भया कांड के बाद मिली.

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फाइटर टीम फेलफेयर एसोसिएशन के माध्यम से कानपुर के स्कूलों की छात्राओं को आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास कर रही प्रतीक्षा बेहद साधारण परिवार से हैं. उनकी मां भी प्रतीक्षा की इस लगने में उनके साथ हैं.तत्कालीन डिप्टी रजिस्ट्रार चिफ फंट एंड सोसाइटीज एके उत्तम भी प्रतीक्षा के बेहतर काम के लिए प्रशस्ति पत्र दे चुके हैं. इसके अलावा प्रतीक्षा को कई पुरस्कार मिले हैं.

प्रतीक्षा ने भ्रष्ट अधिकारियों पर मामले को दबाने का आरोप- 

प्रतीक्षा कटियार ने आरोप लगाया कि कुछ पुलिसकर्मी अस्पताल मालिकों के आगे बिके हुए हैं, इसलिए पीड़िता के परिजन और उनकी मदद करने वालों पर ही मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं, ताकि मामला बदला जा सके. प्रतीक्षा ने कहा कि जब महिलाएं शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहीं थी तो उन पर लाठीचार्ज करने की पुलिस को जरूरत ही क्या थी.

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 प्रतिक्षा बोलीं मैंने तो पुलिसकर्मी को बचाया है- 

प्रतीक्षा कटियार ने कहा कि मेरा पास वीडियो है. जिसमें स्पष्ट है कि घटना वाले दिन मैं पुलिसकर्मी को सहाराा उठा रही हूं और पुलिस का सहयोग कर रही हूं. इतना ही नहीं मैेने सीओ के कहने पर लोगोंं से हाथ जोड़कर शांत होने की अपील भी की. सवाल ये है कि अगर प्रतीक्षा उस दिन पुलिस का सहयोग कर रहीं थीं तो फिर उन पर और उनके एनजीओ पर मुकदमा क्यों दर्ज किया गया.

लेनदेन के आरोप से भड़क गए थे लोग-

प्रतीक्षा कटियार ने बताया कि उस दिन एनजीओ की लड़कियां वहाँ सिर्फ धरना देने, हॉस्पिटल बंद कराने की मांग को लेकर और हॉस्पिटल प्रशासन पर कार्रवाई की मांग कर रहीं थीं । वहीं कुछ लोगों ने वहां आकर बताया कि हॉस्पिटल संचालक ने बर्रा पुलिस को पैसा देकर मामला सेट कर दिया है, लोग इस बात पर भड़के थे. इतने में ही पुलिस ने आकर लोगों पर लाठियां भांजना शुरू कर दिया. पुलिस को उपद्रवियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं और महिलाओं में फर्क करना चाहिए था. पुलिस ने धरना प्रदर्शन में शामिल एनजीओ की सात लड़कियों और पीड़िता की मुहल्ले की महिलाओं और रिश्तेदारों पर मामला दर्ज कर दिया है.

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