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भीड़तंत्र की ‘गोडसेवादी विचारधारा’ के खिलाफ शुरू होगा अहिंसक आंदोलन गांधीवादी पार्ट- 2

नई दिल्ली। नेशनल जनमत ब्यूरो।

देश भर में गौगुंडों को आतंक फैलता जा रहा है. हर रोज देश के दूर दराज के इलाके से गाय की रक्षा के नाम पर मुसलमानों- दलितों की हत्या की खबर आ ही जाती है.  गाय के नाम पर हिंसा फैलाने वाले क्रूर गुंडों ने देश के लोकतंत्र का मजाक उड़ाते हुए लोकतंत्र को जोकतंत्र में बदल दिया है।

गाय के नाम पर हिंसा करने वाले लोगों के खिलाफ एक अहिंसक आंदोलन की जरूरत देश महसूस कर रहा है। सामाजिक चिंतक मोहम्मद जाहिद ने गाय की रक्षा के नाम पर देश पर गौरक्षकों द्वारा थोपी गई हिंसा के खिलाफ एक गांधीवादी आदोलन की जरूरत पर जोर दिया है।

मोहम्मद जाहिद अपनी फेसबुक वॉल पर लिखते हैं …

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गाँधीगिरी पार्ट 2 :-

एक विनम्र तरीके से भी आप दुनिया को हिला सकते हैं:-महात्मा गाँधी

जरूरी नहीं की सत्ता पर अासीन राजनेताओं की कुंभकर्णीय नींद तोड़ने के लिए इंकलाबी आंदोलन ही एक मात्र रास्ता हो। बहुत हद तक गाँधीवादी आंदोलनों की प्रासंगिकता आज भी बरकरार है।

हमारी आपकी , हम सबकी , एक “काली पट्टी” मुहिम मात्र ने उनकी आँखों पर पड़ी काली पट्टी को खोलने का काम किया है। यानि कि हमारी आपकी गाँधीवादी मुहिम #EidWithBlackBand कारगर साबित हुई थी। दुनिया तक आवाज़ पहुँची , दुनिया का ध्यान हमारे आपके ऊपर हुए ज़ुल्म की तरफ खिंचा, दुनिया हिली, देश हिला, सरकार हिली और सबसे बड़ी बात प्रधानमंत्री मोदी जी की ज़बान हिली।

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हर बार चुपचाप सबकुछ देखते रहने से अच्छा था कि हमसे जितना बन सका उतना करके सरकार को दिखा दिया कि नहीं हमारे अंदर की गैरत अभी ज़िंदा है। आप हमारे दिलों में भले ही ये वसवसा डाल चुके हैं कि हमारे आंदोलन अराजक हो जाया करते हैं लिहाज़ा हम सड़कों पर उतरकर एहतेजाज करने से कतराने लगे थे। लेकिन हमने इस तरफ़ कभी ध्यान ही नहीं दिया कि हम गाँधीवादी तरीके से भी एक बड़ा एहतेजाज कर सकते हैं।

हुकूमत के सामने अपना गुस्सा और विरोध दर्ज करा सकते हैं। पर इस ईद बकायदा हमने करके दिखाया और उसका जितना भी हुआ असर भी हमें साफ़ साफ़ दिखाई दिया। अख़लाक़ से लेकर नजीब तक के मसलों पर मूंह में दही जमाए बैठे मंत्री से लेकर संत्री तक सब बोल उठे।
इंशाअल्लाह काली पट्टी मुहिम की ही तरह आप सबका साथ और सहयोग रहा तो अगस्त में हम एक और गाँधीवादी तरीका अपनाकर हुकुमत को ये बताने की कोशिश करेंगे की हम किसी भी कीमत पर भीड़तंत्र को लोकतंत्र पर कभी हावी होने नहीं देंगे।

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गोडसेवादी विचार-धारा को गाँधीवादी विचार-धारा पर हावी होने नहीं देगे। हमसे जो बन पड़ेगा जितना बन पड़ेगा हम गाँधीवादी तरीके अपनाकर यूँ हीं देश और दुनियाँ को अपनी बात सुनने पर मजबूर करते रहेंगे। सत्ता के गलियारों में अपनी उपस्थिति दर्ज कराते रहेंगे।

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