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अच्छे दिन: नवजात को बचाने में भारत सोमालिया और अफगानिस्तान से भी पीछे

नई दिल्ली। नेशनल जनमत ब्यूरो

कहां तो तय था चिराग एक-एक घर के लिए
कहां मयस्सर चिराग सारे शहर के लिए।।

बसीम बरेलवी की ये लाइनें आज के हालात के लिए एक दम मौजूं हो उठी हैं.  चुनाव से पहले मोदी जी गर्भवती महिलओं और शिशुओं को बचाने की बात करते थे, पर सरकार आते ही उन्होंने चिकित्सा का बजट घटा दिया. इसका परिणाम ये हुआ कि भारत शिशु मृत्यु दर में सोमालिया और अफगानिस्तान जैसे हिंसाग्रस्त औऱ भुखमरी की कगार पर खड़े देश से भी पीछे चला है गया है.

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द लेंसेट नामक मेडिकल जर्नल में छपी जीबीडी यानि ग्लोबल बर्डन ऑफ डिसीज नामक स्टडी रिपोर्ट में इस बात दावा किया गया है कि भारत में पैदा होने वाले बच्चे के जीवित रहने की संभावना सोमालिया और अफगानिस्तान जैसे हिंसाग्रस्त औऱ भुखमरी की कगार पर खड़े देशों से भी कम है. भारत के नेपाल, पाकिस्तान, श्रीलंका जैसे गरीब पड़ोसी देश इस मामले में भारत से बेहतर हैं.

194 देशों में भारत 154 वें स्थान पर- 

शिशु मृत्युदर में भारत 194 देशों में से 154 वें स्थान पर है. भारत में प्रति 1000 बच्चों में से 49 बच्चों की मौत जन्म के समय हो जाती है. पिछले साल भारत की रैंक 143 थी पर मोदी सरकार की लचर मेडिकल सेवाओं के चलते नवजात बच्चों को बचाने के मामले में भारत और पीछे चला गया. चुनाव से पहले पीएम मोदी ने लोगों से वादा किया था कि भारत में कोई दवा की कमी या डॉक्टर की कमी से नहीं मर पाएगा, पर चुनाव जीतने के बाद उन्होंने चिकित्सा का बजट घटा दिया.

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