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12 बजे शुरू हुआ पीएम का GST ज्ञान, इधर लोग बोले ‘छोटी गंगा बोल के नाले में उतार दीस क्या बे’

नई दिल्ली। नेशनल जनमत ब्यूरो

नोटबंदी की तरह जीएसटी को भी गरीबों के लिए लाभदारी बताते हुए पीएम मोदी ने एक अनोखे अविष्कार जीएसटी की लांचिंग रात 12 बजे संसद भवन में एक जश्न के साथ की। इधर जीएसटी के परम प्रताप का असर देखिए रात में ही पीएम मोदी के शुभचिंतकों के कीबोर्ड बज उठे.

फेसबुक पर लोगों की प्रतिक्रियाएं- 

अब से गाय के बहाने मुसलमानों के क़त्ल नही होगे , किसानों की आत्महत्या रूक ही जायेगी , अब दलितों को समान अधिकार मिलने लगेगा और दलित पुजारी बनाये जायेंगे , आरएसएस की प्रमुख आगे से महिला बनेगी , गंदगी ढोने का काम अब से इंसान नही किया करेंगे , बड़ी क्रांति आने वाली है नये ” लॉंच ” किये जीएसटी क़ानून से।
नही भाई , साहेब बोले कि जीएसटी सिर्फ़ आर्थिक प्रगति ही नही सामाजिक बदलाव का कारक बनने जा रहा है।

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वरिष्ठ पत्रकार- उर्मिलेश उर्मिल-

GST का नारा आकर्षक है, राष्ट्रवाद से सराबोर: ‘एक देश-एक टैक्स!’ लेकिन ‘एक देश’ में टैक्स ही क्यों एक हो? एक देश में बच्चों की पढ़ाई और सभी नागरिकों की दवाई एक जैसी क्यों नहीं? फिर टैक्स के लिए किस बात का जश्न! वह भी आधी रात में ! कारपोरेट-खुशी का या अति केंद्रीकृत शासन-व्यवस्था का जश्न!

वरिष्ठ पत्रकार – दिलीप मंडल –

अब पौने दो साल ही बचे हैं। पता नहीं विकास कब होगा? आज GST हुआ है।

मोदी के सारे चुनावी भाषण यूट्यूब पर हैं। कल से खोजने में आदमी लगा रखा है। किसी भाषण में GST का वादा नहीं है। और जो भाषण में है, उसकी मोदी बात ही नहीं कर रहा है।

गंगा नदी बोलकर मोदी ने देश को गंदे नाले में कुदा दिया।

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दिल्ली विश्वविद्यालय में एसोसिएट प्रोफेसर केदार मंडल –

एक देश एक टैक्स,फिर मंदिर पर टैक्स क्यों नहीं ?
एक देश एक झंडा,फिर भगवा झंडा क्यों?
एक देश एक संविधान,फिर मनुस्मृति क्यों ?
एक देश एक शिक्षा,फिर प्राइवेट शिक्षण संस्थान क्यों ?
क्यों-क्यों-क्यों ??? बताओ मोदी जी ॥

वरिष्ठ पत्रकार सत्येन्द्र पीएस- 

जीएसटी के खिलाफ या इसके पक्ष में नहीं लिख रहा। मुझे पता है कि जो प्रभावित होगा, वो होगा ही। भाड़ में जाए। हमारे ऊपर थोड़ी महंगाई की मार पड़ेगी, सह लेंगे।
यह सरकार नोटबंदी को राष्ट्रवाद और राष्ट्रीय हित बनाकर बेंच ले गई । यूपी में नन्हजतिया सब इसलिए खुश हो जाते थे कि बाऊ साहेब की नोट फुंक गई, राष्ट्र आगे बढ़ रहा है। जबकि नोटबंदी से सभी थोड़ा बहुत तबाह हुए। किसी अमीर आदमी पर कोई असर नहीं पड़ा। 6 महीने भयंकर मंदी रही और अभी भी उद्योग जगत इससे उबर नहीं पाया है, भयंकर छंटनी हुई, लोगों की नौकरियां गईं।
जीएसटी भी बिकेगा। जो मर रहा है मरे, जो तबाह हो रहा है तबाह हो। लिखने विखने का कोई फायदा नहीं है।

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स्नेहल भाई पटेल- 

सभी टीवी न्यूज चैनल मिडिया ने GST को पारसमणि बताया जिसके छूने से भारत सोने की चिड़िया बनकर विकास के आसमान मे उडेगा.!
भक्तिभाव

फेसबुक एक्टीविस्ट आरएम बाथम – 

#GST आज gst की थोड़ी सी जब बारीकियां जानी तो जानकर ऐसा लग जैसे के मनुस्मृति को पुनः लागू किया जा रहा है ? जिसमे लिखा है शुद्र को कभी भी धन संचय करने का अवसर नही दिया जाना चाहिए ।
शुद्र को कभी भी अच्छे कपड़े पहनने का अधिकार नही दिया जाना चाहिए ।
शुद्र को कभी भी अच्छा खाने नही देना चाहिए ।
शुद्र को कभी भी ऐष्वर्य भोग नही क्या जाना चाहिए ।
आज शुद्र को हम गरीब या मध्यम वर्ग कह सकते है । जहाँ उसे कभी भी अच्छा खाने पहनने और रहने या सवारी करने की सभी वस्तुओ में इतना ज्यादा कर लगा दिया कि वो कभी इसके विशेय में दोनच भी ना सके ।
वाह रे ज्ञानी महाराज कहा से उठा कर कहा पटका।
जय अम्बेडकर
आर एम बाथम

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फेसबुक एक्टीविस्ट संजय कुमार- 

नोटबन्दी करने की हड़बड़ी थी( बिना नोट छापे)।
अब जीएसटी लागू करने की हड़बड़ी है (बिना व्यापारियों को विश्वास में लिए)
कंही साहेब हड़बड़ी में ‘झोला’ उठा के चल देने के मूड में तो नहीं? आखिर सभी देशों का दौरा तो हो ही गया

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