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जीएसटी, मोदी सरकार ने लागू किया छोटे कारोबारियों की मौत का फरमान

नई दिल्ली, नेशनल जनमत ब्यूरो।

बीजेपी को पहले छोटे बनियों या व्यापरियों की पार्टी माना जाता था। पर केन्द्र की मोदी सरकार ने जीएसटी के रूप में ऐसा फरमान सुनाया है कि अब छोटे बनिया- व्यापारियो का बाजार की गला काट प्रतियोगिता में टिके रहना मुस्किल हो गया है। जीएसटी लागू होने से पहली बार सभी व्यापारी टेक्स के दायरे में आ गए हैं।

जीएसटी लागू करने की तैयारी में लगी मोदी सरकार भले ही अपनी पीठ थपथपा रही हो. लेकिन यह उसके गले की फांस बन सकता है. दरअसल ‘एक देश, एक टैक्स’ का मिशन देश के छोटे कारोबारियों के लिए मुसीबत साबित होने जा रहा है। डायरेक्ट औऱ इनडायरेक्ट टैक्स के मामलों के जानकारों का कहना है कि जीएसटी से जुड़े नियमों से बड़े कारोबारियों पर तो कोई खास फर्क नहीं पड़ेगा लेकिन छोटे कारोबारियों को भारी परेशानी होगी.

जीएसटी से छोटे कारोबारियों को क्या नुकसान है-

जीएसटी से जुड़े नियमों में कई खामियां हैं. प्रोसेस में गड़बड़ियां हैं.

-अगर छह दिन में फॉर्म नहीं भरा तो कार्रवाई हो जाएगी.
-सारा बिल तरीके से अपलोड नहीं किया गया तो पेनाल्टी लग सकती है.
-एसोसिएशन ऑफ टैक्स लॉयर्स के राष्ट्रीय अध्यक्ष अजय सिन्हा का कहना है कि बड़े कारोबारी तो नियमों का पचड़ा झेल लेंगे लेकिन छोटे कारोबारियों को
एक फुलटाइम ट्रेंड अकाउंटेंट रखना होगा.
-इसके साथ ही जीएसटी में खाता बही को किसी चार्टर्ड अकाउंटेंट से ऑडिट कराने का प्रावधान भी खर्च बढ़ाने का सौदा है. क्योंकि इनकम  टैक्स के लिए एक बार खाता बही की ऑडिट तो कराना ही पड़ता है.
-सीए की फीस देनी होगी. फिर जीएसटी के लिए भी ऑडिट कराने में पैसे देने होंगे.

जीएसटी के नियम साफ न होने की वजह से देश में छोटे निर्माताओं ने प्रोडक्शन घटा दिया है. दरअसल उनके सामने ऊहापोह की स्थिति है. उन्हें यह स्पष्ट नहीं है कि एक जुलाई के बाद उनके पुराने स्टॉक पर इनपुट क्रेडिट मिलेगा या नहीं या जुलाई से पहले बनने वाले कच्चे माल पर कर की दरें क्या होंग. निर्माताओं, थोक और खुदरा विक्रेताओं के बीच इस बात को लेकर असमंजस की स्थिति है कि जीएसटी लागू होने के बाद बचे माल की क्या स्थिति होगी.

अपने ही कोर वोटर को मुश्किल में डाला बीजेपी ने-

जीएसटी के नियमों की उलझनों ने छोटे कारोबारियों, निर्माताओं को परेशान कर दिया है। ऐसे कारोबारियों का एक बड़ा वर्ग बीजेपा का कोर वोटर है। इन्हें लगता है कि जीएसटी लाकर मोदी सरकार ने अपनों पर ही गाज गिराई है. बीजेपी शासित प्रदेशों में भी छोटे कारोबारी जीएसटी के समर्थन में नहीं हैं. सरकारें छोटे कारोबारियों को जीएसटी के फायदे ठीक से समझा नहीं पा रही हैं।

ऐसे में उनकी आशंकाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। विश्लेषकों का मानना है कि सरकार टैक्स प्रक्रिया को सरल करने और वस्तुओं और सेवाओं के दामों में समानता लाने का दावा करके जीएसटी लागू कर रही है लेकिन जमीन पर ऐसा होता नहीं दिख रहा है। जिस लालफीताशाही और बाबूगीरी से टैक्स व्यवस्था को निकालने की कोशिश के दावे किए जा रहे हैं, वे सही साबित होते नहीं दिखते.

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