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गुजरात चुनाव: हार-जीत से परे इन 3 युवा शख्सियतों ने पूरे देश के युवाओं को ऊर्जा से भर दिया है

नई दिल्ली/अहमदाबाद,  नेशनल जनमत ब्यूरो। 

गुजरात मे चुनाव प्रचार का समय खत्म हो चुका है। अब दो रातें ही शेष हैं। इन दो रातों में गुजरात की दिशा के साथ-साथ देश की दिशा भी तय होगी। राजनीति के जानकार मान रहे हैं कि गुजरात चुनाव परिणाम 2019 के लिए जमीन तैयार कर देंगे।

चुनाव प्रचार खत्म होने के बाद गुजरात में चुनावी अभियान को करीब से देखने के लिए उत्तर प्रदेश से पहुंचे सामाजिक कार्यकर्ता अनूप पटेल ने अपनी समझ के हिसाब से इस चुनाव का विश्लेषण और आंकलन किया है।

अनूप लिखते हैं कि जनमानस में गुस्सा और युवाओं में उबाल को देखते हुए इतना कहा जा सकता है कि गुजरात का जनमानस प्रधानसेवक की लफ्फाजी को रिजेक्ट करने का पूरी तरह से मन बना चुका था। रही सही कसर युवा शख्सियतों ने पूरी कर दी।

मोदी-मय-मीडिया को सोशल मीडिया की बढ़ती ताकत ने बेअसर कर दिया है। सीधी सपाट भाषा में जनता से संवाद करके कांग्रेस को राहुल गांधी ने इस बार नई ऊर्जा से भर दिया है।

इस चुनाव में और सबसे बड़ी बात तीन नयी शख्सियतों का जन्म लेना रहा। जिन्होंने पूरे देश के युवाओं को व्यवस्था परिवर्तन का रास्ता दिखाया है।

हार्दिक पटेल- 

हार्दिक ने पहली बार मोदी-अमित शाह के चक्रव्यूह को चुनौती दिया। हार्दिक पर देशद्रोह का आरोप लगाकर जेल में बंद किया। पटेल आरक्षण की मांग कर रहे 16 पटेलो को गोली मारी गयी। हार्दिक का चारित्रिक हनन करने की कोशिश हुई लेकिन हार्दिक फीनिक्स की तरह उठ खड़ा हुआ।

आज भारत का सबसे चर्चित युवा चेहरा है और युवाओं का आइकॉन है। गुजरात में मोदी का अल्टरनेटिव बन कर के उभरे हार्दिक। गुजरात मे सबसे ज्यादा सुनने के लिये लोग इकट्ठा होते है हार्दिक के लिये। हार्दिक भाजपा, कांग्रेस के अलावा तीसरी धुरी बनकर उभरे। हार्दिक को लाइव सुनने का रिकार्ड बना और मोदी का रिकार्ड तोड़ा।

फेसबुक के हेड मार्क जुकरबर्ग हार्दिक को सिलिकॉन वैली में वक्तव्य देने के लिये आमंत्रित कर चुके है। हार्दिक कम उम्र में सबसे ज्यादा मैच्योर होने वाले जननेता बन चुके है।

अल्पेश ठाकोर- 

OBC समुदाय का नया चेहरा। गुजरात के ओबीसी समुदाय को इकट्ठा किया। ओबीसी समाज की ताकत का अहसास दिलाया। अल्पेश चुनाव पूर्व कांग्रेस में शामिल हो गये। उम्मीद है अल्पेश का नेतृत्व और निखर कर आया।

अल्पेश ठाकोर गुजरात में पिछड़ा वर्ग के नेता के तौर पर उभरे हैं. उनकी छवि सामाजिक कार्यकर्ता की है. गुजरात में करीब 50 फीसदी मतदाता पिछड़ा वर्ग से आते हैं. ऐसे में इस वर्ग के नेता किसी भी दल के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं.

इसलिए ठाकोर के कांग्रेस में जाने से बीजेपी का गणित बिगड़ सकता है. गुजरात ओबीसी एकता मंच के संयोजक ठाकोर की पिछड़ा वर्ग में जबर्दस्त अपील है. उनकी छवि इसलिए सामाजिक कार्यकर्ता की रही है, क्योंकि उन्होंने राज्य में मादक पदार्थों के खिलाफ लंबी लड़ाई लड़ी है. वो शराबबंदी के पक्षधर रहे हैं.

जिग्नेश मेवानी- 

ऊना काण्ड के गुजरात का दलित चेहरा बनकर उभरा। प्रोफेशनल एजुकेशन वाला बंदा। पेशे से वकील। जिग्नेश ने युवा दलित नेता के रूप में नई पहचान बनायी। जिग्नेश विधायक पैड के उम्मीदवार है और कांग्रेस से समर्थन मांगा। राहुल गांधी जी ने जिग्नेश की मांग का समर्थन किया तथा उसके लिये उसकी बिधानसभा में जनसभा की।

जिग्नेश मजबूत नेता बन सकते है बशर्ते वो कम्युनिस्टों से उचित दूरी बनाये रखे। कम्युनिस्ट यहां की राजनीति, सामाजिक विमर्श के लिये एलियन ही है। अतः जिग्नेश को संतुलन बनाकर रखना होगा।

छोटू भाई वसावा-

जेडीयू से निर्वतमान विधायक छोटू भाई वसावा ने पहले ही अपना मुकाम बनाया है। गुजरात के आदिवासी समुदाय के प्रमुख चेहरे हैं। शरद यादव के पुराने साथी छोटू भाई वसावा ने कांग्रेस के साथ गठबंधन करके भाजपा की बढ़त को रोक दिया।

लेकिन सबसे अहम था अहमद भाई की राज्यसभा सदस्यता का चुनाव। अमित शाह ने अपनी पूरी ताकत लगा दी लेकिन अहमद पटेल को हरा न पाये।

अहमद पटेल के विजयी होते ही कांग्रेस में नवजीवन का संचार हुआ। चुनाव खत्म होते होते पूरा चुनाव फिर से अहमद पटेल पर केंद्रित हुआ। मोदी ने अहमद पटेल को निशाना बनाकर साम्प्रदायिक विभाजन करने की कोशिश की लेकिन कामयाब नही हुआ।

शाम ढल रही है। आज से साढ़े तीन साल पहले जो सूरज उगा था, वो अस्त हो रहा है। अब तो नये सूरज की नयी किरण का इंतज़ार है। 18 दिसम्बर की सुबह का इंतज़ार है।

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