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फर्क तो पड़ता है बॉस, अमेरिका में सिखों ने तस्वीर को जूतों से पीटा, देश में आकर गोहत्या पर रो दिए PM

नई दिल्ली/ गुजरात। नेशनल जनमत ब्यूरो

देश में गाय के नाम पर मुस्लिमों की भीड़ द्वारा हो रही अमानवीय हत्याओं के विरोध में अमेरिका में सिख समाज और अमेरिकी नागरिकों ने पीएम मोदी के खिलाफ जबरदस्त प्रदर्शन किया था. सिख अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न से इतने आक्रोशित थे कि उन्होंने पीएम मोदी के पोस्टर पर जूतोंं की बौछार कर दी. हाथ में बड़ी-बड़ी तख्तियां लिए लोगों का कहना था ‘अपराधी मोदी को गिरफ्तार करो’।

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जब इतना सब कुछ विरोध हुआ पोस्टर पर जूते भी पड़ गए तो आत्माभिमानी पीएम को कष्ट तो होना ही था सो पीएम साहब भारत आए गुजरात दौर पर गांधी जी के साबरमी आश्रम गए और गोरक्षा के नाम पर हिंसा पर रो दिए। एक बात तो है मुख्यधारा का कहलाने वाला गोदी मीडिया कोई खबर दिखाए या न दिखाए. सोशल मीडिया की ताकत अच्छे-अच्छे ताकतवार इंसान को झुकने पर मजबूर कर रही है. सिखों और अमेरिकियों के प्रदर्शन का असर तो  दिख रहा है बॉस।

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गुजरात दौर पर रो दिए पीएम- 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज (गुरुवार) से दो दिनों के गुजरात दौरे पर हैं. सबसे पहले वह अहमदाबाद के साबरमती आश्रम पहुंचे, जहां आश्रम के 100 साल पूरा होने के समारोह में हिस्सा लिया.  इसके बाद पीएम मोदी ने भीड़ की हिंसा पर कहा कि गाय की सेवा महात्मा गांधी और विनोबा भावे से सीखनी चाहिए. गोरक्षा के नाम पर हिंसा क्यों?

मौजूदा हालातों पर पीड़ा होती है. गाय की सेवा ही गाय की भक्ति है. गोरक्षा के नाम पर हिंसा ठीक नहीं है. देश को अहिंसा के रास्ते पर चलना होगा. गोभक्ति के नाम पर लोगों हत्या स्वीकार नहीं की जाएगी. अगर वह इंसान गलत है तो कानून अपना काम करेगा, किसी को भी कानून हाथ में लेने की जरूरत नहीं है. हिंसा समस्या का समाधान नहीं है.

भीड़ की हिंसा को गलत बताते हुए पीएम मोदी ने कहा कि मरीज की मौत पर अस्पताल को फूंकना गलत है. उस डॉक्टर का कोई दोष नहीं है, जो आपके परिवार के सदस्य की सेवा कर रहा था, लेकिन उस सदस्य को बचा नहीं पाया. लेकिन फिर भी आपको शिकायत है तो कानून है. हिंसा समस्याओं का समाधान नहीं है. हमारा देश अहिंसा और गांधी का देश है.

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कहानी भी सुनाई पीएम ने- 

जो देश चींटी को भी कुछ खिलाने पर विश्वास रखता है, जो देश गली में कुत्ते को भी कुछ खिलाने पर विश्वास रखता है उस देश को क्या हो गया है. पीएम मोदी ने एक कहानी के माध्यम से अपनी बात समझाई. उन्होंने कहा कि जब मैं छोटा था तो हमारे घर के पास एक परिवार रहता था. उस परिवार में कोई संतान नहीं थी, जिसके कारण काफी तनाव का माहौल रहता था. काफी समय बाद उस घर में एक संतान का जन्म हुआ. उस समय एक गाय वहां पर आती थी और रोजाना कुछ खाकर जाती थी.

एक बार गाय के पैर के नीचे बच्चा आ गया था, और उसकी मौत हो गई. दूसरे दिन सुबह ही वह गाय उनके घर के सामने खड़ी हो गई, उसने किसी के घर के सामने रोटी नहीं खाई. उस परिवार से भी रोटी नहीं खाई. गाय के आंसू लगातार बह रहे थे. वह गाय कई दिनों तक कुछ नहीं खा-पी सकी. पूरे मोहल्ले के लोगों ने काफी कोशिश की लेकिन गाय ने कुछ नहीं खाया और बाद में अपना शरीर त्याग दिया. एक बच्चे की मौत के पश्चाताप में उस गाय ने ऐसा किया, लेकिन आज लोग गाय के नाम पर ही हत्या कर रहे हैं.

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गौरतलब है कि भीड़ द्वारा हत्या को लेकर पीएम मोदी के बयान की काफी लंबे समय से प्रतीक्षा थी. उन्होंने अपने बयान के माध्यम से कानून अपने हाथ में लेने लोगों को कड़ा संदेश दिया जरूर है लेकिन अमेरिका में हुई थू-थू के बाद.

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