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17 साल बाद बेगुनाह होकर जेल से निकले गुलजार, बोले जेल में मेरे जैसे सैकड़ों हैं

डुमरियागंज (यूपी)। नेशनल जनमत संवाददाता

अब्दुल मुबीन अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के छात्र रहे हैं. बम धमाके के आरोप में 4 सितंबर-2000 को अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय कैंपस से उन्हें और उनके मित्र गुलजार वानी को गिरफ्तार किया गया था.आठ साल बाद 8 अगस्त-2008 को मुबीन को तो रिहा कर दिया गया. लेकिन उनके साथ गिरफ्तार हुए गुलजार वानी को बेगुनाही साबित करने में 17 साल लग गए.

बड़ा सवाल सिस्टम की गलती की भरपाई कैसे होगी-

बड़ा सवाल ये है कि मुबीन की जिंदगी के 8 साल और गुलजार वानी की जिंदगी के 17 साल कौन लौटाएगा. इस बीच इनके परिवार वालों ने जो कुछ खोया, उसकी भरपाई कौन करेगा? क्या इन दोनों और ऐसे सैकड़ों बेगुनाह साबित होने वाले लोगों को सरकार की तरफ से मुआवजा नहीं मिलना चाहिए. मुबीन अपना दर्द बयां करते हुए कहते हैं कि मैं जो बनना चाहता था अब चाह कर भी नहीं बन पाऊंगा. बस मुझे सिर्फ कानूनी तौर पर थोड़ा सुकून है.

जेल में मिली यातनाओं से सिहर जाता है दिल- 

मुबीन कहते हैं कि मेरे तीन बेटे और एक बेटी है, मेरे जेल जाने से तीनों की पढ़ाई-लिखाई छूट गई. मुबीन ने बताया कि जेल में उनको भयानक यातनाएं दी गईं. गुप्तांगों पर करंट लगाया गया, नंगा करके मारा गया, दाढ़ी नोची गई और उनसे कहा गया कि अपना जुर्म कबूल कर लो.

खैर मुबीन और गुलजार वानी की कहानी अकेली की नहीं है ऐसे लाखों लोग हैं जो बेगुनाही साबित करते-करते जीवन के कई साल यूंही गंवा देते हैं. ये ऐसा पहलू है जो भारतीय पुलिस व्यवस्था और भारतीय न्याय व्यवस्था को कटघरे में रखता है.

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