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वसुंधरा सरकार को भारी पड़ रहा है जाट नेता बेनीवाल का निलंबन, 1 जून को राजस्थान बंद

जयपुर। नेशनल जनमत ब्यूरो

खींवसर के निर्दलीय विधायक और कद्दावर किसान नेता हनुमान बेनीवाल का राजस्थान विधानसभा से निष्कासन रद्द करने की मांग जोर पकड़ती जा रही है. विभिन्न सामाजिक और किसान संगठन जयपुर में लगातार प्रदर्शन करके निलंबन वापस करने की मांग कर रहे हैं. धीरे-धीरे ये मांग राजनीतिक से ज्यादा मान-सम्मान का सवाल बनती जा रही है. जाट से लेकर दलित और युवा से लेकर किसाानों के विभिन्न संगठनों ने 30 मई को सिविल लाइंस का घेराव और 1 जून को राजस्थान बंद करने की चेतावनी दी है. 

मान-सम्मान बचाओ कमेटी का गठन- 

हनुमान बेनीवाल के समर्थन में किसानों ने मान-सम्मान बचाओ कमेटी का गठन किया है. इस कमेटी ने वसुन्धरा सरकार पर आरोप लगाया है कि सरकार ने किसान नेता हनुमान बेनीवाल को निष्कासित करके लोकतंत्र का गला घोंट दिया है. हनुमान बेनीवाल ने हमेशा किसानों और दलितों के हक में सदन से लेकर सड़क तक आवाज उठाई है. उनको निलंबित करके सरकार ने किसानों और दलितों को अपमानित किया है.

प्रदेश व्यापी आंदोलन की तैयारी- 

प्रदेशव्यापी आंदोलन के लिए सात सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है. इसमें किसान बचाओ, देश बचाओ, वीर तेजा सेना राजस्थान, राजस्थान मरु प्रदेश किसान मोर्चा, बहुजन स्टूडेंट फ्रंट, भारतीय किसान यूनियन सहित कई संगठन शामिल हैं. किसान बचाओ देश बचाओ संघर्ष समिति के प्रतिनिधि पंकज धनखड़ ने बताया कि बेनीवाल का निलंबन प्रदेश के किसानों का अपमान है।

क्यों हुआ था निलंबन- 

राजस्थान विधानसभा में बजट सत्र के दौरान प्रश्नकाल शुरू हुआ तो कांग्रेस विधायक गोविंद सिंह डोटासरा ने एक पूरक प्रश्न पूछने के लिए बटन दबाया, लेकिन स्पीकर कैलाश मेघवाल ने उन्हें मौका नहीं दिया. डोटासरा ने इसका विरोध किया तो स्पीकर ने कहा कि यह उनके अधिकार क्षेत्र का मामला है. इसी बात पर विपक्षी विधायक अशोक चांदना और धीरज गुर्जर समेत कई विधायकों ने हंगामा शुरू कर दिया. बाद में सदन की व्यवस्था बनाए रखने के लिए स्पीकर को मार्शल बुलाने पड़े. इसी मामले को अनुशासनहीनता मानते हुए 14 विधायकों का निलंबन हुआ था, जिसमें बेनीवाल भी एक थे.

कांग्रेस के 12 विधायकों का निलंबन हो चुका है वापस- 

मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस की तरफ से पहल करने के बाद विपक्ष के 14  में से 12 कांग्रेसी विधायकों का निलंबन एक साल से घटाकर एक दिन कर दिया गया. जबकि बसपा के मनोज न्यांगली और निर्दलीय हनुमान बेनीवाल के एक साल के निलंबन में बदलाव नहीं किया गया है. कहा गया है कि जब तक दोनों विधायक स्पीकर के चैंबर में जाकर उनसे माफी नहीं मांगते तब उनके निलंबन में बदलाव नहीं किया जाएगा.

 

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