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हार्दिक पटेल-राहुल गांधी कनेक्शन बनाम उत्तर प्रदेश के दो पटेल युवा तुर्कों का संघर्ष

नई दिल्ली, नेशनल जनमत ब्यूरो। 

कांग्रेस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी अमेरिका के सफलतम दौरे के बाद गुजरात की तीन दिन की यात्रा पर पहुंचे थे . इसी साल के अंत में गुजरात विधानसभा के चुनाव है. गुजरात चुनाव आगामी लोकसभा चुनाव के लिये सबसे अहम है. बीजेपी के एकलौते स्टार प्रचारक पीएम मोदी का गृह राज्य होने के नाते गुजरात में जिस दल की जीत होगी, वही 2019 में केंद्र सरकार का प्रबल दावेदार होगा.

राहुल गांधी के गुजरात आगमन का पाटीदार समाज के नेता हार्दिक पटेल ने स्वागत किया है. हार्दिक पटेल पिछले 3 साल से नरेंद मोदी के तथाकथित ‘गुजरात माडल” का कच्चा चिटठा खोल रहे है. हार्दिक गुजरात के लगभग 20 प्रतिशत पाटीदार समाज का नेतृत्व करते है और अपने समाज के लिये नौकरियों में आरक्षण की मांग कर रहे है.

हार्दिक ने 2015 में क्रांति रैली में 12 लाख पाटीदारो को इकठ्ठा किया था, तभी से हार्दिक मोदी सरकार के निशाने पर है. गुजरात सरकार द्वारा पाटीदार समाज की उपेक्षा करने पर कई कई आन्दोलन हुये जिनमे 20 से ज्यादा पाटीदार मारे जा चुके है. गुजरात के युवा पटेल्स भाजपा सरकार के खिलाफ ‘विकास गान्द्यो छे’ (विकास पगला गया है) के नारे को वायरल कर चुके है.

पाटीदार आक्रोश के चलते पिछले जिला पंचायत चुनावो में भाजपा को करारी शिकस्त मिली थी और कई वर्षो से हाशिये में चल रही कांग्रेस को शानदार जीत मिली थी. गुजरात में भाजपा सरकार ने मुस्लिम समाज को दरकिनार कर दिया है, वही ऊना प्रकरण के बाद दलित वर्ग भाजपा के खिलाफ हो गया है. गुजरात के आदिवासी समुदाय के बड़े नेता विधायक छोटू भाई वसावा ने भी भाजपा के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है.

छोटू भाई ने हाल के राज्यसभा चुनाव में अपनी पार्टी जदयू के खिलाफ जाकर कांग्रेस के प्रत्याशी अहमद पटेल को वोट दिया था. छोटू भाई शरद यादव खेमे वाली जदयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं और आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के साथ चुनाव लड़ने के संकेत दिए है. गुजरात की इन बदली हुयी परिस्थितियों में हार्दिक पटेल का राहुल गांधी के साथ आना बड़े बदलाव के संकेत है.

हार्दिक पटेल की गुजरात के इतर देश के अन्य राज्यों में कुर्मी समुदाय के बीच अच्छी पकड़ है. हार्दिक पटेल पिछले तीन वर्षो में कई राज्यों का दौरा कर चुके हैं और कुर्मी समुदाय के प्रमुख लीडर के तौर पर उभरे है. अहमदाबाद के सबसे बड़े मैदान GMDC ग्राउंड में रैली करने के बाद हार्दिक ने दिल्ली की तरफ रुख किया और किसान समुदाय के बड़े लीडरान के साथ पहली मीटिंग की थी.

हार्दिक पटेल को राष्ट्रीय राजनीति में लाने में जेएनयू के शोधार्थी अनूप पटेल का बड़ा योगदान था.  बुंदेलखंड के बांदा के रहने वाले अनूप पटेल 2015 से ही गुजरात के पाटीदार आन्दोलन को वाच कर रहे है. हार्दिक ने उत्तर प्रदेश में किसानो की कई मीटिंग्स को संबोधित भी किया है. उत्तर प्रदेश में कुर्मी समाज इस समय नेतृत्वविहीन है. इस समय तरुण पटेल तेजी से उभर रहे है.

फोटो: हार्दिक पटेल के साथ प्रेस कांफ्रेंस में अनूप पटेल सफेद कुर्ते में बाएं

गोंडा के तरुण पटेल राहुल गांधी की कोर टीम के मेंबर है, तरुण पटेल संगठन में भी लोकप्रिय चेहरा है. 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस से चुनाव लड़ चुके है उत्तर प्रदेश के युवाओं के बीच तरुण पटेल तेजी से लोकप्रिय हो रहे है. हार्दिक पटेल अपने निर्वासन के समय जब राजस्थान में रह रहे थे उस समय तरुण पटेल, प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता आशीष दीक्षित और मुरली मनोहर के साथ हार्दिक की लंबी मीटिंग हुयी थी.

फोटो: हार्दिक पटेल के साथ कांग्रेस नेता तरुण पटेल सबसे किनारे दाएं

मीटिंग के दौरान कई राजनीतिक पहलुओ पर चर्चा भी हुयी थी. तरुण पटेल ने हार्दिक पटेल को कांग्रेस के साथ आने का न्योता भी दिया था. हार्दिक पटेल के कांग्रेस के साथ आने से उत्तर प्रदेश की राजनीति में व्यापक असर पड़ेगा. यदि कांग्रेस तरुण पटेल को प्रदेश की राजनीति में चेहरा बनाती है तो कांग्रेस को युवाओं का और किसानी समुदाय भी समर्थन मिलेगा और कांग्रेस प्रदेश में 28 साल बाद फिर सरकार बनाने की ओर बढ़ सकती है.

(लेखक मुरली मनोहर शोधार्थी हैं और कांग्रेस से जुड़े हुए हैं)

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