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बदलते मूड की आहट: BJP शासित हरियाणा के गुरुग्राम (गुड़गांव) नगर निकाय चुनाव में बुरी तरह हारी BJP

नई दिल्ली, नेशनल जनमत ब्यूरो।

देश भर में भगवा अतिवाद के खिलाफ पनप रहे आक्रोश का असर धीरे-धीरे लोगों की मानसिकता पर पड़ता दिखाई दे रहा है। विभिन्न विश्वविद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने जिस तरह से भगवा सोच को नकारा वो बीजेपी की साम्प्रदायिकता की राजनीति के लिए खतरे की घंटी है।

खैर छात्रसंघ चुनावों और नगर निकाय चुनावों से आम चुनावों का आंकलन बेमानी होगी लेकिन लोगों के बदलते मूड की आहट तो इसे कहा ही जा सकता है।

हरियाणा विधानसभा चुनाव में बीजेपी के वादों से खुश होकर लोगों ने उसकी झोली में खूब वोट डाले। बीजेपी ने विधानसभा चुनाव में प्रदेश का कायाकल्प करने का वादा किया था। समय बीतता गया लेकिन मनोहर लाल खट्टर सरकार के कान पर जूं नहीं रेंगी।

हरियाणा के लोग जल्द ही बीजेपी के चाल चरित्र और चेहरे को पहचान गए। यहां पर लोगों का बीजेपी से मोह भंग हो गया। रविवार (24 सितंबर) को हरियाणा के गुरुग्राम में नगर निकाय चुनाव हुए जिनके परिणाम वोटिंग वाले दिन ही घोषित कर दिए गए ।

नगर निकाय चुनाव के आए नतीजों में लोगों ने बीजेपी को पूरी तरह नकार दिया। गुरुग्राम के लोगों ने नगर निकाय चुनाव में किसी भी राजनीतिक पार्टी को तवज्जो नहीं दी। घोषित चुनाव परिणाम में निर्दलीय उम्मीदवारों का दबदबा कायम रहा।

गुरुग्राम के 35 वार्ड में हुए नगर निकाय चुनाव में बीजेपी के मात्र 13 उम्मीदवार जीते है। जबकि 21 सीटों पर निर्दलीय प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की है। वहीं एक सीट इनेलो उम्मीदवार के खाते में गई।

मीडिया खबरों के मुताबिक रविवार को चुनाव करवाए गए और मतदान के ही दिन वोटों की गिनती की गई। इस चुनाव में 52.12 फीसदी मतदाताओं ने वोट डाले।

बताते चलें गुरुग्राम के 35 नगर निगम वार्डों में मतदाताओं की खासी संख्या है। इन वार्डों में वोटर्स की संख्या 5 लाख 58 हजार 884 है। इन वोटर्स में 2 लाख 92 हजार 938 पुरुष जबकि 2 लाख 65 हजार 946 महिला मतदाता हैं।

जानकारों का मानना है कि इस बार गुरुग्राम के लोगों ने स्थानीय मुद्दों को देखते हुए वोट किया। लोगों का मानना है गुरुग्राम में बिजली, पानी, सड़क और सीवर मुख्य समस्याएं हैं।

 

 

 

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