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डेरा समर्थकों की गुंडई और हिंसा के बीच हरियाणा की BJP सरकार मूक दर्शक बनी तमाशा देखती रही

नई दिल्ली/हरियाणा। नेशनल जनमत ब्यूरो 

दिल्ली के 11 ज़िलों समेत नोएडा, गाज़ियाबाद में धारा 144 लागू, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान के कई ज़िलों में कर्फ्यू. स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है।

हिंसा के चलते पूरे हरियाणा में सेना लगाई गई है. पुलिस और सेना के जवान लगातार मार्च कर रहे हैं. हरियाणा पुलिस का कहना है कि स्थिति काबू में आ रही है. उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर, शामली, बागपत, नोएडा, गाजियाबाद में कर्फ्यू लगा दिया है.

पंजाब के बठिंडा, पटियाला, संगरूर, मोगा में कर्फ्यू लगा दिया गया है. पंजाब विभिन्न जगहों पर हिंसा को देखते हुए पंजाब सरकार ने केंद्र और ज्यादा सुरक्षा बलों की मांग की है. राजधानी दिल्ली की पुलिस ने बताया है कि दिल्ली के सभी 11 जिलों में धारा 144 लगा दी गई है.

हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, दिल्ली में हिंसा की खबरें हैं. जबकि उत्तर प्रदेश के कुछ जिलों में एहतियातन धारा 144 लगाई गई है.

फैसला आते ही बेकाबू हुए डेरा समर्थक-

डेरा सच्चा सौदा के गुरमीत रामरहीम पर बलात्कार के आरोप पर विशेष अदालत के फैसले के बाद उनके समर्थकों की हिंसा में अब तक 30 लोगों की मौत हो चुकी है और 300 से ज्यादा लोगों के घायल होने की खबर है. हरियाणा के एडीजीपी (लॉ एंड आॅर्डर) ने बताया, डेरा सच्चा सौदा के 1000 समर्थकों को हिरासत में लिया गया है.

हरियाणा के पंचकूला में अदालत का फैसला आते ही रामरहीम के समर्थकों ने उपद्रव शुरू कर दिया. भीड़ ने पुलिस की बैरीकेडिंग तोड़ दी और हिंसा शुरू कर दी. देखते देखते पंचकूला शहर सुलगने लगा और हर तरफ मौत और तबाही का मंजर देखने को मिला.

पिछले चार दिन में गुरमीत राम रहीम के हजारों अनुयायी यहां एकत्र हो गए थे. अदालत का फैसला आते ही राम रहीम के समर्थकों ने पथराव किया, मीडिया के वाहनों में तोड़फोड़ की और दोपहिया वाहनों समेत कई वाहनों में आग लगा दी. निजी टेलीविजन चैनलों के कम से कम तीन ओबी वैन को क्षति पहुंचाई गई. दो वैन को उग्र भीड़ ने उलट दिया.

हिंसक हुए डेरा अनुयायियों ने कई जगह पुलिस और अर्द्धसैनिक बल कर्मियों के लिए मुश्किल हालात खड़े कर दिए. अनुयायियों में बहुत सी महिलाएं थीं.

खट्टर सरकार की नाकामी- 

विपक्ष ने आरोप लगाया है कि हरियाणा सरकार केवल भीड़ को बढ़ते हुए देखती रही और जब तक स्थितियां हाथ से निकल नहीं गई तक तक कोई कार्रवाई नहीं की.

पिछले एक हफ्ते से डेरा समर्थकों का पंचकूला में जुटना जारी था. पंचकूला में सीबीआई अदालत के शुक्रवार को फैसला सुनाए जाने तक तकरीबन दो लाख डेरा समर्थक चंडीगढ़ के लगे इस शहर में पहुंच चुके थे.

इसके बावजूद हरियाणा सरकार और प्रशासनिक अमले की ओर पंचकूला पहुंच रही भीड़ को रोकने के लिए कोई इंतज़ाम नहीं किए गए थे.

मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने स्वीकार किया है कि चूक हुई जिसकी वजह से डेरा समर्थक हिंसा कर पाए. मुख्यमंत्री ने नुकसान की भरपाई करने का वादा किया है.

हिंसा और मौतों की ज़िम्मेदारी लेते हुए मनोहर लाल खट्टर से विपक्ष ने इस्तीफे की मांग की है. राज्य कांग्रेस प्रमुख अशोक तंवर ने कहा कि सरकार संवेदशनशील स्थिति से निपटने में पूरी तरह से नाकाम रही.

उन्होंने कहा, ‘मुख्यमंत्री को निश्चित रूप से इस्तीफा दे देना चाहिए. सरकार की असफलता की वजह से पंचकूला में स्थितियां नियंत्रण से बाहर हो गईं. सरकार को पंचकूला में इतनी बड़ी संख्या में डेरा समर्थकों के जुटने पर रोक लगानी चाहिए थी.’

रिपोर्ट के अनुसार, हरियाणा में विपक्ष के नेता अभय चौटाला ने कहा, ‘शुक्रवार को भड़की हिंसा ने कानून और व्यवस्था से निपटने के राज्य की भाजपा सरकार की अयोग्यता को उजागर कर दिया है.’

इससे पहले भी भड़क चुकी है हिंसा- 

हरियाणा में ऐसे मामलों में हिंसा भड़कने का इतिहास रहा है. इससे पहले 2014 में सतलोक आश्रम प्रमुख की गिरफ्तारी पर भी राज्य हिंसा की चपेट में आ गया था. इसके अलावा पिछले साल नौकरी और शिक्षा में आरक्षण की मांग को लेकर जाटों का धरना भी हिंसा में तब्दील हो गया था.

2014 में सतलोक आश्रम के प्रमुख रामपाल को हत्या के एक मामले में गिरफ्तार करने गई पुलिस से रामपाल समर्थक भिड़ गए थे. इस मुठभेड़ में छह लोगों की मौत हो गई थी.

डेरा समर्थकों की हिंसा पर सुनवाई आज- 

भड़की हिंसा के मामले में पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय शनिवार को सुनवाई करेगी. इससे पहले उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए शुक्रवार को कहा था कि हिंसा से हुए नुकसान की भरपाई गुरमीत राम रहीम की संपत्ति जब्त कर की जाएगी.

शुक्रवार को भड़की हिंसा के बाद हरियाणा और पंजाब के अलावा हिमाचल प्रदेश, दिल्ली, गाजियाबाद, उत्तराखंड में स्थितियां तनावपूर्ण हो गई थीं.

गुरमीत राम रहीम के जेल जाने के बात डेरा सच्चा सौदा के मुख्यालय सिरसा में स्थितियां नियंत्रण में हैं. पुलिस का दावा है कि शुक्रवार रात से हिंसा की कोई वारदात की ख़बर नहीं है.

समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक पंचकूला में स्थितियां नियंत्रण में हैं. यहां धारा 144 लागू है और पुलिस बल तैनात हैं. हिंसा भड़कने के बाद पंजाब के संगरूर में भी कर्फ्यू लगा दिया गया है. उत्तराखंड के नैनीताल में में धारा 144 लागू कर दी गई है.

दिल्ली में आठ सितंबर तक निषेधाज्ञा-

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि हिंसा के मद्देनज़र राजधानी दिल्ली में आठ सितंबर तक निषेधाज्ञा जारी रहेगी।

विशेष पुलिस आयुक्त (कानून व्यवस्था, उत्तरी) एसबीके सिंह ने कहा, ‘एहतियात के तौर पर हमने 11 पुलिस ज़िलों में सीआरपीसी की धारा 144 लगा दी है.’ सीआरपीसी की धारा 144 किसी कार्यकारी मजिस्ट्रेट को इलाके में चार से अधिक व्यक्तियों के एकत्र होने पर पाबंदी लगाने का अधिकार प्रदान करती है.

सिंह ने बताया कि राष्ट्रीय राजधानी में 13 पुलिस ज़िले हैं. उत्तरी और मध्य ज़िले इस निषेधाज्ञा के दायरे में नहीं आएंगे क्योंकि वहां से किसी घटना की ख़बर नहीं है.

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