You are here

स्वास्थ्य सेवा निजी हाथों में देकर जिम्मेदारी और आरक्षण से दोनों से पल्ला झाड़ेगी मोदी सरकार

नई दिल्ली। नेशनल जनमत ब्यूरो 

मोदी सरकार ने सरकार की बड़ी जिम्मेदारियों में से एक स्वास्थ्य सेवा को भी अब निजी हाथों में देने का फैसला ले लिया है। शहरो से इसकी शुरूआत की जा रही है जिसके दायरे में जिला अस्पताल आएंगे। शहरी भारत में गैर-संचारी रोगों के इलाज के लिए निजी अस्पतालों की भूमिका में वृद्धि के लिए एक मॉडल अनुबंध का प्रस्ताव नीति आयोग और केंद्रीय स्वास्थ्य तथा परिवार कल्याण मंत्रालय ने किया है।

इस प्रस्ताव के तहत जिला अस्पताल की इमारतों में निजी अस्पतालों को 30 साल के लिए पट्टे पर दिए जाने की अनुमति दी गई और साथ ही देश के आठ सबसे बड़े महानगरों के अलावा अन्य शहरों में 50 या 100 बिस्तर वाले अस्पताल स्थापित करने की जमीन देने की अनुमति प्रदान कर दी गई है।

इसे भी पढ़ें-योगी के गोरखपुर में मेडीकल कॉलेज के 378 चिकित्सकों को पिछले चार महीने से वेतन नहीं

इलाज के लिए निजी अस्पतालों में पर्याप्त संख्या में मरीजों को सुनिश्चित करने के लिए नीति आयोग और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने सुझाव दिया है कि सिर्फ उन्हीं जिला अस्पतालों का निजीकरण किया जाएगा जिन अस्पतालों में दो साल तक रोजाना ओपीडी में 1 हजार से ज्यादा मरीजों का इलाज किया गया हो।

क्या है इनका मॉडल अनुबंध- 

मॉडल अनुबंध के तहत इन निजी अस्पतालों में कैंसर, हृदय रोगों और श्वसन तंत्र संबंधी बीमारियों के लिए द्वितीय और तृतीय चिकित्सा उपचार प्रदान किए जाएंगे जो कि सरकारी स्वास्थ्य बीमा योजनाओं के तहत नहीं आते हैं। गैर-संचारी रोगों के लिए इन तीन प्रकार के विशेष उपचार की जरूरत है, अस्पतालों में बाह्य रोगी विभाग, मरीज के बिस्तर, गहन देखभाल के लिए बेड, ऑपरेशन थिएटर, एंजियोप्लास्टी और एंजियोग्राफी, प्रयोगशालाओं और रेडियोलॉजी सेवाओं के लिए केंद्र की आवश्यकता होगी।

अनुबंध के अनुसार जिला सरकारी अस्पताल से अपनी एम्बुलेंस सेवाओं, ब्लड बैंक, फिजियोथेरेपी सेवाओं, बायो-मेडिकल कचरा निपटान प्रणाली, मुर्दाघर सेवाएं, पार्किंग सुविधाएं, बिजली भार, मरीज भुगतान काउंटर और अस्पताल की सुरक्षा को निजी उद्यम के साथ साझा करने की उम्मीद की जाएगी।

सरकारी बीमा योजना के लाभार्थी इन अस्पतालों में उपचार कराने के योग्य होंगे लेकिन सेवाओं के लिए कोई आरक्षित बेड या बेड का कोटा नहीं होगा। सामान्य रोगियों को भी इलाज की अनुमति दी जाएगी।

इसे भी पढ़ें- बेतुके फैसले नोटबंदी से गईं 15 लाख नौकरियां, 73 प्रतिशत बड़ी कंपनियां नौकरी देने की स्थिति में नहीं

इन सार्वजनिक अस्पताल परिसरों से परिचालित निजी अस्पतालों को जटिल मामलों को अन्य सरकारी अस्पतालों या अन्य निजी अस्पतालों में भेज सकेंगे। हालांकि, मरीजों को अन्य निजी अस्पतालों में भेजने के लिए जिला अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक की अनुमति की आवश्यकता होगी।

दो-स्तरीय निलामी प्रक्रिया- 

तकनीकी और वित्तीय मापदंडों के आधार पर दो चरण की निलामी के माध्यम से जिला अस्पतालों के बुनियादी ढांचे को निजी क्षेत्र के संगठनों को प्रदान किया जाएगा। बोली लगाने वाले एक इकाई के रूप में या निजी कंपनियों के एक संघ के रूप में आवेदन करने में सक्षम होंगे।

निलामी प्रक्रिया के विजेता को अस्पताल सेवाओं को चलाने के अलावा अन्य गैर-चिकित्सा व्यावसायिक गतिविधियों जैसे कि बाह्य रोगी फार्मेसी, कैफेटेरिया और अन्य सुविधाएं चलाने की अनुमति दी जा सकती है।

इस मसौदा के तहत जिला अस्पतालों को 50 बिस्तरों के निजी अस्पताल के लिए 30,000 वर्ग फुट या 100 बिस्तरों के संचालन के लिए 60,000 वर्ग फुट के लिए पट्टे देने की आवश्यकता होगी। अगर राज्य सरकार 50 बिस्तरों वाले निजी अस्पताल के लिए सहमत होती है तो जिला प्रशासन को पहले से स्थापित सरकारी अस्पताल के भीतर इस जगह का 75% हिस्सा देना होगा। 100-बिस्तरों वाले निजी अस्पताल के लिए सरकारी अस्पताल को 30,000 वर्ग फीट स्थापित क्षेत्र देना होगा।

इसे भी पढ़ें-बाल तस्करी में BJP सांसद रूपा गांगुली को CID ने भेजा नोटिस, कैलाश विजयवर्गीय पर भी आरोप

राज्यों को मॉडल भेजेगी केन्द्र सरकार- 

सरकार स्वास्थ्य क्षेत्र में निजी भागीदारी के इस मॉडल को एक प्रायोगिक आधार पर एक या दो राज्यों में चुनिंदा जिला अस्पतालों में शुरू करने की कोशिश कर रही है। स्वास्थ्य सेवा राज्य सरकारों के अधीन है। नतीजतन इस मॉडल अनुबंध को अपनाने की इच्छा रखने वाले राज्य को केंद्र सरकार इस मॉडल को प्रस्तुत करेगी।

राज्यों को इस मॉडल को पूरी तरह या इसे संशोधित कर अपनाने की शक्तियां हैं। सरकारी अधिकारियों का कहना है कि शासन के कई अन्य क्षेत्र में जो राज्य सरकारों के दायरे में आते हैं, यह संभावना है कि यह मॉडल अनुबंध पहले उन राज्यों द्वारा अपनाया जाएगा जहां भारतीय जनता पार्टी या उसके सहयोगी पार्टी की सरकार हैं।

Related posts

Share
Share