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उच्च शिक्षा में OBC को रोकने की साजिश, UGC ने एमफिल-पीएचडी के लिए नेट अनिवार्य किया

नई दिल्ली। नीरज भाई पटेल (नेशनल जनमत) 

उच्चशिक्षण संस्थानों में पढ़ लिखकर पहुंच रहे बड़ी संख्या में अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रों के लिए बुरी खबर है. अब विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने पीएचडी और एमफिल करने के लिए राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (NET), राज्य पात्रता परीक्षा (SET) और राज्य स्तरीय पात्रता परीक्षा (SLET) को अनिवार्य कर दिया है. ये नियम ज्यादातर विश्वविद्यालय में लागू होगा.

15 जून तक फीडबैक मांगा है लोगों से – 

यूजीसी ने अपनी वेबसाइट पर इस नोटिस को डालते हुए 15 जून तक लोगों से सुझाव मांगे हैं. इस नोटिस को Minimum Standards and Procedure for Awards of M.Phil/ Ph.D Degree first amendment, regulations 2017  नाम से यूजीसी ने अपनी आधिकारिक साइट पर लगाया है. http://www.ugc.ac.in/pdfnews/9837591_Public-Notice-regarding-draft-Regulations-and-Guidelines.pdf  इस लिंक पर जाकर आप पूरा निर्णय देख सकते हैं.

आखिर साल 2017 ही क्यों चुना यूजीसी ने- 

2006 में अर्जुन सिंह सरकार ने मंडल कमीशन की रिपोर्ट में दी हुई सिफारिश को माना. ओबीसी को उच्च शिक्षण संस्थानों में 27 प्रतिशत आरक्षण देने की घोषणा की थी.

आरक्षण विरोधी सुप्रीम कोर्ट चले गए.

2008 में सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी के बाद इस निर्णय को लागू किया गया.

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार आरक्षण तीन किश्तों में लागू किया गया यानि 2011 में आरक्षण ठीक ढ़ंग से लागू हो पाया उच्च शिक्षण संस्थानों में.

2011 में उच्च शिक्षण संस्थान में आरक्षण का लाभ मिलना शुरू हुआ.

यानि जो छात्र 2011 में ग्रेजुएशन करने आया. उसने तीन साल में यानि 2014 में ग्रेजुएशन कंपलीट किया.

पोस्ट ग्रेजुएशन दो साल यानि 2016 में उसका पीजी कंपलीट हुआ.

आरक्षण के बाद आ रहे छात्रों को रोकने की साजिश तो नही- 

अब जो छात्र एमए करने के बाद एमफिल या पीएचडी में एडमीशन लेने आ रहा है. उसके लिए नियम कड़े कर दिए जाएं हो सकता है यूजीसी में बैठा कोई व्यक्ति जातिवादी मानसिकता से ग्रसित हो. इसलिए उसने 2017 को ही इस नियम के लिए चुना. इतना ही नहीं 2017 में ही पीएचडी की सीटें कम कर दी गईं और प्रोफेसर कितने छात्रो को पीएचडी करा सकते हैं ये भी सीमित कर दिया गया.

कैटेगरी 3 में शामिल होने वाले संस्थानों में लागू होगा निर्णय-

यूजीसी की गाइडलाइन के हिसाब से जिन संस्थानों को कटैगरी 3 में रखा गया है. ये नियम सिर्फ उन्ही संस्थानों में लागू होगा. लेकिन सोचने की बात ये है कि बड़े-बड़े संस्थानों में तो समृद्ध लोगों और बड़े शहरों के बच्चों ने कब्जा जमाया हुआ है. ओबीसी-एससी के ज्यादातर बच्चे ही तो छोटे शहरों के संस्थानों मेें हैं. इन संस्थानों पर नियम लागू करके सरकार आखिर किसको रोकने का प्रयास कर रही है.

 

 

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