You are here

कश्मीरी पंडितों की ‘जन्मजात श्रेष्ठता’ पैरों तले रौंद डीयू की मेरिट में आगे निकले ‘आरक्षण वाले’ छात्र

नई दिल्ली। नेशनल जनमत ब्यूरो। 

जब भी आरक्षण की बात होती है, मेरिटवादी लोग किसी आरक्षित वर्ग के स्टूडेंट की मानसिक प्रताड़ना का आंकलन किए बगैर अवसरों की समानता के इस संवैधानिक तरीके को गाली देना शुरू कर देते हैं. वो शायद ये भूल जाते हैं कि ब्राह्मणों के जन्मजात श्रेष्ठ होने और मुख से पैदा होने की थ्योरी उन्हीं जैसे जातिवादी लंपटों की देन है.

अब समय बदला है 70 साल के अवसरों में ही आरक्षित वर्ग ने पटखनी देना शुरू कर दिया है. आरक्षित वर्ग को पढ़ाई-लिखाई से वंचित रखके उनसे समानता के अवसर छीनने वालों की जन्मजात श्रेष्ठता थ्योरी लगातार ओबीसी-एससी-एसटी छात्रों द्वारा पैरों तले रौंदी जा रही है. हालिया उदाहारण दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रसिद्ध  हिन्दू कॉलेज की पहली कट ऑफ का है. जहां ग्रेजुएशन के 18 विषयों की कट ऑफ में से ज्यादातर में आरक्षित वर्ग के छात्रों ने कश्मीरी पंडितों के दंभ को चकनाचूर कर दिया है.

इसे भी पढ़ेंरेप पीड़िता की मदद के लिए आगे आई एनजीओ संचालिका प्रतीक्षा कटियार पर ही पुलिस ने ठोक दिया के

18 में से 14 विषयों में कश्मीरी पंडित ओबीसी से पीछे- 

हिन्दू कॉलेज की कट ऑफ के अनुसार 18 में से 14 विषय ऐसे हैं जिनमें या तो ओबीसी के छात्र-छात्राएं कश्मीरी पंडितों के बराबर अंक पर सिलेक्ट हुए हैं या उससे कहीं ज्यादा पर.  फिजिक्स, कैमेस्ट्री, मैथमैटिक्स, जूलॉजी जैसे विषयों में ओबीसी छात्रों की कट ऑफ कश्मीरी पंडितों से बहुत आगे है.

6 विषयों में एससी छात्रों ने पटखनी दे दी विशुद्ध आर्यों को- 

हिन्दू कॉलेज के एसोसिएट प्रोफेसर और सामाजिक चिंतक रतन लाल अपनी फेसबुक वॉल पर लिखते हैं-

इसे भी पढ़ें- बीजेपी नेता की गुंडई पर लेडी सीओ बोलीं भाजपा के गुंडे हो कहीं भी हिंदू-मुस्लिम दंगा करा सकते हो

यह पोस्ट विशेष रूप से ‘मेरिटधारियों’ के लिए है:

देश का प्रतिष्ठित दिल्ली विश्वविद्यालय, में आज से स्नातक के विभिन्न पाठ्यक्रमों के लिए नामांकन प्रक्रिया शुरू हो गई है. दिल्ली विश्वविद्यालय और देश का एक नामचीन कॉलेज है – हिन्दू कॉलेज. आज हिन्दू कॉलेज की पहली कट ऑफ आपके सामने रख रहा हूँ. उम्मीद है, विभिन्न कोर्स में SC/ST/OBC और General श्रेणी के कट ऑफ का विश्लेषण तो आप कर ही लेंगे. मैं उदाहरण के लिए दो समूह के कट ऑफ मार्क्स को आपके सामने रख रहा हूँ: SC और Kashmiri Migrants (अर्थात् विशुद्ध ‘आर्य’, बाकी आप समझ लें):

BA (H) History – SC (95.75%),  Kashmiri Migrants (95.25%)
B.Com (H) – SC (91.75%),  Kashmiri Migrants (87.50%)
B.Sc (H) Chem. – SC (90%), Kashmiri Migrants (87%)
B.Sc. (H). Zoology – SC (94.66%), Kashmiri Migrants (94%)
B.Sc. Phy. Sc. – SC (87%), Kashmiri Migrants (85%)

यदि अभी भी आपकी ‘मेरिट’ की अवधारणा में बदलाव नहीं है तो इलाज़ न तो समाजशास्त्र में है, न मेडिकल साइंस में!

इसे भी पढ़ेंबीएचयू कुलपति प्रोफेसर त्रिपाठी के राज्य में खत्म हुए ओबीसी-एससी-एसटी के पद, सुप्रीम कोर्ट ने भेजा नोटिस

जन्मजात श्रेष्ठता की थ्योरी को फ्लश चलाकर बहा दो- 

वहीं वरिष्ठ पत्रकार और सामाजिक चिंतक दिलीप मंडल लिखते हैं-

देश के सबसे नामी कॉलेजों में से एक दिल्ली यूनिवर्सिटी के हिंदू कॉलेज में छह सब्जेक्ट में SC का कटऑफ कश्मीरी पंडितों से ऊपर। ST भी कुछ सब्जेक्ट में कश्मीरी पंडितों से बेहतर। OBC लगभग हर सब्जेक्ट में कश्मीरी पंडितों से ऊपर। मुँह से पैदा होने और जन्मजात श्रेष्ठता की थ्योरी को अब टॉयलेट में डालकर फ़्लश चला दो।

SC की यह उपलब्धि सिर्फ़ 70 साल की है। आपका तो सैकड़ों साल से मुँह में गर्भ ठहर रहा था। (मुँह में गर्भ वाली बात महात्मा फुले की गुलामगिरी से सादर साभार)

इसे भी पढ़ेंमहामना रामस्वरूप वर्मा के मानवतावाद और पिता की चुप्पा तकनीकि से आईएएस बने दिव्यांशु पटेल

Related posts

Share
Share