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गोरखपुर के एक छोटे से कस्बे के डॉ. एचएन सिंह पटेल कैसे बन गए गरीबों के ‘सर्जरी मैन’

नई दिल्ली। नेशनल जनमत ब्यूरो

डॉ.एचएन सिंह पटेल, पेशे से जनरल सर्जन. केजीएमयू लखनऊ जैसी प्रतिष्ठित चिकित्सा यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस करने के बाद सर्जरी में मास्टर डिग्री हासिल की. यहां तक तो जनरल सर्जरी के कोर्स की तरह सारी बातें सामान्य हैं. महत्वपूर्ण बात ये है कि डॉ.एचएन पटेल चाहते तो किसी महानगर में कॉरपोरेट हॉस्पीटल का रुख कर सकते थे. लेकिन आपने कॉरपोरेट जगत का रुख करने की बजाय गोरखपुर के छोटे से कस्बे बड़हलगंज को अपनी कर्मस्थली बनाया और बन गए गरीबों के सर्जरी मैन.

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10 साल में 4 हजार से ज्यादा गरीबों के किए नि:शुल्क ऑपरेशन-

पिछले 10 सालों में आपने 4 हजार से ज्यादा गरीब मरीजों की नि:शुल्क सर्जरी की है. गोरखपुर से 60 किलोमीटर दूर आजमगढ़-मऊ की सीमा पर पर स्थित है इनका रामरती हॉस्पीटल. तीन जिलों की सीमा से सटा होने की बजह से तीन जिलों गोरखपुर, मऊ और आजमगढ़ के मरीज इलाज के लिए इनके पास आते हैं.

ग्रामीण क्षेत्रों पर फोकस करने पर ही सुधरेगा हेल्थ सेक्टर-

डॉ. एचएन सिंह पटेल उन मरीजों के लिए एक उम्मीद की किरण हैं, जो न तो इलाज के लिए पर्याप्त धनराशि खर्च कर सकते हैं और न ही लखनऊ, वाराणसी जैसे शहर में इलाज के लिए जा सकते हैं. मऊ के सोनाडीह गांव के निवासी डॉ.पटेल हर महीने अपनी मां रामरती देवी की पुण्यतिथि के मौके पर मरीजों की फ्री में सर्जरी करते हैं. सामाजिक तौर पर सक्रिय डॉ.पटेल कई बार जरूरतमंद मरीजों को मेडिकल उपकरण भी मुहैया करा चुके हैं.

 

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डॉ. एचएन सिंह पटेल का मानना है कि ग्रामीण क्षेत्रों की स्वास्थ्य व्यवस्था सुधारने से ही देश के हेल्ट सेक्टर में सही मायने में सुधार होगा. बड़े शहरों में तो फिर भी प्राइवेट सेक्टर के बड़े-बड़े कॉरपोरेट घरानों के लोग फाइव स्टार हॉस्पीटल खोले हुए हैं लेकिन छोटे शहरों, कस्बों और गांवों की स्थिति आज भी खराब है.

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सरकारी क्षेत्रों से ज्यादा कॉरपोरेट सेक्टर की तरफ भागते हैं डॉक्टर- 

देश से गंभीर बीमारियों को नियंत्रित करने और बेहतर डॉक्टर तैयार करने के लिए प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने 60 साल पहले दिल्ली में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान यानि एम्स की स्थापना की थी. लेकिन दुर्भाग्य है कि एम्स के अधिकांश डॉक्टर विदेश चले जाते हैं या कॉरपोरेट अस्पताल तक सीमित हो जाते हैं.

ऐसे में देश के ग्रामीण क्षेत्रों का हेल्थ सेक्टर बुरी तरह से चरमरा गया है. नेशनल हेल्थ प्राेफाइल की रिपोर्ट के मुताबिक भारत की 72.2 फीसदी आबादी आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करती है, जबकि इतनी बड़ी आबादी पर मात्र 38.2 फीसदी डॉक्टर हैं. 61.8 फीसदी डॉक्टर आज भी महानगरों अथवा छोटे शहरों में रहते हैं। अत: किसी भी समस्या के लिए मरीजों को शहरों का रूख करना पड़ता है और अपनी जेब खाली करनी पड़ती है.

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