You are here

MP: सामाजिक बदलाव की मिसाल बने IAS अनुराग चौधरी, बदल दिए 87 सरकारी स्कूलों के जातिसूचक नाम

नई दिल्ली, नीरज भाई पटेल (नेशनल जनमत) 

मन में सामाजिक विभेद मिटाने की प्रबल इच्छा हो तो इस काम को सड़क पर उतरकर क्रांति के नारे लगाए बिना भी किया जा सकता है। वो भी अपनी कलम की ताकत से। इस बात को साबित करके दिखाया है 2010 बैच के मध्य प्रदेश कैडर के युवा आईएएस ऑफीसर ने।

सामाजिक समरसता लाने के लिए अपने अधिकार और ताकत का सही इस्तेमाल करने के लिए इस आईएएस ऑफीसर की चर्चा पूरे मध्य प्रदेश में है। मूलत: उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले के निवासी आईएएस अनुराग चौधरी ने मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले में सामाजिक परिवर्तन की एक अलग ही मिसाल कायम की है।

स्कूलों से हट गए जातिसूचक नाम- 

जिलाधिकारी अनुराग चौधरी ने तीन महीने की कड़ी मशक्कत के बाद सिंगरौली जिले के उन 87 सरकारी स्कूलों के नाम बदल दिए हैं जो दशकों से जाति विभेद पैदा कर रहे थे।

जिला प्रशासन की पहल पर ऐसे स्कूल जिनकी स्थापना या नामकरण 15 से 50 साल पहले हुआ था, उनका नाम बदल दिया गया है। जिन स्कूलों का नाम बदला गया है वो पहले जाति-सूचक नामों पर आधारित थे। इस वजह से दूसरे समुदाय के लोग अपने बच्चों को वहां भेजने से परहेज करते थे।

महापुरुषों के नाम पर बदले नाम- 

नेशनल जनमत से बातचीत में डीएम अनुराग चौधरी ने बताया कि किसी स्कूल का नाम हरिजन बस्ती, खैरवारी टोला, विरयानी टोला, बैगा बस्ती, गोदान टोला या बसोर टोला के नाम पर था जिसे अब बदलकर ऐतिहासिक महापुरुषों के नाम पर कर दिया गया है।

इन स्कूलों का नाम बदलकर डॉ. अम्बेडकर, स्वामी विवेकानंद, चंद्रशेखर आजाद, महारानी दुर्गावती, बिरसा मुंडा जैसी हस्तियों के नाम पर रखा गया है।

इसके अलावा कुछ स्कूलों के नाम में टोलों का नाम बदलकर आदर्श टोला, झरिया टोला, आजाद नगर भी किया गया है। इन स्कूलों में प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च विद्यालय भी शामिल हैं, जो राजधानी भोपाल से करीब 700 किलोमीटर दूर हैं।

जिले के भ्रमण में सुने थे अटपटे नाम- 

जिलाधिकारी अनुराग चौधरी ने बताया कि जिले के भ्रमण के दौरान उन्हें जाति सूचक स्कूलों के नाम और वहां सामाजिक भेदभाव होने की बात पता लगी। इसके बाद उन्होंने नियमानुसार स्कूलों का नाम बदलने की प्रक्रिया शुरू की।

इस प्रक्रिया में सभी स्कूलों की प्रबंधन समिति, ग्राम सभा, ग्राम पंचायत व सरकारी विभागों से सिफारिश, अनुमोदन और संस्तुति मिलने के बाद 80 स्कूलों के नाम बदले गए हैं। सभी स्कूलों के शिलापट्ट पर भी नए नाम लिखे जा चुके हैं।

अब गुणवत्ता सुधार के लिए करेंगे प्रयास- 

डीएम ने कहा कि इन स्कूलों का सिर्फ नाम बदलने भर तक उनकी कोशिश सीमित नहीं है। बल्कि स्कूलों की गुणवत्ता भी सुधारने का प्रयास होगा। उन्होंने कहा है कि जो स्कूल बेहतर परफॉर्म करेंगे, उन्हें स्वाधीनता दिवस यानी 15 अगस्त को सम्मानित किया जाएगा।

अनुराग चौधरी ने आगे कहा, उनकी कोशिश है कि इन सरकारी स्कूलों के बच्चे अंग्रेजी भले न बोल पाएं मगर कम से कम उसे जरूर समझ सकें।

उन्होंने बताया कि एनटीपीसी, कोल इंडिया जैसी सरकारी क्षेत्र की पीएसयू कंपनियों से कहा है कि सीएसआर के नाम पर स्कूलों में सिर्फ वाटर फिल्टर या पंखा-कूलर ना लगाएं बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए भी सहयोग करें।

महाकवि विनीत विक्रम बौद्ध की स्मृति में आयोजित बौद्धिक सम्मेलन में 21-22 को रीवा में जुटेंगे दिग्गज

मोदीराज: धर्म की चासनी में लपेटकर खत्म कर ही दिया आरक्षण, प्रोफेसर के 52 पदों में OBC-1, SC/ST-0

सोशल मीडिया की ताकत: गीता यादव ने शुरू की रेप के खिलाफ मुहिम, देश भर में सड़क पर उतरी महिलाएं

क्या पत्रकारों को आवास भी जाति देखकर बांटे गए CM साहब ! सूची से दलित, पिछड़े, मुस्लिम गायब

कठघरे में सुप्रीम कोर्ट ! जस्टिस चेलमेश्वर ने सुनवाई से किया इनकार, बोले 24 घंटे में बदल जाएगा मेरा फैसला

RTI खुलासा: खुद को पिछड़ा बताने वाले PM के ऑफिस को नहीं पता कि देश का पहला OBC PM कौन है?

 

Related posts

Share
Share