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जानिए आरक्षण विरोधी IAS मणिराम शर्मा क्यों बोले “10 शब्द बोलता हूं उसमें 8 शब्द गाली ही होती है”

नई दिल्ली/हरियाणा। नेशनल जनमत ब्यूरो।

हरियाणा के नूह (मेवात) जिले के उपायुक्त मणिराम शर्मा (डीसी) द्वारा फेसबुक पर की गई टिप्पणी से बवाल मच गया है. फेसबुक पोस्ट तो स्वच्छता अभियान को लेकर थी लेकिन भाषा ऐसी कि गली-मोहल्ले का गुंडा किसी को धमका रहा हो.

2009 बैच के आईएएस अफ़सर मणिराम शर्मा नूह (मेवात) के ज़िला मजिस्ट्रेट (उपायुक्त) हैं. उनकी फेसबुक पोस्ट पर धमकी और फिर उसके जवाब में उनकी आरक्षण विरोधी मानसिकता स्पष्ट दिखाई दे रही है. अपनी फेसबुक पर स्वच्छता अभियान का जिक्र करते हुए मणिराम ने फ़ेसबुक पर मंगलवार को एक तस्वीर जारी की थी, जिसमें कुछ लोगों को घुटने के बल बैठा दिखाया गया है और पुलिस उनके इर्द-गिर्द खड़ी है. ( नीचे तस्वीर देखें)

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तस्वीर डालने के साथ ही  मणिराम शर्मा ने लिखा-

सालाहेडी और सलम्बा. खुले में शौच के लिए दो सर्वाधिक बदनाम गांव. दोनों गांव में बड़े-बड़े लोग. उनसे ज्यादा संख्या में बड़े-बड़े लोगों के चमचे. इस चमचागिरी की ताकत के दम पर ही ना ये सरपंच की सुनते हैं और ना ही जिला प्रशासन की.

आज इनकी अकड़ ढीली करनी थी और तसल्ली से ढीली कर भी दी. फ़ोटो में दिखने वाले चारों व्यक्ति न केवल सम्पन्न और पहुंच रखने वाले हैं, बल्कि इनके घरों में शौचालय भी हैं.

फिर भी चमचागिरी की ताकत का भरोसा कुछ ज्यादा ही था इनको. इनको न केवल विभिन्न धाराओं में गिरफ्तार किया गया, नाक रगड़वाई गई और फिर पंचायत खाते में जुर्माना भी वसूल किया गया.

शर्मा ने आगे लिखा, “एक तरफ कहते हैं कि खुले में शौच करने वालों का ना रोज़ा कबूल होता है और ना नमाज़. वहीं दूसरी तरफ पाक रमज़ान में यह हरकत. नाकाबिले बर्दाश्त तो है ही. जाहिर सी बात है कि फोर्स इसी हिसाब से धावा बोलेगी.”

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जवाब में डाली घमंड से भरी आरक्षण विरोधी पोस्ट- 

लोगों की प्रतिक्रियाओं और विरोध के बाद मणिराम शर्मा ने एक और फ़ेसबुक पोस्ट डाली. इसमें उनकी भाषा को लेकर आपत्ति जता रहे लोगों को चुनौती देते हुए उन्होंने लिखा-

“कुछ लोगों को मेरी भाषा-शैली पर आपत्ति है. संख्या ज्यादा ही है. आपत्ति करने वालों ने मेरी भाषा अभी सुनी ही कहां है. मेरी भाषा में दस शब्दों वाले वाक्य में आठ शब्द गाली ही होते हैं. वही मेरी ऑरिजनल भाषा है. और मुझे अपनी भाषा से बहुत प्यार है. आप लोगों को जाकर UPSC में शिकायत अवश्य करनी चाहिए, जिन्होंने एक बार नहीं, दो बार नहीं; बल्कि तीन बार मुझे IAS सिलेक्ट किया और वह भी बिना किसी रिज़र्वेशन के.”।

अल्पसंख्यकों के गांव हैं सालाहेडी और सलम्बा-

नूह (मेवात) के पूर्व विधायक आफ़ताब अहमद ने मणिराम शर्मा की फ़ेसबुक पोस्ट की निंदा की. आफ़ताब अहमद ने कहा, “सालाहेडी और सलम्बा, दोनों ही अल्पसंख्यकों के गांव हैं. छह से सात हज़ार दोनों की आबादी है. ज़्यादातर लोग कामगार हैं और गरीब हैं. इनकी सामाजिक और आर्थिक स्थिति को समझे बिना, इन्हें ‘बदनाम’ कहना ठीक नहीं है.”

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सोशल मीडिया पर लोगों ने जताई आपत्ति- 

मणिराम शर्मा की इस पोस्ट पर कमेंट करते हुए मोहम्मद साबिर शम्सी ने लिखा, “यह कहना सही नहीं कि खुले में शौच करने वालों का रोज़ा नमाज़ कुबूल नहीं होता. जो भाषा आप ने इस्तेमाल की है यह बिलकुल भी अच्छे इंसान की भाषा नहीं है. इस तरह की भाषा का प्रयोग कोई घमंडी आदमी ही कर सकता है. यह किसी बड़े अधिकारी या कलेक्टर की भाषा नहीं हो सकती.”

हटा ली है पोस्ट- 

विवाद होने और लोगों की तरफ से प्रतिक्रियाएं आने के बाद दंभी डीएम ने अपनी दोनों पोस्ट अपने एकाउंट से डिलीट कर दी हैं. फिलहाल उनके अकाउंट पर जाने पर पोस्ट उपलब्ध नहीं हैं.

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