You are here

आरक्षण खात्मे की ओर मोदी सरकार के बढ़ते कदम, अब प्राइवेट लोगों को IAS बनाएगी केन्द्र सरकार

नई दिल्ली। नेशनल जनमत ब्यूरो 

पिछड़े और दलितों को गाय, गंगा और योग में फंसाकर, आरक्षण को सीधे तौर पर खत्म ना करके मोदी सरकार धीरे-धीरे संघी एजेंडे के तहत निजीकरण के माध्यम से आरक्षण खत्म करती जा रही है। रेलवे से लेकर हवाई सेवाओं को निजीकरण करके वहां से हजारों नौकरियां खत्म की जा रही हैं। लेकिन दलित-पिछड़े वर्ग के लोग अपने बच्चों के भविष्य को देखने की बजाए इस इंतजार में हैं कि कब अयोध्या में राममंदिर बने और हम अपने बच्चों को साथ ले जाकर वहां धर्म का मजीरा बजाएं।

इस बीच पिछड़ों और दलितों के अधिकारों पर बार-बार कुठाराघाट करके संघ ने ये समझ लिया है कि कुछ भी करते रहो धर्म की चासनी में लिपटा ये वर्ग विद्रोह नही करेगा, इसलिए धीरे-धीरे वो अपना एजेंडा सरकार के माध्यम से लागू कराती जा रही है।

प्राइवेट लोगों को अधिकारी बनाने की तैयारी-

अब केंद्र सरकार ने देश की सबसे प्रतिष्ठित मानी जाने वाली सिविल सेवाओं से भर्ती की जगह लैटरल एंट्री का प्रावधान करने जा रही है। प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DOPT) को इसके लिए प्रस्ताव तैयार करने को कहा है। सरकार चाहती है कि निजी क्षेत्र के एक्जीक्यूटिव को विभिन्न विभागों में उप सचिव, निदेशक और संयुक्त सचिव रैंक के पदों पर नियुक्त किया जाए। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, स्टाफ के लिए नीति पत्र के जवाब में यह फैसला लिया गया है।

वेतन तय नहीं- 

सूत्रों के मुताबिक, निजी क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का उनकी योग्यता और अनुभव के आधार पर चयन किया जाएगा। हालांकि, ऐसे लोगों के मौजूदा वेतन का निर्धारण नहीं किया जाएगा। कैबिनेट सेक्रेटरी की अध्यक्षता में बनी समिति ऐसे लोगों का अंतिम रूप से चयन करेगी।

शुरुआत में 40 लोगों का होगा चयन-

माना जा रहा है कि शुुरुआत में निजी क्षेत्रों, शिक्षा, गैर सरकारी संगठनों से जुड़े तकरीबन 40 ऐसे लोगों का चयन किया जाएगा।

पहले कहा था… ऐसा कोई विचार नहीं-

पिछले साल ही अगस्त में कार्मिक राज्य मंत्री जीतेंद्र सिंह ने लोकसभा में यह बताया था कि ऐसी समिति गठित करने की कोई योजना नहीं है, जो सिविल सेवाओं में लैटरल इंट्री की संभावना पर विचार कर सके।

जीरो टॉलरेंस की  नौटंकी- 

इससे पहले केंद्र सरकार ने आईएएस, आईपीएस जैसे सीनियर अधिकारियों से लेकर जिम्मेदार पदों पर आसीन बाबुओं तक अपने 67 हजार सरकारी कर्मचारियों के कामकाज की समीक्षा शुरू की है। मकसद है अच्छा और खराब प्रदर्शन करने वाले कर्मचारियों की पहचान।

सेवा से जुड़े कोड ऑफ कंडक्ट का पालन नहीं करने वाले कर्मचारियों को दंडित भी किया जा सकता है। सरकार ने केंद्र में ऊंचे और प्रमुख पद दिए जाने के लिए आईएएस अधिकारियों की स्क्रीनिंग के लिए 360 डिग्री (संपूर्ण) प्रोफाइलिंग शुरू की। देखते जाइगा इस नौटंकी माध्यम से भी दलितों ॉ-पिछड़ो को अयोग्य साबित  करके घर बैठा दिया जाएगा।

पीसीएस अधिकारियों की क्यों नहीं लेते सेवाएं-  

उत्तर प्रदेश के पीसीएस संगठन से जुड़े एक पदाधिकारी का कहना है भईया नाम मत छापना सरकार कैसी है आपको तो पता ही है। लेकिन  उन्होंने महत्वपूर्ण बात कही है उन्होंने कहा कि अगर सरकार की मंशा गलत नहीं है और आरक्षण खत्म करने के लिए ये कदम नहीं उठाया गया है तो उपसचिव और निदेशक जैसे पदों पर राज्य सरकार से पीसीएस अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति क्यों नहीं खोली जा रहीं। क्या राज्य सरकार की पीसीएस परीक्षाओं से आए अधिकारी प्राइवटे व्यक्तयों से अच्चा काम नहीं कर पाएंगे ?

नेशनल जनमत के सवाल- 

केन्द्र सरकार अगर अधिकारियो की कमी का रोना रो रही है तो किसकी जिम्मेदारी है पदों को बढ़ाने की केन्द्र सरकार के अधीन ही तो है यूपीएससी बढ़ा दीजिए आईएएस अधिकारियों के पदो को।

केन्द्र सरकार ये सुनिश्चित करे की प्राइवेट सेक्टर से आने वाले लोगों में उचित प्रतिनिधित्व दिया जाएगा ओबीसी-एससी को।या चयन समित में ओबीसी-एससी वर्ग के लोगों को जरूर रखा जाएगा।

अगर ऐसा नहीं होता है तो ये भी जजों के कोलोजियम सिस्टम की तरह सवर्णों की नियुक्ति का साधन बनकर रह जाएगी।

Related posts

Share
Share