शहरी ऐशोआराम को ठोकर मारकर बिहार में मुखिया बन गई IAS की पत्नी ऋतु जायसवाल

नई दिल्ली। नीरज भाई पटेल (नेशनल जनमत)

जिस महिला के पति दिल्ली में आईएएस हों उसका भला किसी गांव से क्या वास्ता हो सकता है. हां इतना तो हो सकता है कि त्योहारों पर गांव चले जाएं लेकिन वो दिल्ली जैसे शहर की चकाचौंध और चमकधमक छोड़कर शायद ही कभी गांव में रहने की सोचेगी. लेकिन ये साबित करके दिखाया है ऋतु जायसवाल ने. वर्तमान मे दिल्ली में आईएएस अरुण कुमार जायसवाल की पत्नी ॠतु बिहार में सीतामढ़ी के सिंघवाहिनी पंचायत से मुखिया हैं.

सीतामढ़ी के गांवों की नई इबारत लिख रही हैं ऋतु-

गांव के विकास के लिए तत्पर ऋतु ने जब मुखिया का चुनाव लड़ा तब लोगों को समझाया कि अपना वोट मत बेचो. मुखिया को पंचायत में शौचालय व पानी की व्यवस्था करनी होती है इसलिए उन्हें चंद रुपयों के लोभ में वोट नहीं बेचना चाहिए. ऐसा करने से आपका मुखिया गांव में विकास के काम नहीं कराएगा. आप पैसा लिए होंगे तो बोल भी नहीं पाएंगे. लोगों को भी बात समझ आ गई और उन्हें समर्थन देकर भारी मतों से जीत दिया.

गांव में बिजली तक नहीं पहुंची थी- 

दिल्ली विश्वविद्यालय के कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर अरुण कुमार बताते हैं कि ऋतु दीदी के ही प्रयास से आजादी के बाद गांव मे पहली बार बिजली पहुंची. कुछ एनजीओ की मदद से बच्चों के लिए ट्यूशन क्लास शुरू करवाई गई. असर यह हुआ कि इस बेहद पिछड़े गांव की 12 लड़कियां एक साथ मैट्रिक पास हुईं. गांव के लोगों के कहने पर ही उन्होंने चुनाव लड़ा और तमाम जातीय समीकरणों के बावजूद भारी मतों से जीत गईं.

एनजीओ की मदद से गांव में लड़कियों को प्रशिक्षण दिलाए- 

अपने गांव की एक डॉक्युमेंट्री बनाई और एनजीओ को दिखाकर उसे गांव में काम करने के लिए तैयार किया. ऋतु बताती हैं कि दो साल में कई एनजीओ आए और गांव की महिलाओं और लड़कियों को सिलाई-कढ़ाई की ट्रेनिंग दिलाई गई. इसका सारा फंड एनजीओ ही वहन करते थे. करीब दो साल पहले नरकटिया के बच्चों के लिए से दो ट्यूटर लगवाए.

जिस उम्मीद के साथ लोगो ने जिताया है उसे हर हाल में पूरा करना है-

ऋतु जायसवाल कहती हैं कि जिस उम्मीद के साथ गांव के लोगों ने उन्हे मुखिया चुना है उसे वो हर हाल में पूरा करेंगी. अब गांव में रहकर ही गांव की तस्वीर बदलेंगी. उन्होंने बताया कि उनके गांव में ना तो चलने के लिए सड़क है और ना ही पीने के लिए शुद्ध पानी. लोगों को शौचालय के बारे में भी पता नहीं था कि शौचालय क्या होता है. गांव के तक़रीबन अस्सी प्रतिशत लोग आज भी खुले में शौच के लिए जाते हैं. बिजली सहित तमाम मूलभूत सुविधाओं से लोग अब भी कोसों दूर हैं. अभी बहुत कुछ काम करना है मुझे.

कृषि विभाग से ट्रेनिंग दिलाएंगी किसानों को –

वह कहती हैं कि मूलभूत सुविधाओं को पूरा करने के बाद ही विकास के काम पर ध्यान देंगी. विकास के लिए उन्होंने कृषि विभाग से बात की है. विभाग गांव के लोगों को ट्रेंनिंग देगा जिससे लोगों को रोजगार भी मिलेगा. गांव की भूमि कृषि योग्य है पर लोग अब बाहर जा रहे है कमाने के लिए. गांव में सिर्फ औरतें और बुजुर्ग ज्यादा रह गए हैं.

सिंघवाहिनी पंचायत में नरकटिया को मिलाकर 6 गांव हैं। नरकटिया की आबादी 2300 के आसपास है। बाकी सभी गांव इससे बड़े हैं। इससे पहले जितने भी मुखिया थे उन्होंने कुछ काम नहीं किया है।

पति और बेटी ने मानसिक बल दिया इस काम के लिए-

ॠतु जयसवाल के दोनों बच्चे बैंगलोर के एक स्कूल में पढ़ते हैं. ऋतु कहतीं हैं मुखिया बनने का फैसला आसान नहीं था इसके लिए उनकी बेटी अवनि जो 7वीं में पढ़ती है और उनके पति का बहुत मानसिक सपोर्ट रहा. वह अपने बेटी के बारे में कहती हैं कि जब उन्होंने अपनी बेटी से बात की तो वह बोली कि मैं तो होस्टल में रह लूंगी और आपके वहां रहने से बहुत सारे बच्चों की जिंदगी बदल जाएगी. बेटी की इस बात से उन्हें बहुत हौसला मिला.

ऐसे समय में जब एक मोटी कमाई वाले अधिकारी पति की चाहत ज्यादातर लड़कियों में होती है. ये सब मिलने के बाद भी ऋतु शहर की सारी सुख सुविधाओं को छोड़ समाज सेवा के मकसद से गाँव की तस्वीर बदलने में लगी है. इसके लिए नेशनल जनमत ऋतु जायसवाल के जज्बे को सलाम करता है.

3 Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Share
Share